रतलाम में नारकोटिक्स पर कलेक्टर की सख्त क्लास
⚫ आबकारी व ड्रग इंस्पेक्टर की सुस्त कार्रवाई पर जताया कड़ा असंतोष
⚫ मांगा रिपोर्ट कार्ड
हरमुद्दा
रतलाम, 24 अगस्त। जिले में नारकोटिक्स एवं अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्टर अजय कटेसरिया की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक अमित कुमार, अपर कलेक्टर श्री बृजेंद्र कुमार रावत और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत तमाम संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान आबकारी विभाग और ड्रग इंस्पेक्टर की ढीली कार्यशैली पर कलेक्टर का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने दोनों विभागों की कार्यप्रणाली पर कड़ा असंतोष जताते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर सख्त और असरदार एक्शन दिखना चाहिए।
"किसी ने कार्रवाई देखी, सुनी या पढ़ी है?"
कलेक्टर ने सीधे अधिकारियों से सवाल दागा, "क्या किसी ने इन विभागों की कार्रवाई होते हुए देखी है, किसी ने सुना है या कहीं पढ़ा है?" इस तीखे सवाल पर बैठक कक्ष में सन्नाटा पसर गया और कोई भी अधिकारी जवाब नहीं दे सका। कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता के बीच कार्रवाई का असर न दिखना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। लापरवाही बरतने वाले अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा और अब हर दिन मैदानी स्तर पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।
अगस्त माह का मांगा हिसाब-किताब
कलेक्टर श्री कटेसरिया ने ड्रग इंस्पेक्टर को निर्देश दिए कि अगस्त महीने में की गई सभी छापों और कार्रवाइयों का पूरा लेखा-जोखा तत्काल प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगली समीक्षा बैठक की शुरुआत ही इसी रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा से होगी। इसके साथ ही आबकारी विभाग को अवैध शराब और मादक पदार्थों के खिलाफ नियमित अभियान चलाकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए गए।
हॉटस्पॉट पर नजर और 'सफेमा' के तहत कार्रवाई
नारकोटिक्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग को जिले के हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर परिंदे की तरह नजर रखने को कहा गया है। तस्करी में लिप्त अपराधियों के खिलाफ सफेमा अधिनियम (SAFEMA) सहित अन्य कठोर कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
जागरूकता के लिए बस बैनर से लेकर स्कूल अभियान तक
बैठक में नशामुक्ति के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए।
स्कूलों में अभियान: सभी प्रमुख स्कूलों में नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
सार्वजनिक परिवहन: आरटीओ के माध्यम से यात्री बसों में नशामुक्ति के फ्लेक्स और बैनर अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि नशे के दुष्प्रभावों का संदेश जन-जन तक पहुंच सके।
Hemant Bhatt