4 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा चोर नौकर दंपत्ति
⚫ 2022 की चोरी का 2026 में खुलासा
⚫ रतलाम पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
हरमुद्दा
रतलाम, 29 सितंबर। जिले में संपत्ति संबंधी अपराधों पर नकेल कसने के बड़े-बड़े दावों के बीच पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घरेलू काम करने आए एक दंपत्ति द्वारा की गई सोने के आभूषण और नकदी की चोरी के मामले में पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में पूरे 4 साल का लंबा वक्त लग गया। फरियादी के घर से जेवर और नगदी साफ करने वाला नौकर दंपत्ति चार वर्षों तक पुलिस को गच्चा देता रहा, जिसे अब जाकर गिरफ्तार किया जा सका है। पुलिस प्रशासन इसे भी अपनी उपलब्धि मान रहा है और पत्रकार वार्ता में जानकारी दे रहा है।

एएसपी राकेश पन्द्रों ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए
क्या था पूरा मामला?
एएसपी राकेश पन्द्रों ने पत्रकार वार्ता में बताया कि मामला वर्ष 2022 का है। कनेरी रोड रतलाम निवासी फरियादी दिनेश चौधरी ने 7 अप्रैल 2022 को थाना डीडी नगर में शिकायत दर्ज कराई थी। फरियादी ने करीब तीन माह पूर्व नाई बरोदा (जिला धार) निवासी सूरज पिता राकेश बैरागी और उसकी पत्नी को घरेलू काम के लिए रखा था। 7 अप्रैल 2022 को जब परिवार के सदस्य काम से बाहर गए थे, तब मौका पाकर नौकर सूरज अपनी पत्नी के साथ अलमारी में रखे सोने के दो टॉप्स, दो अंगूठियां और ₹30,000 नकद समेटकर रफूचक्कर हो गया। फरियादी द्वारा उस समय शिव महापुराण कथा में व्यस्त होने के कारण कुछ दिन बाद थाने पहुंचकर औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
4 साल तक भटकती रही पुलिस, अब जाकर मिली सफलता

गिरफ्तार आरोपी सूरज बैरागी
घटना के बाद से ही आरोपी दंपत्ति फरार चल रहे थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी के फोटो, मुखबिर तंत्र और तकनीकी संसाधनों के जरिए लगातार पतारसी की जा रही थी। हालांकि, 2022 की इस सीधी सी चोरी के मामले में आरोपी तक पहुंचने में पुलिस को 2026 तक का इंतजार करना पड़ा।
हाल ही में थाना प्रभारी डीडी नगर उप निरीक्षक अनुराग यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने आखिरकार आरोपी सूरज बैरागी (उम्र 26 वर्ष, निवासी सागौर, जिला धार) और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने फरियादी के घर चोरी की वारदात को अंजाम देना कबूल किया है।
खड़े हो रहे तीखे सवाल
भले ही पुलिस इसे अपनी एक बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रही हो, लेकिन इस मामले ने पुलिसिया पुलिसिंग और पतारसी तंत्र की गति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामूली नौकर को ढूंढने में 4 साल क्यों?
जब आरोपी का नाम, पिता का नाम और स्थायी पता (नाई बरोदा, जिला धार) पहले दिन से पुलिस के पास उपलब्ध था, तो उसे ट्रैक करने में 4 साल का समय क्यों लगा?
तकनीकी संसाधनों और मुखबिर तंत्र का दावा कितना मजबूत?
प्रेस नोट में तकनीकी संसाधनों और मुखबिरों के प्रभावी उपयोग की बात कही गई है, लेकिन अगर यह तंत्र इतना ही प्रभावी था तो आरोपी चार साल तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर कैसे रहा?
सुरक्षा को लेकर आमजन में चिंता
घरेलू नौकरों द्वारा की जाने वाली चोरियों पर यदि कार्रवाई होने में सालों-साल लगेंगे, तो आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेंगे? फिलहाल, पुलिस आरोपियों से चोरी गए सोने के आभूषणों और नकदी की बरामदगी को लेकर पूछताछ कर रही है। लेकिन इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जिले में अपराधों के निपटारे और आरोपियों की गिरफ्तारी की रफ्तार को और तेज करने की सख्त जरूरत है।
Hemant Bhatt