धर्म संस्कृति : दादी जी का जीवन सादगी, पवित्रता, समर्पण और परमात्म निष्ठा का अद्भुत उदाहरण
⚫ सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा
⚫ दादी मोहिनी जी का पुण्य स्मृति दिवस मनाया “दिव्यता दिवस” के रूप में
हरमुद्दा
रतलाम, 12 मार्च। दादी जी का जीवन सादगी, पवित्रता, समर्पण और परमात्म निष्ठा का अद्भुत उदाहरण था। उनका संपूर्ण जीवन ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित रहा। वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि शांत गंभीर, दिव्यता, और गहन व्यक्तित्व की प्रतिमूर्ति थीं। उनका जीवन हम सभी के लिए एक जीवंत पाठशाला है।

यह विचार डोंगरे नगर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के दिव्य दर्शन भवन सेवा केंद्र में सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने व्यक्त किए।
मनाया पांचवा पुण्य स्मृति दिवस
केंद्र पर संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदय मोहिनी जी (गुलजार दादी) के पाँचवें पुण्य स्मृति दिवस को श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ “दिव्यता दिवस” के रूप में मनाया गया।
मेरा कुछ भी नहीं सब कुछ परमात्मा का
दादी हृदय मोहिनी जी के दिव्य जीवन और महान विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि दादी जी केवल एक महान व्यक्तित्व ही नहीं थीं, बल्कि परमात्मा शिव की साकार माध्यम बनकर असंख्य आत्माओं को परमात्मा से मिलन और आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव कराने वाली महान तपस्विनी आत्मा थीं। उनके जीवन का मूल मंत्र था “मेरा कुछ भी नहीं, सब कुछ परमात्मा का है।” यही भावना उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता रही।
आध्यात्मिक संस्कार समाज को दे रहे सकारात्मक दिशा
कार्यक्रम में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दिलीप नलगे, कन्हैया लाल मेहता,किशन बारगिया , राजेंद्र पोरवाल , रायसिंह राठौर, महेंद्र प्रकाश कौशिक आदि उपस्थित रहे। सभी ने दादी जी के महान जीवन को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि उनके द्वारा दिए गए आध्यात्मिक संस्कार आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में उपस्थित भाई-बहनों द्वारा दादी जी के पुष्प सुमन अर्पित करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उनके श्रेष्ठ संस्कारों और दिव्य गुणों को अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लिया।
Hemant Bhatt