कला सरोकार : केनवास पर उतरी बच्चों की कल्पनाशीलता

कला सरोकार : केनवास पर उतरी बच्चों की कल्पनाशीलता

कला सरोकार : केनवास पर उतरी बच्चों की कल्पनाशीलता

श्री गणेश उत्सव में 120 बाल कलाकारों ने चित्रकारी में दिखाए हुनर के रंग

⚫ वी. जी. बोरगांवकर एवं प्रवीण नारले की स्मृति में हुई  चित्रकला प्रतियोगिता

हरमुद्दा
​रतलाम, 20 सितंबर। महाराष्ट्र समाज में श्री गणेश उत्सव के पावन पर्व पर बच्चों की रचनाधर्मिता, अपार उत्साह और रचनात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

रविवार को वी. जी. बोरगांवकर एवं प्रवीण नारले की स्मृति में एक भव्य चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस स्पर्धा में प्राथमिक स्तर से लेकर महाविद्यालयीन स्तर तक के लगभग 120 बाल कलाकारों और युवाओं ने हिस्सा लेकर अपनी कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाया। प्रारंभ में दोनों के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।

हाथों में थमी तूलिका (ब्रश), सामने सजा केनवास और मन में उमड़ते विचारों की तरंगें

प्रतिभागियों ने अपनी कल्पना को केनवास पर उकेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देखते ही देखते सफेद पन्नों और केनवास पर रंगीन दुनिया जीवंत हो उठी। बच्चों का उत्साह और कला के प्रति समर्पण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।

तीन वर्गों में हुनर का प्रदर्शन

उत्सव समिति सचिव एवं स्पर्धा संयोजक वैशाली बोरगांवकर तथा संदीप नारले ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन तीन अलग-अलग आयु वर्गों में किया गया था, ताकि हर वर्ग के कलाकार को अपनी सोच व्यक्त करने का सही मंच मिले।

सब जूनियर वर्ग: छोटे बच्चों ने 'अष्टाविनायक' विषय पर भगवान गणेश के विभिन्न मनमोहक रूपों को अपनी बाल-सुलभ कल्पना और भक्ति भाव से चित्रित किया।

जूनियर वर्ग: इस वर्ग के प्रतियोगियों को 'फुटबॉल' विषय दिया गया, जिसमें उन्होंने खेल की ऊर्जा, गतिशीलता और मैदान के रोमांच को जीवंत रंगों के माध्यम से दर्शाया।

सीनियर वर्ग: महाविद्यालयीन एवं वरिष्ठ प्रतियोगियों के लिए 'युद्ध' जैसा गंभीर विषय रखा गया। युवाओं ने अपनी परिपक्व सोच के साथ युद्ध की विभीषिका, संघर्ष और शांति के संदेश को कलात्मकता से रेखांकित किया।

कला और संस्कृति का मिला संगम

इस आयोजन ने न केवल बच्चों की रचनात्मक क्षमता और चित्रकारी के प्रति उनके रुझान को उजागर किया, बल्कि गणेश उत्सव के सांस्कृतिक माहौल में एक नया उत्साह भर दिया।
​कार्यक्रम के दौरान नरेंद्र पंढारकर, नितिन बोरगांवकर सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। उपस्थित अतिथियों और दर्शकों ने बच्चों के प्रयासों, उनके रंगों के चयन और विषयों की गहरी समझ की भूरि-भूरि प्रशंसा की। आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब नन्हे हाथों को सही मंच और विषय मिलता है, तो उनकी रचनाधर्मिता किसी भी केनवास को जीवंत बना सकती है।