मुद्दा नन्हें की मौत का : रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का टीका लगने के बाद हुई पियांश की मौत? एक का चल रहा है अस्पताल में उपचार

मुद्दा नन्हें की मौत का : रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का टीका लगने के बाद हुई पियांश की मौत? एक का चल रहा है अस्पताल में उपचार

प्रशासन का कहना अन्य 18 बच्चों को भी लगे वैक्सीन

⚫ आज तक वैक्सीन से मौत की घटना नहीं

⚫ पोस्टमार्टम कर विसरा रखा सुरक्षित 

⚫ रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

हरमुद्दा
रतलाम, 26 फरवरी। जिले के बिलपांक थाना क्षेत्र अंतर्गत धराड़ के समीप ग्राम नया खेड़ा में टीका लगने के कुछ समय बाद दो बच्चे उल्टी दस्त के शिकार हो गए। परिजन तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उन्हें शहर के बाल चिकित्सालय भेजा, परंतु एक दस माह के बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। जबकि दूसरा बच्चा अस्पताल में भर्ती है। इधर प्रशासन का कहना है कि रूबेला वैक्सीन से मृत्यु की कोई घटना के प्रमाण अब तक नहीं आए हैं। नन्हें का पीएम होने के पश्चात विसरा सुरक्षित रख लिया है। विसरा रिपोर्ट के बाद ही मृत्यु का कारण स्पष्ट होगा।जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग जिला रतलाम द्वारा प्रकरण में यथोचित कार्रवाई की जा रही है।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रत्येक मंगलवार की तरह इस मंगलवार को भी स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण किया जा रहा था। दोपहर करीब 12.30 बजे दस माह का पियांश पिता धर्मेंद्र मालवीय और डेढ़ वर्षीय नित्यांश पिता देवीलाल मालवीय को परिजन टीके लगवाने ले गए। टीका लगने के एक घंटे बाद पियांश उल्टी दस्त करने के साथ जोर-जोर से रोने लगा। परिजन तुरंत नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र धराड़ पर ले गए, जहां से उन्हें बाल चिकित्सालय भेजा। 

बच्चों ने कर दिया था रोना बंद

बाल चिकित्सालय पहुंचने के पूर्व ही सालाखेड़ी चौकी पर बच्चे ने रोना बंद कर दिया। परिजन पियांश को बाल चिकित्सालय लेकर आए, जहां डॉक्टर के काफी मशक्कत के बाद भी बच्चे को बचा नहीं सके। वही, दूसरा बच्चा नित्यांश को भी उल्टी दस्त की समस्या होने लगी, जिसे परिजन दोपहर करीब तीन बजे बाल चिकित्सालय लाए, जहां डॉक्टर ने भर्ती कर उसका उपचार कर रहे है। दोनों बच्चों के परिजनों ने टीका लगाने वाले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।

नन्हें पियांश की मौत के मुद्दे पर प्रशासन का कहना बच्चों को लगाया गया मिजल्स रुबेला वैक्सीन

नन्हे की मौत के मुद्दे पर प्रशासन का कहना है कि धराड़ में जिस नन्हें पियांश की मृत्यु हुई है, उसका पोस्ट मार्टम कराया गया है। विसरा सुरक्षित रखा गया है। विसरा की रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा।।

⚫ जनसंपर्क विभाग कार्यालय रतलाम से जानकारी दी गई कि मिजल्स रुबेला वैक्सीनेशन ऐसी प्रक्रिया है,  जिसके माध्यम से बच्चों में मिजल्स एवं रूबेला रोग से लड़ने के लिए बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। 

⚫ मिजल्स एवं रूबेला से होने वाली मृत्यु से बचाव के लिए वैक्सीनेशन एक कारगर कदम है इसके दो टीके एम आर 1 एवं एम आर 2 के रूप में लगाए जाते हैं ,  जिसका पहला टीका 9 माह की आयु पूर्ण होने पर एवं दूसरा टीका बच्चों के डेढ़ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर लगाया जाता है। 

⚫ हर टीके की तरह बिना प्रतिकूल प्रभाव के इस टीकाकरण के बाद भी मामूली इफेक्ट जिसमें टीका लगने के बाद सूजन,  बुखार आना सामान्य बात है , किंतु मिजल्स,  रुबेला वैक्सीनेशन से मृत्यु होने संबंधी कोई घटना के प्रमाण नहीं है। 

⚫ मिजल्स रूबेला का जो वैक्सीन रतलाम जिले के आंगनवाड़ी केंद्र धराड़ पर लगाया गया, वही वैक्सीन पूरे प्रदेश में सभी बच्चों को दिया जा रहा है,  प्रदेश में अन्य जिले या ब्लॉक के किसी भी प्रकरण में  मृत्यु होने जैसी कोई घटना नहीं हुई है। 

⚫ मिजल्स रूबेला का जो वैक्सीन आंगनवाड़ी केंद्र नयाखेड़ा , धराड़ पर लगाया गया ,  इस वायल से अन्य चार बच्चों का भी वैक्सीनेशन किया गया, इनमे से एक बच्चा सर्दी खांसी बुखार के कारण बाल चिकित्सालय में भर्ती है और पूरी तरह स्वस्थ हैं। अन्य बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं है, वे अपने घर पर ही है। 

⚫ धराड फोकल प्वाइंट से 10 गांव में इसी बेच का वैक्सीन  प्रदान किया गया था। इससे कुल 18 बच्चों का वैक्सीनेशन किया गया। उन बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं है। 

⚫ वैक्सीनेशन की प्रक्रिया से ही भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया गया है। वैक्सीनेशन के माध्यम से बच्चों में होने वाली कई जानलेवा बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है। सभी बच्चों को उनकी आयु के अनुसार सभी प्रकार के वैक्सीनेशन निरंतर दिए जा रहे हैं जिसके कारण शिशु मृत्यु दर कम होने में मदद मिली है। 

⚫ बीसीजी का टीका लगाने से टी बी रोग से बचाव में, हेपेटाइटिस बी का टीका लगाने से पीलिया की बीमारी से बचाव में, पेंटावेलेंट का टीका लगाने से टिटनेस , काली खांसी और डिप्थीरिया , हिमोफिलस इनफ्लुएंजा रोग से बचाव में, एफ आई पी वी और पोलियो से पोलियो से बचाव में , रोटा वैक्सीन से दस्त रोग से बचाव में, पी सी वी वैक्सीन से न्यूमोकोकल निमोनिया से बचाव में, एम आर वैक्सीन से मिजल्स रुबेला बीमारी से बचाव में मदद मिलती है। वैक्सीनेशन कराना जरूरी है। 

⚫ स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत जिला ए ई एफ आई कमेटी द्वारा प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रोटोकोल अनुसार उक्त वायल को भी जांच के लिए भेजा जा रहा है ।

⚫ जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग जिला रतलाम द्वारा प्रकरण में यथोचित कार्रवाई की जा रही है।

⚫ प्रशासन का कहना है टीकाकरण बच्चों को अनेक जानलेवा बीमारियों से बचाए जाने का सार्थक मार्ग है। पूर्ण जांच से पहले किसी प्रकार की टिप्पणी टीकाकरण के महत्वपूर्ण कार्य के विरुद्ध उदासीनता और अन्य बच्चों को उक्त स्वास्थ्य सेवा से दूर कर सकती है।