विलंबित जन्म-मृत्यु पंजीयन के नए नियम लागू: 1 से 2 साल की देरी पर तहसीलदार जारी करेंगे आदेश
⚫ 2 साल बाद कोर्ट के चक्कर तय
हरमुद्दा
रतलाम, 8 अक्टूबर। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय के निर्देशानुसार जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम 2026 के नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावशील हो गए हैं। नए नियमों के तहत देरी से होने वाले जन्म-मृत्यु पंजीयन के लिए प्रशासनिक और न्यायिक प्राधिकारियों के अधिकार तय कर दिए गए हैं। कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार अजय कटेसरिया द्वारा रतलाम जिले के लिए इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिए गए हैं।
नए संशोधन लागू होने से जहां एक निश्चित समय सीमा (1 से 2 वर्ष) में पंजीयन की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर सरल होगी, वहीं 2 साल से अधिक की देरी होने पर आमजन को न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना होगा।
क्या बदला व्यवस्था में? जानिए मुख्य प्रावधान
1 वर्ष से 2 वर्ष के भीतर की देरी
यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के 1 वर्ष बाद लेकिन 2 वर्ष के भीतर दी जाती है, तो इसका पंजीयन तहसीलदार, नायब तहसीलदार अथवा पदेन एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश के बाद ही रजिस्ट्रार/उप-रजिस्ट्रार द्वारा किया जाएगा।
2 वर्ष से अधिक की देरी (अत्यधिक विलंब)
यदि सूचना घटना के 2 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद दी जाती है, तो इसका पंजीयन केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (First Class Judicial Magistrate) के आदेश पर ही संभव होगा।
क्षेत्रीय अधिकारिता का नियम
प्रमाणपत्र और पंजीयन आदेश उसी क्षेत्र के सक्षम अधिकारी व रजिस्ट्रार द्वारा जारी किए जाएंगे, जिस क्षेत्र में जन्म या मृत्यु की घटना घटित हुई है।
आमजन के लिए: सुविधा या दुविधा?
सुविधा (राहत के बिंदु)
स्थानीय स्तर पर तुरंत सुनवाई
1 से 2 साल के भीतर वाले मामलों में आवेदकों को अब बड़े अधिकारियों या कलेक्ट्रेट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अपने क्षेत्र के तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पास ही आवेदन का निस्तारण हो जाएगा।
स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया
अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र तय होने से फाइल अटकी नहीं रहेगी और फर्जीवाड़ा या गलत प्रविष्टियों पर लगाम लगेगी।
दुविधा (चुनौती के बिंदु)
2 साल बाद कोर्ट के चक्कर
2 साल से अधिक पुराना पंजीकरण: यदि घटना के 2 साल बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है। मजिस्ट्रेट की जांच और संतुष्टि के बाद ही यह प्रमाण पत्र जारी होगा। लेकिन इस माध्यम से आदेश प्राप्त करने में आम जनता को कानूनी कागजी कार्रवाई, वकील की फीस और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ सकता है।
जागरूकता का अभाव
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर जन्म-मृत्यु पंजीयन कराने को लेकर आज भी सतर्कता की कमी है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
मुद्दे की बात
सलाह: किसी भी अप्रत्याशित कानूनी उलझन और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से बचने के लिए जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीयन समय रहते (प्राथमिकता से 21 दिनों के भीतर या अधिकतम 1 वर्ष के अंदर) अपने संबंधित निकाय/ग्राम पंचायत या पंजीकृत अस्पताल के माध्यम से अवश्य करवा लें।
Hemant Bhatt