जन सुनवाई में संवेदनशीलता : लेकिन उन्होंने खड़े खड़े बुजुर्ग की सुनी समस्या, दिए निर्देश

जन सुनवाई में संवेदनशीलता : लेकिन उन्होंने खड़े खड़े बुजुर्ग की सुनी समस्या, दिए निर्देश

कलेक्टर और सीईओ ने संवेदना पूर्वक सुनी समस्या

⚫ डिप्टी कलेक्टर्स को दिए निर्देश 

⚫ उनके उठते ही भाग खड़े हुए विभागों के अधिकारी

हरमुद्दा
रतलाम, 2 दिसंबर। घड़ी में 1 बजकर 2 मिनट हो चुके थे, कलेक्टर मिशा सिंह जैसे ही कुर्सी से उठ खड़ी हुई, वैसे ही अन्य विभाग के अधिकारी भी उठकर हो गए रवाना, तभी 1 बजकर 4 मिनट पर एक बुजुर्ग आए, तब सीईओ वैशाली जैन मैडम जाने को तैयार थी लेकिन उन्होंने उनकी समस्या संवेदनशीलता के साथ खड़े खड़े सुनी, समझी और संबंधित को निर्देश दिए। 

पिछली बार समस्या लेकर आने वालों की फजीहत हुई थी। डिप्टी कलेक्टर को समस्याएं सुनने में रुचि नहीं थी। समय पूरा होने के 10 मिनट पहले एक डिप्टी कलेक्टर आए थे। हरमुद्दा डॉट कॉम ने हाल हकीकत बयां की थी। इसलिए इस बार कलेक्टर सिंह और सीईओ जैन ने संवेदना पूर्वक समस्याएं सुनी और जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए।

तब वे आ रहे थे मुंह बनाकर

जनसुनवाई में 71 आवेदन आए। 12 बजकर 20 मिनट बजे तक आधे से ज्यादा लोग कलेक्टर मैडम को समस्या बता कर संतुष्ट हो चुके थे। जितनी मुस्तैदी से समस्याओं को समझ जिम्मेदार अधिकारियों को आवाज़ लगाई जा रही थी, वे मुंह बनाते हुए ढीले पोले ऐसे जा रहे थे जैसे की उनकी सैलरी में से राशि मांग ली हो।

डिप्टी कलेक्टर मशगूल दूसरों से बातें करने में

अन्य डिप्टी कलेक्टर दूसरों से बातों में मशगूल थे, तभी मैडम कलेक्टर मैडम ने निर्देश देते हुए कहा कि सभी फटाफट समस्याएं सुनने और उसका निराकरण करें। चार लोग बैठे हैं। सुने और संबंधित को निर्देश दें, तब जाकर वे आवेदन लेते हुए नजर आए। आज जनसुनवाई में आने वाले सभी संतुष्ट नजर आ रहे थे क्योंकि उनकी समस्याएं संवेदना पूर्वक सुनी गई और निराकरण के निर्देश दिए। इस दौरान अन्य विभागों के अधिकारी बैठे हुए थे । एक बजने का इंतजार कर रहे थे। वहीं कुछ महिला अधिकारी जनसुनवाई के दौरान भी कुछ खाते हुए मुंह हिला रही थी। मुंह के अंदर जबान फेर कर बाकी बची हुई सामग्री भी गले के नीचे उतरने का प्रयत्न किया जा रहा था। कलेक्टर और सीईओ समस्याएं सुन रहे थे।

तब आए बारबोदना के देवीलाल

1 बजकर 2 मिनट पर जैसे ही कलेक्टर सिंह उठी, वैसे ही अन्य विभाग के अधिकारी भी उठ खड़े हुए और निकल गए। मगर जिला पंचायत की सीईओ जैन समस्याएं सुन रही थी। जब वे 1 बजकर 4 मिनट उठी, तभी कुछ कागज लेकर बारबोदना के 75 वर्षीय देवीलाल आए। सीईओ मैडम को कागज देते हुए कहा कि पटवारी ने मुझे यहां भेजा है। आप देखो। मैं बहुत गरीब हूं। 

⚫ मैडम ने पूछा हुआ क्या है 

⚫ तब बुजुर्ग ने बताया कि मेरे सबसे छोटे बेटे विनोद को फांसी पर लटका दिया था। काफी परेशान हूं। 

⚫ चाहते क्या हो ?

⚫ आर्थिक मदद मिल जाती तो बेहतर होता। पटवारी जी ने कहा था कि दो एक लाख रुपए मिल जाएंगे।

⚫ मेडम ने संबंधित को निर्देश देते हुए कहा कि संबल या कोई अन्य योजना में इनको लाभान्वित किया जाए। संबंधित भी तत्काल पूरे कागज को देखते हुए नजर आए। पीएम रिपोर्ट भी देखी। 

अन्य बेटे सुनते नहीं

देवीलाल ने बताया कि मेरे 6 बेटे और है मगर वह सुनते नहीं है इसलिए मैं यहां पर आया हूं। दो बीघा जमीन में इतना कुछ उत्पादन भी नहीं होता।