सरकारी जमीन पर 70 साल से ईसाई मिशनरी का 'अवैध' कब्जा, प्रशासन पस्त या मेहरबान?
⚫ शहर के सर्वे नंबर 318 की जमीन आज भी दर्ज है शासकीय में
⚫ फिर भी अवैध रूप से चल रहा सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, प्रशासन लाचार या मेहरबान?
⚫ सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के आगे क्यों लाचार है सिस्टम!
हरमुद्दा
रतलाम, 3 सितंबर। शहर के सर्वे नंबर 318 की बेशकीमती सरकारी भूमि पर पिछले सात दशकों से सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल का कब्जा बरकरार है। सरकारी रिकॉर्ड में आज भी यह जमीन शासकीय दर्ज है, लेकिन इस पर सालों से नियम-कायदों को ताक पर रखकर एक निजी शैक्षणिक संस्थान का निर्बाध संचालन किया जा रहा है।

सवाल यह उठ रहा है कि आम जनता के छोटे-छोटे अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने वाला जिला प्रशासन और नगर निगम आखिरकार इस ईसाई मिशनरी संस्था के आगे नतमस्तक क्यों नजर आ रहा है?

गुलमोहर कॉलोनी रहवासी कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश माहेश्वरी और सचिव प्रमोद जैन ने एक पत्रकार वार्ता में इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए जिला प्रशासन और प्रदेश की भाजपा सरकार की लाचारी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शपथ पत्र में खुद कबूला कब्जा, फिर भी कार्रवाई शून्य

समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, संस्था की के.यू. मेरी द्वारा दिए गए एक शपथ पत्र में यह स्वीकार किया गया है कि सर्वे क्रमांक 318 (रकबा 2.190 हेक्टेयर) भूमि पर स्कूल भवन निर्मित है। इसमें बताया गया कि वर्ष 1962 से यहां सेंट जोसेफ कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल का संचालन हो रहा है, जो कि सीबीएसई (CBSE) से मान्यता प्राप्त है।
जब संस्था खुद इस बात को स्वीकार कर रही है कि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में शासकीय है, तो अब तक इस अवैध कब्जे को बेदखल करने या विधिक कार्रवाई करने में प्रशासन के हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं?
मिशनरी की दादागिरी, आमजन और रहवासी हलाकान
स्कूल प्रबंधन की मनमानी का खामियाजा शहर की जनता और आसपास के रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है:
⚫ सड़कों पर अनियंत्रित पार्किंग: स्कूल परिसर के भीतर पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद वाहनों को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता।
⚫ यातायात में बाधा: विद्यार्थियों को लाने-ले जाने वाले चार पहिया वाहन और ऑटो सड़कों पर ही खड़े रहते हैं, जिससे हर दिन घंटों जाम की स्थिति बनती है।
⚫ सुरक्षा पर खतरा: सड़कों पर वाहनों के जमावड़े के कारण स्कूली बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में बनी रहती है।
शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और टैक्स छूट का आरोप
मामले में सबसे गंभीर सवाल 1956 से दर्ज शासकीय संपत्ति (सर्वे नंबर 318) को लेकर उठ रहे हैं। रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि शासकीय दर्ज है, इसके बावजूद टीएनसीपी और नगर निगम ने भवन निर्माण की अनुमति कैसे दे दी? सेल डीड में जमीन की कोई निश्चित लंबाई-चौड़ाई या कुल क्षेत्रफल (स्क्वायर फीट) का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि स्कूल प्रबंधन ने अपनी इच्छानुसार शासकीय भूमि पर कब्जा जमा रखा है। इसके अतिरिक्त, व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने वाले इस स्कूल को किस आधार पर नगर निगम द्वारा टैक्स में छूट दी गई, यह भी जांच का विषय है।
बिना अनुमति पैवेलियन निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी
शिकायतकर्ता के अनुसार न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद निर्माण की अनुमतियां जारी की गईं। बिना पुरानी बिल्डिंग को डिसमेंटल किए और बिना मौका भौतिक सत्यापन किए नई अनुमति दे दी गई। स्कूल परिसर में बिना नगर निगम की अनुमति के अवैध पैवेलियन का निर्माण कर लिया गया। फायर एनओसी (Fire NOC), आपदा सुरक्षा, आपातकालीन निकास और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में क्लासरूम व पार्किंग व्यवस्था का अभाव है।
उच्च स्तरीय जांच समिति की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मीडिया के समक्ष मांग की गई है कि कलेक्टर की अध्यक्षता में संयुक्त जांच समिति राजस्व, नजूल, नगर निगम, टीएनसीपी, शिक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग की संयुक्त समिति बनाकर मौके का भौतिक और कागजी सत्यापन कराया जाए। जांच पूरी होने तक संबंधित विभागों के मूल दस्तावेज (फाइल, नक्शे, नोटशीट, डिजिटल रिकॉर्ड) को सुरक्षित किया जाए ताकि कोई हेरफेर न हो सके। यदि स्कूल प्रबंधन और अधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है, तो दोषी अधिकारियों एवं स्कूल संचालकों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठते सवाल
चाहे जिले के कलेक्टर हों या एसपी, ऊपर से लेकर नीचे तक का समूचा प्रशासनिक अमला इस मामले में मूकदर्शक बना हुआ है। नगर निगम की मेहरबानी भी इस अवैध कब्जे को खाद-पानी दे रही है। बिना सत्यापन के निर्माण की अनुमति दे दी जाती है।
कार्रवाई न होना प्रशासन की लाचारी
नागरिकों का कहना है कि सुशासन और सख्त कानून व्यवस्था का दावा करने वाली भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार में एक अवैध कब्जेधारी संस्था के खिलाफ कार्रवाई न होना प्रशासन की लाचारी और दोहरे रवैये को उजागर करता है। रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस शासकीय भूमि को मुक्त कराने और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के कदम नहीं उठाए गए, तो जनहित में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
Hemant Bhatt