एमसीयू सत्रारंभ कार्यक्रम 'अभ्युदय' का दूसरा दिन : मानवीय गुण बहुत बुनियादी, एआई जैसी तकनीकें नहीं कर सकेंगी इसका मुकाबला

एमसीयू सत्रारंभ कार्यक्रम 'अभ्युदय' का दूसरा दिन : मानवीय गुण बहुत बुनियादी, एआई जैसी तकनीकें नहीं कर सकेंगी इसका मुकाबला

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक यशवंत व्यास ने कहा

⚫ भविष्य में प्रिंट मीडिया में फील्ड रिर्पोटिंग के जॉब्स बढ़ेंगे

हरमुद्दा
भोपाल, 21 अगस्त। एआई एक अच्छा साथी या सेवक हो सकता है। इसका मुकाबला ईमानदारी जैसे गुणों से किया जा सकता है। एआई से घबराने की कोई जरूरत नहीं। प्रिंट मीडिया को एआई से बहुत फायदा होगा। एआई के इस दौर में हाइपर लोकल दुनिया बहुत महत्वपूर्ण है, इससे भविष्य में प्रिंट मीडिया में फील्ड रिर्पोटिंग के जॉब्स बढ़ेंगे।

यह बातें एमसीयू के सत्रारंभ कार्यक्रम 'अभ्युदय' के दूसरे दिन के पहले सत्र में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक यशवंत व्यास ने कही। वे बतौर मुख्य वक्ता 'एआई के दौर में प्रिंट मीडिया' विषय पर व्‍याख्‍यान  दे रहे थे।

विभिन्न सत्रों में हुए व्याख्यान

एमसीयू के सत्रारंभ कार्यक्रम के दूसरे दिन आज विभिन्‍न सत्रों में वरिष्‍ठ पत्रकार यशवंत व्‍यास, वरिष्‍ठ रेडियो उद्घोषक कमल शर्मा, जनसम्‍पर्क विशेषज्ञ डॉ. समीर कपूर, संस्‍कृतिधर्मी डॉ. सच्चिदानंद जोशी, पद्मश्री विजयदत्‍त श्रीधर एवं वरिष्‍ठ पत्रकार एवं उद्घोषक विनय उपाध्‍याय के व्‍याख्‍यान हुए।

बहुत ही बुनियादी है मानवीय गुण

प्रारंभिक सत्र में बोलते हुए श्री व्‍यास ने कहा कि आधुनिक तकनीक और मानव सभ्यता के विकास में इंटेलिजेंस कोसेंट, फिजिकल कोसेंट, इमोशनल कोसेंट और स्प्रिचुअल कोसेंट जैसे मानवीय गुणों के संदर्भों में कहा कि मशीनें या तकनीक मानव का मुकाबला नहीं कर सकतीं। यह बात जरूर है कि हमारे कई कामों जैसे कि श्रम वाले क्षेत्रों में तकनीक का दखल बढ़ा है। बहुत हद तक आईक्यू आधारित काम में भी इसका समावेश बढ़ रहा है। लेकिन अभी भी मानवीय गुण बहुत बुनियादी हैं और एआई जैसी तकनीकें इसका मुकाबला नहीं कर सकती हैं। प्रिंट मीडिया में इन्हीं मानवीय गुणों जैसी प्रीमियम वैल्यू पैदा करनी होगी। सूचनाओं की दुनिया में मीडिया को विश्वसनीयता को बढ़ाना होगा। श्री व्यास ने एमसीयू में पत्रकारिता के इतिहास पर केंद्रित प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के ऐतिहासिक घटनाओं के कवरेज के प्रथम पन्नों की गैलरी की प्रशंसा भी की।

प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता बहुत विशिष्ट

पत्रकारिता खासकर प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता बहुत विशिष्ट रही है। बहुत से समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने इस क्षेत्र में मानदंड स्थापित किए हैं। अपने पत्रकारीय जीवन के अनुभवों को साझा किया और बताया कि किस तरह प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ने उनके लेखन में अहम भूमिका का निर्वाह किया है।

⚫ विजय मनोहर तिवारी, कुलगुरु, एमसीयू

शब्द जहां करते हैं बम का काम तो मरहम का भी

"शब्‍द" 'बम' का काम भी करते हैं और 'मरहम' का भी। अच्‍छा बोलना चाहते हैं तो अच्‍छा सुनना सीखिये। शब्‍द उदास भी करते हैं और शब्‍दों में वह ताकत भी होती है जो खुशी से भर दे। शब्‍द ब्रम्‍ह भी है जिसकी हम प्राण प्रतिष्‍ठा करते हैं। अच्‍छी भाषा के साथ अच्‍छा बोलने का संस्‍कार ही उद्घोषक को सफल बनाते हैं। आवाज की दुनिया विषय पर उन्होंने कहा कि शब्द की प्राण प्रतिष्ठा वाणी से ही होती है और वह प्रभावशाली हो जाता है। बोलते वक्त व्याकरण का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। उन्होंने ऑडियो मीडियम में आ रहे बदलावों सहित वाइस प्रोजेक्शन, रेडियो के लिए लेखन आदि विषयों पर विस्तार से बात की।

⚫ कमल शर्मा, प्रख्यात रेडियो उद्घोषक

संसार में भाषा के पहले थी ध्वनियां मौजूद

संसार में भाषा के आने से पूर्व भी ध्वनियां मौजूद थीं।  यही ध्वनि भाषा की मातृभूमि हैं और शब्द उसकी पृष्ठभूमि। ज्ञान परंपरा का निर्माण वाचिक और शब्द जैसे अलग-अलग माध्यमों से हुआ है। शब्द के पास वाचिक शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि शब्द हमारी स्मृति में ठहर जाते हैं। इसलिए अच्छा संवाद करने के लिए अच्छे शब्द हमारे पास होना जरूरी है। इसके लिए अच्छा पढ़ना और सुनना बहुत आवश्यक है।

⚫ विनय उपाध्याय, पत्रकार एवं कला समीक्षक

मीडिया के लोगों में भाषा की अच्छी समझ जरूरी

'पत्रकारिता साहित्य एवं संस्कृति' विषय पर कहा कि भाषा के लिए हमारी निर्भरता तकनीक पर बढ़ना बहुत अच्छा नहीं है। पत्रकारिता में लोकमंगल की भावना को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि भाषा पत्रकार का प्रमुख औजार है इसलिए मीडिया के लोगों में भाषा की अच्छी समझ आवश्यक है।

⚫ पद्मश्री विजयदाश्त श्रीधर

भारत की ज्ञान परंपरा और संस्कृति समृद्ध

एक भारतीय बतौर हमारी पहली पहचान हमारी संस्कृति है। भारत की ज्ञान परंपरा और संस्कृति बहुत समृद्ध है और यह पूरे विश्व को प्रभावित कर सकती हैं। डॉ. जोशी ने कहा कि यह युग मोबाइल का नहीं बल्कि भारत का युग है।

⚫ डॉक्टर सच्चिदानंद जोशी, सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली

डिजिटल डोर में जनसंपर्क क्षेत्र हुआ विस्तृत

 डिजिटल दौर में विज्ञापन और जनसंपर्क की रणनीतियों पर ब्रांड विशेषज्ञ ने डिजिटल दौर में जनसंपर्क का क्षेत्र बहुत विस्तृत हुआ है और इसमें अनेक नए आयाम जुड़े हैं। इस क्षेत्र में आने वालों को बाजार और बदलती तकनीकों, प्रतिस्पर्द्धा की बारीक जानकारियां होना आवश्यक है।

⚫ डॉ समीर कपूर, ब्रांड विशेषज्ञ

"पहल" का हुआ विमोचन, पुरस्कारों से नवाजा

इन विविध सत्रों में पत्रकारिता विभाग के समाचार पत्र विकल्प, जनसंचार विभाग के पत्र 'पहल' का विमोचन भी हुआ। पत्रकारिता विभाग की छात्राओं सुश्री प्रज्ञा एवं सुश्री विशाखा को पंडित रामेश्वर दयाल स्मृति तथा विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग में 2023-2025 में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने पर छात्रा सुश्री प्रतिष्ठा पवार को स्‍व. अम्‍बा प्रसाद स्‍मृति पुरस्‍कार भी दिए गए। इस अवसर पर पूर्व छात्राओं प्रियंका दुबे, सोनल पटेरिया, डॉ. शिवा श्रीवास्तव तथा रागेश्री गांगुली ने भी विचार व्यक्त किए।

सत्रों का किया इन्होंने संचालन

विविध सत्रों का संचालन लोकेंद्र सिंह राजपूत, डॉ गरिमा पटेल,  विवेक सावरीकर, डॉ. संदीप भट्ट ने किया। आभार डॉ. राखी तिवारी विभागाध्यक्ष पत्रकारिता विभाग, प्रो. संजय द्विवेदी, विभागाध्यक्ष जनसंचार विभाग, डॉ. आरती सारंग विभागाध्यक्ष पुस्तकालय विभाग तथा डॉ.पवित्र श्रीवास्तव विभागाध्यक्ष विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग ने किया।

शुक्रवार को होंगे यह सत्र

सत्रारंभ कार्यक्रम अभ्‍युदय के तीसरे दिन 22 अगस्‍त 2025 को फिल्‍म समीक्षा विषय पर प्रख्‍यात पत्रकार अनंत विजय का उद्बोधन होगा। सिनेमा लेखन के विविध आयाम विषय पर फिल्‍म निर्माता एवं लेखक विपुल रावल अपनी बात रखेंगे। इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के विभिन्‍न आयामों पर वरिष्‍ठ पत्रकार श्री ब्रजेश सिंह एवं श्री बालकृष्‍ण अपने विचार रखेंगे। सेंसर टेक्‍नोलॉजी पर श्री चिराग जैन एवं बीएनएस एवं मीडिया कानून पर सुश्री शिखा छिब्‍बर के व्‍याख्‍यान होंगे। विश्‍वविद्यालय की पूर्व छात्राएं सुश्री सरिता चौरसिया, अदिति राजपूत एवं निधि अरोड़ा "मैं और मेरा विश्‍वविद्यालय" पर विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा करेंगी।