धर्म संस्कृति : आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर 'गुफा बर्डा', दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी

धर्म संस्कृति : आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर 'गुफा बर्डा', दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी

⚫ आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार

⚫ उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा

⚫ जगदीश चंद्र मालवीय

माँ तुलजा भवानी का प्राचीन मंदिर जिला मुख्यालय आगर-मालवा से पूर्व दिशा में लगभग 2 किलोमीटर दूर एक ऊँची पहाड़ी पर प्राकृतिक गुफा में स्थित है। कानड़ रोड से दक्षिण दिशा में इसकी दूरी लगभग 01 किलोमीटर है। यह स्थान जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर धार्मिक श्रेणी में सूचीबद्ध है। पहुँच की दृष्टि से इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा 126 किमी और निकटतम रेलवे स्टेशन उज्जैन 68 किमी दूर है। मंदिर के चारों ओर घना जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य फैला हुआ है, जिसे स्थानीय लोग गुफा-बर्डा माता मंदिर के नाम से भी जानते हैं। 


 इतिहासकारों एवं स्थानीय श्रद्धालु ओं के अनुसार यह स्थान बौद्धकालीन माना जाता है। गुफा के भीतर पथरीली दीवार पर सिंदूर-वेष्टित प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, जिसके पीछे परिक्रमा मार्ग बना हुआ है। मंदिर का जीर्णोद्धार 1945 से भक्तों के सहयोग से निरंतर होता आ रहा है। यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मराठा इतिहास का प्रतीक भी है, क्योंकि माँ तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी मानी जाती हैं।

मान्यताएँ एवं रहस्य

इस मंदिर से जुड़ी अनेक चमत्कारिक मान्यताएँ प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस मंदिर में माता दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती हैं  सुबह बाल रूप, दोपहर युवती और शाम को वृद्धा रूप में। सबसे बड़ी रहस्यमयी गाथा यहाँ की गुफा से जुड़ी है।  जनश्रुति है कि इसी गुफा के भीतर एक गुप्त मार्ग के रूप में उज्जैन स्थित राजा भर्तृहरि की गुफा तक जाता था। उज्जैन के तत्कालीन पुरातत्ववेत्ता एम.पी. द्विवेदी ने इस मार्ग की खोज के प्रयास भी किए  थे। स्थानीय मान्यता यह भी है कि वर्षों पहले यहाँ आरती के समय शेर आते थे और बिना किसी को हानि पहुँचाए जंगल में लौट जाते थे। एक अन्य लोकमान्यता के अनुसार माँ तुलजा भवानी महाराष्ट्र के तुलजापुर से उज्जैन होते हुए गुफा मार्ग से आगर में विराजमान हुईं।

परंपराएँ एवं श्रद्धालुओं की आस्था

शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि में यहाँ आस्था का अपार सैलाब उमड़ता है। नवरात्रि के प्रथम दिवस घट स्थापना के साथ नौ दिवसीय आराधना प्रारंभ होती है और नगर पालिका परिषद द्वारा देश व नगर की सुख-शांति हेतु घट स्थापना की जाती है। प्रातः 5 बजे होने वाली महाआरती में जनसैलाब उमड़ता है। सामान्य दिनों में सैकड़ों और नवरात्रि में हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन, विशेष आरती में शामिल होते हैं। यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत और आध्यात्मिक शांति एवं श्रृद्धालुओं के लिये धर्म, आस्‍था और विश्‍वास का अद्वितीय संगम है, जो मालवा अंचल में आस्था और चमत्कार के केंद्र के रूप में सुप्रसिद्ध है।

⚫ जगदीश चंद्र मालवीय, आगर मालवा