फैसला : कीचड़ और पानी में दबाकर हत्या करने वालों को आजीवन कारावास

एक ठिगने लड़के ने दूसरे से कहा कि "तूफानी, इस शंकर को जान से खत्म कर दे, ये अपनी बात नहीं मानता है।" तब तूफानी ने शंकर की गर्दन पकड़कर वहां भरे हुए कीचड़ में उसे दबा दिया और ठिगने लड़के ने शंकर के पैर पकड़ रखे थे।

फैसला : कीचड़ और पानी में दबाकर हत्या करने वालों को आजीवन कारावास

मामला नवंबर 2025 का

⚫ क्वाटर में के कमरे में शराब पीकर झगड़ रहे थे 3 लड़के

⚫ साथ में कार्य करते थे तीनों

हरमुद्दा
गुना, 18 अप्रैल। अपने ही साथी को पानी और कीचड़ में दबाकर हत्या करने वाले आरोपियों को सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्र ने आजीवन कारावास से दण्डित किया। प्रकरण में मध्यप्रदेश राज्य की ओर से पैरवी लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने की।

अभियोजन के अनुसार फरियादी बलवीर सहरिया जो कि नई पुलिस लाइन गुना में बन रहे आवासीय क्वाटर निर्माण स्थल पर चौकीदारी का कार्य करता है, उसने 17 नवंबर 25 को रात्रि 2 बजे थाना कैंट में रिपोर्ट लिखाई कि रात्रि लगभग 9 बजे जब वह परिसर में देख-रेख के लिए घूम रहा था तब उसने देखा कि ब्लॉक नम्बर 7 के नये बन रहे क्वाटर में के कमरे में 3 लड़के शराब पीकर झगड़ रहे थे, तब उसने उन्हें शान्त करा दिया था और ऊपर के कमरे में बैठकर खाना खाने लगा। तभी उसे दोबारा चिल्लाचोंट की आवाज आने पर उसने टॉर्च जलाकर देखा कि वही तीनों लड़के ब्लॉक के सामने आपस में झगड़ रहे थे। उनमें से एक ठिगने लड़के ने दूसरे से कहा कि "तूफानी, इस शंकर को जान से खत्म कर दे, ये अपनी बात नहीं मानता है।" तब तूफानी ने शंकर की गर्दन पकड़कर वहां भरे हुए कीचड़ में उसे दबा दिया और ठिगने लड़के ने शंकर के पैर पकड़ रखे थे। वहां कार्य करने वाले अन्य लोग बचाने आए तो दोनों आरोपी वहां से भाग गये।

साथ में कार्य करते थे तीनों

दोनों आरोपी और मृतक साथ में ही मजदूरी करने आये थे। मौके पर ठेकेदार भी आ गया था, शंकर को जिला चिकित्सालय ले गए, जहां चिकित्सकों ने शंकर को मृत घोषित कर दिया।

उक्त घटना पर से कैंट थाने में तूफानी मांझी पिता कैलाश मांझी और राजेश मांझी पिता सुखदेव मांझी निवासीगण बिहार के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की।

न्यायालय में किया अभियोग पत्र प्रस्तुत

पुलिस ने घटना स्थल से कीचड़, पानी और आरोपियों तथा मृतक के कपड़े, नाखून आदि जब्त किए। आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

तर्कों से सहमत होकर सुनाई सजा

न्यायालय में चक्षुदर्शी साक्षी पक्षविरोधी हो गए थे। न्यायालय ने कहा कि दांडिक न्यायालयों का कर्त्तव्य काल्पनिक संदेहों की तलाश करना नहीं है, जब तक कि संदेह न्यायिक विवेक की परिभाषा में स्वीकार योग्य न हो, तब तक संदेह का लाभ आरोपी को प्रदान नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने ये भी माना कि हेतुक के अभाव मात्र पर ही आरोपी दोषमुक्ति का हकदार नहीं होगा। न्यायालय ने सम्पूर्ण साक्ष्य और अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के पश्चात् आरोपी को शंकर की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास से दण्डित किया।