सामाजिक सरोकार : दिवंगत पिता की स्मृति में अनुकरणीय पहल
⚫ शर्मा परिवार ने श्मशान स्थल के लिए भेंट की अंतिम यात्रा सामग्री
⚫ "स्मृतियों को चिरस्थायी बनाता है समाजोपयोगी दान"
⚫ सकारात्मक संदेश देती यह पहल : काकानी
हरमुद्दा
रतलाम, 22 सितंबर। भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में दान को केवल पुण्य अर्जन का जरिया नहीं, बल्कि लोककल्याण और सामाजिक सरोकार का सबसे श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। इसी सनातन परंपरा और संस्कारों का जीवंत उदाहरण पेश किया है नगर के शर्मा परिवार ने।

शहर निवासी दीपक शर्मा ने अपने पूज्य स्वर्गीय पिताश्री हेमराज जी शर्मा की पुण्य स्मृति में, श्राद्ध पक्ष के पावन अवसर से ठीक पूर्व, एक अनुकरणीय और संवेदनशीलता से भरा कार्य किया है। उन्होंने भक्तन की बावड़ी स्थित श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार एवं अंतिम यात्रा में उपयोग आने वाली आवश्यक सामग्री भेंट की।
परिवारजनों की मौजूदगी में हुआ सामग्री का हस्तांतरण
इस सेवा कार्य के दौरान पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों की झलक साफ दिखाई दी। सामग्री सौंपने के अवसर पर दीपक शर्मा के साथ उनकी पूज्य माताजी श्रीमती कुसुम हेमराज शर्मा, पुत्री लतिका शर्मा, पुत्र रौनक शर्मा एवं परिवार के अन्य सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।
"स्मृतियों को चिरस्थायी बनाता है समाजोपयोगी दान"
यह दान काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी की गरिमामय उपस्थिति में श्मशान प्रबंध समिति के समर्पित सदस्य मनोज बोरवाल को ससम्मान सौंपा गया। इस अवसर पर भावुक होते हुए परिवारजनों ने कहा कि अपने दिवंगत परिजनों की पावन स्मृति में किया गया ऐसा दान, जो सीधे समाज और जरूरत के क्षणों में काम आए, उससे न केवल समाज को संबल मिलता है बल्कि दिवंगत आत्मा की स्मृतियां भी सदैव के लिए चिरस्थायी और अमर हो जाती हैं।
सकारात्मक संदेश देती यह पहल : काकानी
श्री काकानी ने कहा कि अक्सर लोग अपनी खुशी या उत्सवों में दान-पुण्य करते हैं, लेकिन जीवन के अंतिम सत्य श्मशान स्थल की व्यवस्थाओं और अंतिम यात्रा की गरिमा के लिए आगे आना एक अत्यंत संवेदनशील और प्रेरणादायी सोच को दर्शाता है। शर्मा परिवार का यह कदम समाज के अन्य लोगों को भी यह संदेश देता है कि अपनों की याद में किया गया निस्वार्थ सामाजिक कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
Hemant Bhatt