सामाजिक सरोकार : पुलिस और प्रेस के अच्छे रिश्ते समाज के हित में

सामाजिक सरोकार : पुलिस और प्रेस के अच्छे रिश्ते समाज के हित में

सेवानिवृत्त आईपीएस आर सी पंवार का कहना

⚫ सैलाना प्रेस क्लब के बैनर तले 'पुलिस और प्रेस के रिश्ते' विषय पर हुई परिचर्चा

हरमुद्दा
सैलाना, 30 जुलाई। पुलिस और प्रेस के रिश्ते हमेशा ही अच्छे होने चाहिए। दरअसल प्रेस पुलिस की आंख,कान, नाक होती हैं। अपराधों की रोकथाम में पुलिस को प्रेस की हर समय जरूरत होती हैं। पुलिस को भी प्रेस जगत द्वारा की गई आलोचना को सहजता से स्वीकारना होगा। और अपने काम में और सुधार लाना होगा। पुलिस और प्रेस एक दूसरे को समझे, सहज विचारों का आदान प्रदान करे, हर बात को प्रतिष्ठा का सवाल बनाने के बजाय दोनों अपनी अपनी कमियां दूर करने की बड़े मन से कोशिश करे तो ही पुलिस और प्रेस दोनों मिल कर एक स्वस्थ,स्वच्छ, भयमुक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं।

सैलाना प्रेस क्लब द्वारा 'पुलिस और प्रेस के रिश्ते' विषय पर गुरु पूर्णिमा पर आयोजित परिचर्चा में सेवा निवृत पुलिस अधीक्षक, चिंतक, लेखक आर सी पंवार ने ये प्रेरणादाई विचार व्यक्त किए। सेवा निवृत आई पी एस पंवार का सैलाना से तीन दशक से भी अधिक पुराना नाता हैं। सन 95-96 वे सैलाना में एसडीओ पुलिस रहे। वर्तमान में भी वे पुलिस महकमे में प्रशिक्षण, स्कूलो में व्याख्यान आदि कार्यक्रमो में शिरकत करते रहते हैं। आत्म हत्या क्यों और अपराध अनुसंधान केसे हो विषय पर पंवार पुस्तके लिख चुके हैं।

डेढ़ घंटे चली परिचर्चा

सैलाना प्रेस क्लब संरक्षक वीरेन्द्र त्रिवेदी के निवास पर बड़े ही आत्मीय माहौल में डेढ़ घंटे परिचर्चा चली। पंवार ने प्रेस क्लब के पदाधिकारियों,सदस्यों की हर जिज्ञासा का जवाब दिया। पंवार ने कहा कि समाज में पुलिस की जितनी जिम्मेदारी होती हैं,उतनी किसी अन्य शासकीय महकमे की नहीं होती। पुलिस को हर समय सचेत,सजग, और चिंतन, मनन में रहना होता हैं। कई बार हमें अपने परिवार की खुशियां ताक में रख कर भय मुक्त समाज देने की अपनी जिम्मेदारी निभाना होती हैं। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने लगभग हर प्रमुख जिले में काम किया। हर जगह की परिस्थिति अलग होती हैं। पर हर जगह प्रेस का भरपूर सहयोग मिला।निंदा,आलोचना को भी मैंने सहज रूप से स्वीकारा। और चीजें ठीक करने की कोशिश की। पुलिस भी आम मानव ही हैं,कोई भगवान तो नहीं। गलती पुलिस से भी हो सकती हैं।

मनगढंत कहानियों पर उठा सवाल

कई बार किसी अपराध के खुलासे में पुलिस की मनगढ़ंत कहानियां भी प्रकाश में आती हैं। परिचर्चा में जब ये सवाल भी उठा तो जवाब में पंवार ने कहा कि ऐसा अक्सर नहीं होता हैं। कहीं कहीं कोई मामला प्रकाश में आता हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। पर उन्होंने फिर दोहराया कि पुलिस भी मानव ही हैं। कहीं कोई चूक हो जाती होगी।पर बिना पुलिस के क्या सभ्य समाज की कल्पना संभव हैं? आदिकाल, पुरातनकाल से पुलिस किसी न किसी न किसी रूप में समाज की चौकसी के लिए रहती आई हैं।

गुरु तो प्रेस ही हैं

अवसर चूंकि गुरु पूर्णिमा का था तो एक सवाल ये भी उठा कि आखिर गुरु कौन, पुलिस कि प्रेस। यानि पुलिस प्रेस की गुरु हैं कि प्रेस पुलिस की गुरु। ठहाकों के बीच पंवार ने माना कि दरअसल गुरु तो प्रेस ही हैं। पुलिस तो लोक सेवक होती हैं। हमें कई बार अपराध नियंत्रण में प्रेस से सही सलाह,मार्गदर्शन मिलता हैं तो फिर गुरु तो प्रेस जगत ही हैं।

इन्होंने किया स्वागत

प्रारंभ में प्रेस क्लब अध्यक्ष सुरेश मालवीय और संरक्षक संतोष धाभाई ने पुष्पमाला से पंवार का स्वागत किया। स्वागत उद्बोधन में अध्यक्ष मालवीय ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से क्राईम की खबरे बनाने में अच्छा मार्गदर्शन मिलता हैं। बदलते परिवेश में पाठकों का टेस्ट भी बदला हैं। अब पाठकों को निबंधात्मक खबरे नहीं बल्कि पॉइंट टू पॉइंट खबर चाहिए,बस। ज्यादा समय किसी के पास है नहीं। ऐसे आयोजन हम सभी को और अच्छी खबरे देने का मार्ग बताएंगे।परिचर्चा में क्लब के सचिव विमल कटारिया, संरक्षक संतोष धाभाई, क्लब उपाध्यक्ष कैलाश परिहार और संजय शर्मा, बुरहान लुकमानी, सुनील परिहार ने कई गंभीर सवाल उठाए। पत्रकार मनोज भंडारी,नितेश राठौड़ ,क्रषणकान्त मालवीय आदि ने भी परिचर्चा में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। संचालन संरक्षक वीरेन्द्र त्रिवेदी ने किया। आभार प्रेस क्लब उपाध्यक्ष कैलाश परिहार, ने माना।