रतलाम पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 4 महिला तस्करों रेवा, रमिला, ललिता, सन्नू से 60 किलो से अधिक डोडाचूरा जब्त

रतलाम पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 4 महिला तस्करों रेवा, रमिला, ललिता, सन्नू से 60 किलो से अधिक डोडाचूरा जब्त

⚫ नशे के कारोबार में बदलती महिलाओं की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

⚫ ​​कानून की नजरों से बचने का 'सुरक्षित जरिया'?

⚫​ पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा आघात

हरमुद्दा
​रतलाम, 27 अक्टूबर। जिले की आलोट थाना पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 60 किलो 750 ग्राम अवैध मादक पदार्थ डोडाचूरा जब्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 9 लाख 11 हजार रुपए आंकी गई है। पुलिस अधीक्षक निर्देशन और ग्रामीण अधिकारियों के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई है।

पुलिस अधीक्षक अमित कुमार

पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन पर आलोट एसडीओपी पल्लवी गौर के नेतृत्व में मुखबीर सूचना पर कार्रवाई करते हुए घटना स्थल खेतो का कच्चा रास्ता ग्राम पिपलिया सिसोदिया पर गिरफ्तार की गई चारों आरोपी महिलाएं झाबुआ जिले की रहने वाली हैं। थाने पर अप क्र 583/2026 धारा 8/15 एनडीपीएस एक्ट का पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया गया है।

गुजरात ले जा रही थी डोडा चूरा

एसडीओपी पल्लवी गौर

एसडीओपी गौर बताया कि आरोपियों से अवैध मादक पदार्थ डोडाचुरा के सम्बंध मे पूछताछ की गई। पिपलिया सिसोदिया के गोपाल मालवीय से माल लेकर गुजरात जाने की बात बताई है। रिमांड पर लेकर गईं पूछताछ की जाएगी। फिलहाल गोपाल मालवीय को पकड़ने के लिए टीम रवाना कर दी गई है। महिलाओं के आपराधिक रिकॉर्ड तो ऑनलाइन नजर नहीं आ रहे हैं लेकिन तीन महिलाओं का कहना है कि पहले भी वह जेल जा चुकी हैं। इस पर जांच की जा रही है।

⚫ ​रेवा (पति भूरा कलारा, उम्र 35 वर्ष, निवासी कालिया वीरन, मेघनगर)

⚫ ​ललिता (पति दिनेश बारिया, उम्र 38 वर्ष, निवासी राखड़िया, मेघनगर)

⚫ ​रमिला (पति परसु वसुनिया, उम्र 40 वर्ष, निवासी सालामहुड़ा, कल्याणपुरा)

⚫ ​सन्नु (पति बाबू निनामा, उम्र 40 वर्ष, निवासी सैलानी मोहल्ला, मेघनगर)

​पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना आलोट में अपराध क्रमांक 583/2026, धारा 8/15 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की पूछताछ और विवेचना शुरू कर दी है।

इनकी सराहनीय भूमिका

इस कार्रवाई में निरीक्षक योगेश पाटीदार, उप निरीक्षक आर सी खडिया, प्रधान आरक्षक अमित भावसार,  महिला आरक्षक अनिता, आरक्षक अभिनन्दन, सुनिल चुनारा, थामस भाभर, रोनक पोरवाल, मुकेश की सराहनीय भूमिका रही

​नशे के काले कारोबार में महिलाओं की बढ़ती संलिप्तता - एक गंभीर सामाजिक चुनौती

​रतलाम पुलिस द्वारा पकड़ी गई यह कार्रवाई भले ही अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हो, लेकिन यह घटना कई गंभीर और चिंताजनक सवाल भी खड़े करती है। खासकर नशे की तस्करी में महिलाओं की बढ़ती भूमिका अब अपराध जगत और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी बन चुकी है।

​कानून की नजरों से बचने का 'सुरक्षित जरिया'?

​मादक पदार्थों के अवैध कारोबार (तस्करी) में पारंपरिक रूप से पुरुषों का वर्चस्व माना जाता रहा है। तस्कर गिरोह अब इस पुरानी छवि का फायदा उठाकर महिलाओं को मोहरा बना रहे हैं। अपराधियों का मानना होता है कि महिलाएं पुलिस की शुरुआती चेकिंग और शक के दायरे से आसानी से बच निकलती हैं। ग्रामीण और पारिवारिक महिलाओं पर आम तौर पर पुलिस या समाज की तुरंत नजर नहीं जाती, और तस्कर इसी मनोवैज्ञानिक कमजोरी का फायदा उठाते हैं।

​आर्थिक लाचारी और गरीबी का फायदा

​इस मामले में गिरफ्तार चारों महिलाएं झाबुआ जिले के ग्रामीण अंचलों से ताल्लुक रखती हैं। अक्सर कमजोर आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी और त्वरित धन कमाने की लालच में ये महिलाएं संगठित तस्करों के जाल में फंस जाती हैं। मुख्य सरगना या सिंडिकेट पर्दे के पीछे रहकर इन महिलाओं को कैरियर (कैरियर/सामग्री ढोने वाली) के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिससे असली मास्टरमाइंड कानून की पकड़ से दूर रहते हैं।

​पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा आघात

​जब परिवार की महिलाएं आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाई जाती हैं, तो इसका सबसे बुरा असर उनके बच्चों और पूरे परिवार के भविष्य पर पड़ता है। एक तरफ जहां मादक पदार्थ समाज की युवा पीढ़ी को अंदर से खोखला कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं का इस दलदल में उतरना यह दर्शाता है कि नशे का नेटवर्क अब पारिवारिक और सामाजिक सीमाओं को भी पार कर चुका है।

​मुद्दे की बात

​रतलाम पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, क्योंकि इसने एक बड़े खेप को बाजार तक पहुँचने से रोक दिया। हालांकि, चुनौती केवल इन चार महिलाओं को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है। पुलिस और समाज को मिलकर इस बात की तह तक जाना होगा कि इन महिलाओं को इस धंधे में किसने धकेला और इसके पीछे कौन-सा संगठित गिरोह सक्रिय है। जब तक इस सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं पर शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक महिलाओं को ढाल बनाकर चलने वाला यह अवैध कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकता।