धर्म संस्कृति : बरवड़ हनुमान मंदिर में भक्ति का प्रवाह

धर्म संस्कृति : बरवड़ हनुमान मंदिर में भक्ति का प्रवाह

⚫ SBI पेंशनर्स एसोसिएशन ने हनुमान चालीसा पाठ कर सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश

हरमुद्दा
​रतलाम, 1 अक्टूबर। आधुनिकता के इस दौर में अपनी धर्म और संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहना समाज के सर्वांगीण विकास और आत्मिक शांति के लिए परम आवश्यक है। इसी पवित्र भावना को साकार करते हुए श्री बरवड़ हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ एवं भव्य आरती का आयोजन हुआ। धर्म, संस्कृति और भ्रातृत्व के इस संगम में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पेंशनर्स एसोसिएशन, रतलाम के सदस्यों ने सपरिवार सहभागिता दर्ज कर न केवल धर्मलाभ प्राप्त किया, बल्कि सनातन परंपराओं के संरक्षण का एक अनुकरणीय उदाहरण भी प्रस्तुत किया।


​संस्कृति और वरिष्ठों का सम्मान

धार्मिक अनुष्ठानों की यह परंपरा हमारी भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत का कार्य करती है। आयोजन के दौरान बरबड़ हनुमान मंदिर समिति द्वारा अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। मंदिर समिति के सचिव शांतिलाल चौधरी ने एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश तिवारी, सचिव बी.के. चेचानी एवं वरिष्ठ सदस्य तरनी प्रकाश व्यास को प्रभु के चरणों की पावन पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मंदिर समिति के सम्मानित ट्रस्टी रमेश शर्मा एवं शंकरलाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

​सपरिवार सहभागिता: भक्तिमय वातावरण में गूंजे जयकारे

इस धार्मिक अनुष्ठान में पेंशनर्स परिवार के सदस्यों ने अपनी उपस्थिति से वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ की गूंज से संपूर्ण मंदिर प्रांगण सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।

​कार्यक्रम में श्रीमती रेणु रविन्द्र सिंह, उषा अशोक माहेश्वरी, निर्मला महेन्द्र डोडिया, कांता आर.एन. विजयवर्गीय, नीलू ऋषि दुबे, माधुरी प्रशांत सोनी, सुनीता चेचानी, ज्योति व्यास, संगीता तोमर, अजय गर्ग, चन्दन भाटिया, दिनेश मालपानी, किशोर चौधरी एवं मधुसूदन त्रिवेदी सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स एवं उनके परिजन श्रद्धापूर्वक सम्मिलित हुए।

​लोक-कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना

अनुष्ठान के समापन पर महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान श्री हनुमानजी महाराज से नगर व राष्ट्र में सुख-शांति, स्वास्थ्य और विश्व कल्याण की प्रार्थना की। सामूहिक रूप से किए गए ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ बनाते हैं और समाज में समरसता तथा सकारात्मकता का संचार करते हैं।