फैसला : हत्यारे पति सूरसिंह भिलाला को आजीवन कारावास
⚫ मामला नवंबर 2025 का
⚫ पत्नी के शरीर पर थे चोट के 18 निशान
हरमुद्दा
गुना, 22 अप्रैल। पत्नी की हत्या करने वाले आरोपी को सत्र न्यायाधीश गुना श्री अमिताभ मिश्र ने आजीवन कारावास से दण्डित किया। प्रकरण में मध्यप्रदेश राज्य की ओर से पैरवी लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने की।
मिली जानकारी के अनुसार 3 एवं 4 नवंबर 25 की मध्य रात्रि को शाम 6 बजे से सुबह के मध्य ग्राम कांदई थाना म्याना निवासी सूर सिंह भिलाला पिता धन सिंह भिलाला ने उसकी पत्नी रेशमबाई की मारपीट कर हत्या की थी। फरियादी सुरेश भिलाला ने 4 नवंबर 25 को सुबह 10 बजे इस आशय की सूचना दी कि सुबह 8 बजे उसे उसकी बुआ सायदी बाई ने फोन करके बताया कि "तेरी छोटी बुआ रेशम बाई उर्फ रेशु की कल रात में उसके पति सूरसिंह ने मारपीट की है जिससे वो खत्म हो गई है, तुम आ जाओ"। तब वह और घरवाले ग्राम कांदई पहुंचे, जहां रेशम बाई खटिया पर मृत अवस्था में डली थी और उसके शरीर पर जगह - जगह चोटों के निशान थे, जो नीले पड़ रहे थे और बाएं कान के पास चोट होकर खून निकल रहा था।
आरोपी को किया गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर मृतक का पोस्ट मार्टम कराया और कपड़े जब्त किए। आरोपी को गिरफ्तार कर उससे घटना में प्रयुक्त लाठी जप्त की और विवेचना पूर्ण करने के पश्चात् न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। मृतका के शरीर पर कुल 18 चोटें पाई गईं थीं। सिर में अस्थिभंग था। मृतका का शव परीक्षण करने वाली चिकित्सक के अनुसार मृतका की मृत्यु सिर में आई चोट के कारण हुई थी। चिकित्सक ने बचाव पक्ष के इस सुझाव को अस्वीकार कर दिया था कि मृतिका को सीढ़ियों से गिरकर पलटने से चोटें आईं थीं। सुरेश ने कहा कि मृतका के बच्चों ने उसे बताया था कि शाम को मम्मी पापा लड़ रहे थे और पापा ने अंदर से दरवाजा लगाकर मम्मी की डंडे से मारपीट की थी। न्यायालय में मृतका के पुत्र ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। सायदी बाई को रानू बाई ने बताया था कि आरोपी उसे रास्ते में मिला था और आरोपी ने उससे कहा था कि उसने रेशम बाई को लकड़ी से मार डाला है और मृतका के बच्चों ने भी उससे कहा था कि पापा ने रात में मां को मार डाला है।
रानू बाई ने भी नहीं किया अभियोजन की कहानी का समर्थन
न्यायालय में रानू बाई ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया और अपने बयान से बदल गई। घटना का कोई चक्षुदर्शी साक्षी नहीं था और पूरा प्रकरण परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित था। प्रकरण में सम्पूर्ण साक्ष्य और अभियोजन तथा बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के पश्चात् न्यायालय ने आरोपी को उसकी पत्नी की हत्या का दोषी पाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) में आजीवन कारावास और 2 हजार रुपए के अर्थदंड से दण्डित किया।
Hemant Bhatt