रतलाम में 'सेवा संकल्प' या 'फोटो सेशन'? एक टोकरी कचरे पर 9 झाड़ू से प्रहार

रतलाम में 'सेवा संकल्प' या 'फोटो सेशन'? एक टोकरी कचरे पर 9 झाड़ू से प्रहार

⚫ जन-सेवा से ज्यादा नेताओं की 'फोटो खिंचवाओ प्रतियोगिता' 

⚫ बिना मास्क-ग्लव्स वाले सफाईकर्मियों की अनदेखी

⚫ सेहत की सुरक्षा के  बुनियादी संसाधनों से महरूम सफाई कर्मी

हरमुद्दा
​रतलाम, 2 अक्टूबर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत शुक्रवार को हनुमान ताल परिसर में स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। हालांकि, यह आयोजन जन-सेवा से ज्यादा नेताओं की 'फोटो खिंचवाओ प्रतियोगिता' बनकर रह गया।

शुक्रवार को ​हनुमान ताल पर स्थिति यह थी कि एक टोकरी भर कचरे के आसपास करीब 9 नेता झाड़ू लिए इस तरह खड़े थे, मानो हॉकी का कोई मैच चल रहा हो। रतलाम के प्रथम नागरिक महापौर प्रहलाद पटेल, रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मनोहर पोरवाल और जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्य प्रदीप उपाध्याय समेत कई भाजपा नेता हाथों ग्लव्स पहनकर डंडे वाली झाड़ू हाथ में लेकर कचरे को इधर-उधर करते हुए पोज देते नजर आए। खास बात यह रही कि किसी ने भी चेहरे पर मास्क नहीं लगा रखा था। वजह साफ थी मास्क से चेहरा ढक जाता तो संगठन और वरिष्ठ नेताओं तक फोटो कैसे पहुंचती? टिकट की दावेदारी, पद की दौड़ और सोशल मीडिया की डीपी (DP) चमकाने के फेर में स्वास्थ्य और नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।

​वार्डों से नदारद, हनुमान ताल पर फोटो खिंचवाने की होड़

वास्तव में स्वच्छता और जन-भागीदारी का संदेश तब सार्थक होता जब शहर के हर वार्ड में पार्षद के नेतृत्व में क्षेत्रीय रहवासियों और मंडल पदाधिकारियों की टोलियां उतरतीं। लेकिन शहर के बाकी हिस्सों में अभियान का कोई नामो-निशान तक नहीं दिखा। पूरे शहर को छोड़ स्वच्छता का यह 'प्रदर्शन' शहर के अंतिम छोर हनुमान ताल पर समेट दिया गया, जिससे आम जनता को कोई सीधा फायदा नहीं मिला।

​असली स्वच्छता दूतों की सुध कौन लेगा?

एक तरफ जहां नेता सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए ग्लव्स पहनकर झांकी जमा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ शहर की सड़कों पर सूर्योदय के पहले हर दिन काम करने वाले महिला, पुरुष और युवा सफाईकर्मी बिना किसी मास्क या ग्लव्स के बदस्तूर सफाई करते दिखे। यह कोई एक दिन का कार्य नहीं हर दिन ऐसा ही हो रहा है। बगल में या हाथ में झाड़ू लिए मैदान में उतर जाते हैं। जिन कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए ग्लव्स और मास्क सबसे जरूरी हैं, वे बुनियादी संसाधनों से महरूम हैं, जबकि नेता नगरी के झांकीलाल इसे महज एक दिन के इवेंट की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। 

​संकल्प और हकीकत का अंतर

कार्यक्रम के दौरान प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण, जल स्रोतों की सुरक्षा और स्वच्छता में जन-भागीदारी का भारी-भरकम संकल्प जरूर दिलवाया गया। लेकिन जब तक ऐसी मुहिम धरातल पर उतरने के बजाय सिर्फ नेताओं की पब्लिसिटी और 'इति श्री' तक सीमित रहेगी, तब तक शहर को वास्तविक स्वच्छता का लाभ मिलना नामुमकिन है।