धर्म और आस्था का अद्भुत संगम: रतलाम के 350 वर्ष पुराने रियासतकालीन महालक्ष्मी मंदिर में होगा करोड़ों के नोटों का अलौकिक श्रृंगार

धर्म और आस्था का अद्भुत संगम: रतलाम के 350 वर्ष पुराने रियासतकालीन महालक्ष्मी मंदिर में होगा करोड़ों के नोटों का अलौकिक श्रृंगार

⚫ धनतेरस से भाईदूज तक श्रद्धालुओं को मिलेंगे महालक्ष्मी जी के इस दिव्य रूप के दर्शन

⚫ गरुड़ासीन भगवान विष्णु की गोद में विराजित मां लक्ष्मी की अति दुर्लभ प्रतिमा, देश में अन्यत्र मिलना असंभव

⚫ भक्तों को प्रसादम स्वरूप मिलेगी 'कुबेर पोटली', सुरक्षा के रहेंगे पुख्ता इंतजाम

हरमुद्दा
​रतलाम (मध्यप्रदेश), 28 अक्टूबर। सनातन धर्म की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और जन-आस्था के केंद्र, रतलाम के करीब 350 वर्ष पुराने रियासतकालीन श्री महालक्ष्मी मंदिर में इस दीपावली भी भक्ति और वैभव का अलौकिक दृश्य देखने को मिलेगा। धनतेरस से लेकर भाईदूज तक चलने वाले इस दीपोत्सव पर्व पर मां महालक्ष्मी जी का भव्य श्रृंगार भारतीय मुद्रा (नोटों की गड्डियों) से किया जाएगा।

प्रेस वार्ता में मध्य में बैठे दीपक व्यास पत्रकारों को जानकारी देते हुए


प्राचीन ​श्री कालिका माता मंदिर परिसर के समीप स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर के पुजारी (पांचवीं पीढ़ी) दीपक व्यास एवं असीम व्यास ने प्रेसवार्ता में बताया कि शरद पूर्णिमा से अब तक श्रद्धालुओं द्वारा श्रृंगार हेतु 10 लाख रुपये से अधिक की राशि एकत्र हो चुकी है। बीते एक दशक से मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित नोटों की गड्डियां रखने की परंपरा रही है, जिसे गत वर्ष से एक भव्य रूप देते हुए पूरे मंदिर परिसर का नोटों से श्रृंगार प्रारंभ किया गया। गौरतलब है कि पिछले वर्ष लगभग 2 करोड़ रुपये के नोटों से मंदिर की मनमोहक सजावट की गई थी।
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एक ही प्रतिमा में त्रिदेव व आद्यशक्ति की उपस्थिति अद्भुत व दुर्लभ स्वरूप

धर्म और शिल्प कला के दृष्टिकोण से यह मंदिर अत्यंत अद्वितीय है। व्यास बंधुओं के अनुसार, ऐसी दुर्लभ प्रतिमा संपूर्ण भारतवर्ष में अन्यत्र दुर्लभ है।

​विशिष्ट संरचना: प्रतिमा में भगवान गरुड़ जी के ऊपर श्रीहरि विष्णु जी विराजित हैं और उनकी गोद में जगज्जननी मां लक्ष्मी जी सुख-समृद्धि की मुद्रा में विराजमान हैं।

​संस्कृति का प्रतीक

 सामान्यतः मंदिरों में मां लक्ष्मी जी की एकल प्रतिमाएं ही दिखाई देती हैं, परंतु गरुड़ासीन विष्णु-लक्ष्मी का यह स्वरूप गृहस्थ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का दिव्य प्रतीक है।

​मनोकामना पूर्ति व दांपत्य सुख का पावन धाम

​मान्यता है कि इस रियासतकालीन दरबार में आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना मां लक्ष्मी पूर्ण करती हैं। विशेषकर, जिन युवाओं के विवाह में विलंब हो रहा हो या जो श्रेष्ठ दांपत्य सूत्र में बंधने की अभिलाषा रखते हैं, वे मां भगवती के इस दरबार से कभी खाली हाथ नहीं लौटते।

​भक्तों को मिलेगी सिद्ध 'कुबेर पोटली'

​मंदिर समिति के सदस्य राजेश चोखड़ा, पुष्पदंत पुरोहित एवं सुरेश मकवाना ने बताया कि जो भी भक्तजन श्रृंगार हेतु अपनी नोटों की गड्डियां समर्पित करेंगे, उनका संपूर्ण विवरण एक विशेष डिजिटल एप्लीकेशन के माध्यम से उनके पास सुरक्षित रहेगा।

विशेष प्रसाद (कुबेर पोटली): भाईदूज के अगले दिन जब श्रद्धालु अपनी राशि वापस प्राप्त करने आएंगे, तो मंदिर समिति की ओर से उन्हें सिद्ध 'कुबेर पोटली' भेंट की जाएगी। इस पोटली में ​सिद्ध सिक्का, ​गोमती चक्र,  गुलाब का पुष्प,​लक्ष्मीप्रिय कौड़ी
शामिल होंगे, जिसे घर की तिजोरी में रखने से वर्ष भर धन-धान्य की बरकत बनी रहती है।

​अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था और सुलभ दर्शन

​भव्य श्रृंगार और करोड़ों की राशि को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। ​पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन को आवेदन देकर बल तैनात करने का निवेदन किया गया है।
​संपूर्ण मंदिर परिसर में उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे और निजी सुरक्षा गार्ड (प्राइवेट गार्ड) तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह के समीप तक सुलभ दर्शन, सुव्यवस्थित पंक्ति (क्यू) तथा सुगम पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है।

​आह्वान

मंदिर समिति एवं व्यास परिवार ने संपूर्ण क्षेत्र के धर्मप्रेमी बंधुओं से अपील की है कि वे दीपोत्सव के इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारकर मां महालक्ष्मी जी के इस अलौकिक व दुर्लभ स्वरूप का दर्शन लाभ एवं पुण्य अर्जित करें।