धर्म संस्कृति : संस्कृति की पहली प्रयोगशाला हमारा घर

धर्म संस्कृति : संस्कृति की पहली प्रयोगशाला हमारा घर

⚫ रतलाम में जैन श्वेतांबर समाज ने अहिंसा पदयात्रा के जरिए दिया संदेश

हरमुद्दा
​रतलाम, 1 अक्टूबर। आज के आधुनिक दौर में जहां पारिवारिक मूल्य, संस्कार और सांस्कृतिक जड़ें कमजोर होती जा रही हैं, वहीं रतलाम में आयोजित 'अहिंसा पदयात्रा' केवल एक धार्मिक आयोजन बनकर नहीं उभरी, बल्कि इसने हर परिवार के लिए घर में 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' का एक बड़ा संदेश दिया। श्री ऑल इंडिया श्वे. स्था. जैन कॉन्फ्रेंस युवा शाखा मध्यप्रदेश (रतलाम इकाई) द्वारा श्रमण संघ की स्थापना के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) के अवसर पर आयोजित इस पदयात्रा में समाजजनों ने परिवारों सहित सहभागी बनकर यह साबित किया कि घर में संस्कृति की रक्षा कैसे संभव है।


​भावी पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की पहल

नीमचौक स्थानक से हनुमान रूण्डी तक निकली इस भव्य पदयात्रा में 23 सिद्धि तप तपस्वियों के साथ बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक साथ कदम मिलाए। आज जब नई पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति और डिजिटल दुनिया के प्रभाव में अपने पारंपरिक मूल्यों से दूर हो रही है, तब युवाओं और परिवारों का एक साथ सड़क पर उतरकर करुणा, प्रेम और सद्भाव का संदेश देना यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक मूल्यों को घर के भीतर कैसे जीवित रखा जा सकता है।

घर से शुरू हो नशा मुक्ति और शाकाहार का संकल्प

आयोजन के दौरान आमजन को नशा मुक्ति और पूर्ण शाकाहार अपनाने का जो संदेश दिया गया, उसकी वास्तविक शुरुआत घर की रसोई और पारिवारिक आदतों से ही होती है। महासती प्रफुल्ला जी म.सा एवं प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनि जी महाराज साहब के सानिध्य में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि भगवान महावीर के "अहिंसा परमो धर्मः" के सिद्धांत को केवल नारों में नहीं, बल्कि अपने दैनिक आचरण, वाणी और व्यवहार में उतारना जरूरी है। जब घर के माहौल में विचारों की पवित्रता और खान-पान में सात्विकता होगी, तभी भावी पीढ़ी में अहिंसा और दया जैसे मानवीय गुण पनपेंगे।

सामूहिक भागीदारी से मजबूत होती है सांस्कृतिक पहचान

कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री जैन दिवाकर नवयुवक मंडल और श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल के युवाओं की सक्रियता ने यह संदेश दिया कि जब परिवार के सदस्य समाज और धर्म के कार्यों से एक साथ जुड़ते हैं, तो घर की सांस्कृतिक नींव और मजबूत होती है। प्रांतीय युवा अध्यक्ष सुविधि कुमार जवेरी, महामंत्री अमित मोदी जैन, कोषाध्यक्ष वैभव जैन सहित मनीष मंडलेचा, आशीष कटारिया, रखब चत्तर, वीरेंद्र कटारिया, निलेश मेहता, पारस मेहता और अरिहंत बोराणा जैसे वरिष्ठों व युवाओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण रही कि पीढ़ियों का यह सामंजस्य ही घर और समाज में संस्कृति को अमर बनाए रख सकता है।
​अंत में कार्यक्रम संयोजक शुभम् भंडारी एवं यश पुंगलिया ने आभार व्यक्त करते हुए सभी से अपील की कि इस यात्रा से मिली प्रेरणा को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर, अपने-अपने घरों में दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।