बेटा-बेटी में फर्क की बलि चढ़ी 4 दिन की मासूम

यह घटना न केवल एक मासूम की असमय मौत की खबर है, बल्कि हमारे समाज की उस कड़वी हकीकत का आईना भी है, जहां आज भी बेटे-बेटी के फर्क की मानसिकता जानलेवा साबित हो रही है।

बेटा-बेटी में फर्क की बलि चढ़ी 4 दिन की मासूम

मां ने ही पानी के ड्रम में डुबोकर ली जान

⚫ डिप्रेशन और सामाजिक ताने बनी वजह

हरमुद्दा
​सीधी, 1 अगस्त। सीधी जिले के चुरहट थाना क्षेत्र स्थित ग्राम भेलकी से एक रूह कंपा देने वाली और दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 21 वर्षीय मां ने अपनी ही महज़ 4 दिन की मासूम नवजात बच्ची को पानी से भरे नीले ड्रम में डुबोकर मौत के घाट उतार दिया। जिस मां की गोद में बच्ची को महफूज़ होना चाहिए था, उसी आंचल को सामाजिक रूढ़ियों और तनाव के साए ने कातिल बना दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है।

महिला पुलिस की गिरफ्त में मां सोनू पटेल

अस्पताल से घर आने के 48 घंटे के भीतर वारदात

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला सोनू पटेल (21 वर्ष) ने 26 जुलाई 2026 को चुरहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था। 28 जुलाई को डिस्चार्ज होकर वह अपने मायके/ससुराल भेलकी पहुंची। लेकिन खुशियों के इस पल के बीच 30 जुलाई की सुबह अचानक नवजात बच्ची लापता हो गई। काफी खोजबीन के बाद जब परिजनों ने घर में रखे नीले रंग के पानी के ड्रम को देखा, तो हर किसी की रूह कांप गई।मासूम का शव पानी में तैर रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि नवजात की मौत पानी में डूबने के कारण दम घुटने से हुई है।

दूसरी बेटी होने का तनाव और प्रसवोत्तर अवसाद

पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में इस जघन्य अपराध के पीछे का जो कारण सामने आया, वह न केवल दुखद है बल्कि सोचने पर मजबूर करता है।

सामाजिक रूढ़ियों का बोझ

पुलिस के अनुसार, महिला की यह दूसरी संतान थी और इस बार भी बेटी होने के कारण वह अत्यधिक सामाजिक व मानसिक तनाव में थी। हमारे समाज में आज भी 'बेटा ही वंश बढ़ाएगा' जैसी सड़ चुकी मानसिकता का दबाव महिलाओं को किस कदर तोड़ देता है, यह घटना उसकी बानगी है।

प्रसवोत्तर अवसाद

डिलीवरी के तुरंत बाद महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलाव और मानसिक तनाव को अक्सर हमारे ग्रामीण अंचलों में नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। डिप्रेशन और समाज के तानों के दोहरे बोझ तले दबी 21 साल की इस मां ने ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया।

पुलिस की कार्रवाई

चुरहट थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर आरोपी मां सोनू पटेल को गिरफ्तार कर लिया है और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मुद्दे की बात

कब बदलेगी यह मानसिकता?

21वीं सदी में जब बेटियां अंतरिक्ष से लेकर ओलंपिक तक में देश का नाम रोशन कर रही हैं, तब एक मां द्वारा दूसरी बेटी के जन्म पर इतना खौफनाक कदम उठाना पूरे समाज के लिए शर्मसार करने वाला विषय है। यह घटना सिर्फ एक कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे उस सामाजिक ताने-बाने पर भी सवाल खड़ा करती है जो बेटियों को आज भी बोझ समझता है और नव-माताओं के मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी करता है। जब तक 'बेटा-बेटी एक समान' का नारा कागजों से निकलकर हमारी सोच में शामिल नहीं होगा, तब तक ऐसी मासूमियत सामाजिक कुरीतियों की बलि चढ़ती रहेगी?