स्वास्थ्य सेवाओं से खिलवाड़: बिना सूचना महीनों से गायब रहीं एएनएम, सेवा समाप्ति की अनुशंसा
⚫ मॉनिटरिंग और मैदानी स्तर पर जवाबदेही की गंभीर पोल
⚫ समीक्षा बैठक में फूटा गुस्सा, सेवा समाप्ति की सिफारिश
⚫ प्रशासनिक कार्रवाई स्वागत योग्य, पर उठते गंभीर सवाल
हरमुद्दा
रतलाम, 24 जुलाई। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने और आमजन तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के प्रशासनिक दावों के बीच एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। उप स्वास्थ्य केंद्र ढिकवा में पदस्थ संविदा एएनएम सुमित्रा गामड़ अप्रैल 2026 से बिना किसी पूर्व सूचना अथवा सक्षम अधिकारी की अनुमति के लगातार अनुपस्थित चल रही थीं। स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील विभाग में इतने लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के गैर-हाजिर रहना विभागीय मॉनिटरिंग और मैदानी स्तर पर जवाबदेही की गंभीर पोल खोलता है।

कलेक्टर मिशा सिंह
गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सेहत दांव पर
एएनएम की इस मनमानी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का सीधा खमियाजा क्षेत्र की गरीब व आम जनता को भुगतना पड़ा। अप्रैल महीने से लगातार अनुपस्थित रहने के कारण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन, प्रसव पूर्व जांच (ANC), हाई-रिस्क (जोखिम वाली) गर्भवती महिलाओं की पहचान, बच्चों का नियमित टीकाकरण, गृह-आधारित नवजात शिशु देखभाल (HBNC) और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन (TB) कार्यक्रम जैसी अति-आवश्यक सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इतने महीनों तक सो रहा था, जो इस लापरवाही का असर सीधे आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ने दिया गया?
समीक्षा बैठक में फूटा गुस्सा, सेवा समाप्ति की सिफारिश
कलेक्टर मिशा सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में जब शहरी क्षेत्र के मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण, एनसीडी और आयुष्मान निरामयाम योजना के आंकड़ों की पड़ताल हुई, तब इस गंभीर लापरवाही का खुलासा हुआ।
बैठक में मिले कड़े निर्देशों के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. किरण वाडिवा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संविदा एएनएम गामड़ के खिलाफ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मध्य प्रदेश के 'संविदा मानव संसाधन मैन्युअल-2025' के शास्ति संबंधी कड़े प्रावधानों के तहत सेवा समाप्ति की अनुशंसा कर दी है।
प्रशासनिक कार्रवाई स्वागत योग्य, पर उठते गंभीर सवाल
हालांकि प्रशासन द्वारा की गई यह अनुशासनात्मक कार्रवाई सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन यह मामला एक बड़े प्रशासनिक ढर्रे पर भी सवाल खड़ा करता है।
निगरानी प्रणाली पर प्रश्न चिह्न
क्या निचले स्तर पर कार्यबल की नियमित निगरानी के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं है? कोई कर्मचारी अप्रैल से गायब रहता है और उस पर कार्रवाई जुलाई के अंत में समीक्षा बैठक के दौरान ही क्यों होती है?
अस्थायी व्यवस्था का अभाव
एएनएम की अनुपस्थिति के दौरान संबंधित वार्ड की दर्जनों गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?
स्वास्थ्य जैसी बुनियादी और जीवन-रक्षक सेवाओं में इस प्रकार की लापरवाही अक्षम्य है। आवश्यकता इस बात की है कि केवल अनुशंसा तक सीमित न रहकर इस तरह की लापरवाहियों पर त्वरित और कठोर उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी आम जनता के जीवन से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
Hemant Bhatt