मानवता की मिसाल: दुख के आंसुओं को नेत्रम संस्था ने बदला सेवा की रोशनी में

​यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि अनगिनत जरूरतमंदों को नई दृष्टि देने की वह सेवा यात्रा है, जो त्याग और संवेदना के बूते इस मुकाम तक पहुंची है। इस अवसर पर नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास द्वारा तीनों शोकाकुल परिवारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित व कृतज्ञता व्यक्त की गई।

मानवता की मिसाल: दुख के आंसुओं को नेत्रम संस्था ने बदला सेवा की रोशनी में

रतलाम के 3 परिवारों ने किया 6 जिंदगियों को रोशन

⚫ अब तक 1001 वां नेत्रदान

⚫ ​शोक संतप्त परिवारों ने दी अमरता की परिभाषा

हरमुद्दा
​रतलाम, 31 अगस्त। गहरा शोक, अपनों को खोने का असहनीय दर्द और आंखों में आंसू... इन सब के बीच जब एक परिवार मानवता के लिए अपनी व्यक्तिगत पीड़ा से ऊपर उठता है, तो वह समाज के लिए एक नई राह बनाता है।

ऐसा ही प्रेरणादायी उदाहरण रतलाम में देखने को मिला, जहां नेत्रम संस्था के सार्थक प्रयासों और गीता भवन न्यास (बड़नगर) के डॉ. जी.एल. ददरवाल की सेवा यात्रा के सहयोग से तीन परिवारों ने अपने स्वजनों के असमायिक निधन पर नेत्रदान का ऐतिहासिक फैसला लिया। इन दानवीर परिवारों की बदौलत अब 6 दृष्टिहीन व्यक्तियों की अंधेरी जिंदगी में उजाला फैलेगा।

​शोक संतप्त परिवारों ने दी अमरता की परिभाषा

⚫ ​कपिल मूणत का परिवार (टाटा नगर): स्व. कन्हैयालाल मूणत के सुपुत्र कपिल मूणत के असमायिक निधन के बाद भाई कमल मूणत व परिजनों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं (प्रितेश गादिया, अर्पित गांधी व अर्पित बाफना) की प्रेरणा से नेत्रदान का निर्णय लिया और दिवंगत की स्मृति को मानव सेवा से अमर कर दिया।

⚫ ​सुनील जैन एडवोकेट का परिवार (कस्तूरबा नगर): स्व. ईश्वरचन्द्र जैन के सुपुत्र वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन के देवलोकगमन पर पत्नी विपुला जैन, भाई दिलीप जैन, पुत्र पदमेश जैन तथा पुत्री (तहसीलदार) पुलकित जैन ने हिम्मत दिखाते हुए नेत्रदान की स्वीकृति दी।

⚫ ​रेशम कुँवर देवड़ा का परिवार (ग्राम अमलेटा): ग्रामीण अंचल में नेत्रदान की अलख जगाते हुए श्रीमती रेशम कुँवर देवड़ा के निधन पर उनके पुत्र राजेन्द्र सिंह देवड़ा व चन्द्रसिंह देवड़ा ने परिजनों की सहमति से नेत्रदान कराकर समाज के सामने अनुकरणीय मिसाल पेश की।

​डॉ. जी.एल. ददरवाल का 1001वां नेत्रदान, सेवा का ऐतिहासिक कीर्तिमान

रतलाम में संपन्न हुए ये तीनों नेत्रदान बड़नगर के गीता भवन न्यास के डॉ. जी.एल. ददरवाल द्वारा मोहनलाल राठौड़ के सहयोग से पूरे कराए गए। इसके साथ ही डॉ. ददरवाल के मार्गदर्शन में 1001 नेत्रदान संपन्न होने की अद्भुत और प्रेरणादायी उपलब्धि दर्ज की गई।

त्याग और संवेदना के बूते पाया मुकाम

यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि अनगिनत जरूरतमंदों को नई दृष्टि देने की वह सेवा यात्रा है, जो त्याग और संवेदना के बूते इस मुकाम तक पहुंची है। इस अवसर पर नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास द्वारा तीनों शोकाकुल परिवारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित व कृतज्ञता व्यक्त की गई। प्रक्रिया के दौरान शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और चिकित्सक उपस्थित रहे।

​"मृत्यु के बाद भी किसी की आंखों का चिराग बनें"

​"नेत्रदान से बड़ा कोई पुनीत कार्य नहीं है। इंसान के दुनिया से चले जाने के बाद भी उसकी आंखें किसी दृष्टिहीन का अंधेरा दूर कर सकती हैं। हर नागरिक को इस अभियान से जुड़ना चाहिए और अपने जीवन काल में ही नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए।"

हेमन्त मूणत, नेत्रम संस्था, रतलाम