केवल खोपड़ी मिलने वाले सनसनीखेज हत्याकांड में दो को आजीवन कारावास

यह फैसला इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करता है कि आधुनिक दौर की पुलिस विवेचना केवल प्रत्यक्षदर्शियों पर निर्भर नहीं है। प्रत्यक्ष साक्ष्यों के अभाव में भी जब डीएनए रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस, डिजिटल वीडियो और 'लास्ट सीन थ्योरी' का एक मजबूत ताना-बाना बुना जाता है, तो कानून की अदालत में कोई भी अपराधी बच नहीं सकता।

केवल खोपड़ी मिलने वाले सनसनीखेज हत्याकांड में दो को आजीवन कारावास

डीएनए और वीडियो साक्ष्य बने हत्यारों के लिए फैसला

⚫ मामला नवंबर 2022 का

न्याय प्रणाली और विवेचना का उत्कृष्ट उदाहरण

हरमुद्दा
​रतलाम, 19 अगस्त। बिना चश्मदीद के भी जब पुलिस विवेचना वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मजबूत कड़ियों से लैस हो, तो अपराधियों का कानून के शिकंजे से बचना नामुमकिन हो जाता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण रतलाम के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव के उस ऐतिहासिक फैसले में देखने को मिला, जहाँ अदालत ने थाना शिवगढ़ से जुड़े चर्चित राजू उर्फ राजपाल हत्याकांड में दो मुख्य आरोपियों, कालू और बंटी, को हत्या, अपहरण तथा साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने हरमुद्दा कोअपराध से सजा तक की पूरी कहानी बताई।

अपहरण और गुमशुदगी : 04 नवंबर 2022 को ग्राम कालाखेत से राजू उर्फ राजपाल को मोटरसाइकिल पर जबरन उठाकर ले जाया गया। तलाश के बाद 21 नवंबर 2022 को पुलिस थाना शिवगढ़ में गुमशुदगी दर्ज हुई।

खोपड़ी और अवशेषों की बरामदगी

10 दिसंबर 2022 को सूचना के आधार पर जामण पाटली तलाई के पास से पुलिस ने एक मानव खोपड़ी व अन्य हड्डियां बरामद कीं।

अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्य (DNA Test)

क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) इंदौर में कराई गई डीएनए जांच में बरामद अवशेषों का मिलान मृतक के पिता के रक्त के नमूनों से 'शत-प्रतिशत' हुआ, जिसने वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया कि अवशेष राजू के ही थे।

अंतिम बार देखे जाने का साक्ष्य : गवाहों के बयानों से प्रमाणित हुआ कि घटना के दिन मृतक को अंतिम बार कालू और बंटी के साथ ही देखा गया था।

डिजिटल और वीडियो सबूत : एक अन्य विधि-विरुद्ध बालक के मोबाइल से फॉरेंसिक टीम द्वारा रिकवर किए गए वीडियो में आरोपी राजू के साथ मारपीट करते और उसे ले जाते साफ नजर आए।

हथियार और जब्ती : आरोपी कालू के कब्जे से सरकार द्वारा प्रतिबंधित धारदार कटारनुमा चाकू बरामद हुआ।

​न्यायालय का फैसला और सजा का विवरण

अतिरिक्त लोक अभियोजक चौहान द्वारा प्रस्तुत की गई साक्ष्यों की अटूट श्रृंखला के आधार पर अदालत ने आरोपी कालू (पिता कांतिलाल अमलियार) और बंटी उर्फ कमलेश (पिता उदयराम सोलंकी) को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302/34, 365, और 201 के तहत दोषी पाया।

इन धाराओं में सुनाई सजा

धारा 302/34 (हत्या)आजीवन कारावास₹5,000/-, 
धारा 365 (अपहरण)5 वर्ष का सश्रम कारावास ₹2,000/-, धारा 201 (साक्ष्य मिटाना)3 वर्ष का सश्रम कारावास ₹1,000/-
आयुध अधिनियम 25(1-B)(b) (केवल कालू हेतु)2 वर्ष का सश्रम कारावास ₹2,000/- की सजा सुनाई गई

न्याय प्रणाली और विवेचना का उत्कृष्ट उदाहरण

यह फैसला इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करता है कि आधुनिक दौर की पुलिस विवेचना केवल प्रत्यक्षदर्शियों पर निर्भर नहीं है। प्रत्यक्ष साक्ष्यों के अभाव में भी जब डीएनए रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस, डिजिटल वीडियो और 'लास्ट सीन थ्योरी' का एक मजबूत ताना-बाना बुना जाता है, तो कानून की अदालत में कोई भी अपराधी बच नहीं सकता।