फैसला : परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर हत्यारों को आजीवन कारावास

फैसला : परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर हत्यारों को आजीवन कारावास

हरमुद्दा
गुना, 31 जुलाई। तंत्र मंत्र का आरोप लगाकर हत्या कर मृतक का शव पेड़ से टांगने वाले आरोपियों को  सत्र न्यायाधीश गुना अमिताभ मिश्र ने आजीवन कारावास से दण्डित किया। प्रकरण में मध्यप्रदेश राज्य की ओर से पैरवी लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने की।

लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने बताया फरियादी बाबूलाल ने 8 अक्टूबर 25 को फरियादी ठाकुर सिंह भिलाला ने कैंप ग्राम बलखण्डी में इस आशय की रिपोर्ट लिखाई कि 7 अक्टूबर  25 को सुबह 11 बजे उसके पिता मानसिंह खर्च में ग्राम आटाखेड़ी जाने की कहकर उसके बुआ के लड़के ठाकुर के साथ मोटर साइकिल से गये थे, फिर शाम 7-8 बजे उसे सिरसौद (राज.) में मानसिंह और ठाकुर मिले थे। अगले दिन सुबह 7 बजे उसे कुंअर सिंह भिलाला ने बताया कि "तेरे पापा बिहारीलाल मेहर के खेत की मेढ़ पर बेहड़ा के पेड़ से लटके हैं" तब उसने वहां जाकर देखा कि उसके पिता बेहड़ा के पेड़ की डाल से तौलिया के फंदे से फांसी पर लटके थे, उनके सिर से खून निकल रहा था और उनकी मृत्यु हो चुकी थी।


पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पेड़ से उतारा और घटनास्थल से खून आलूदा मिट्टी जप्त की। मृतक के पुत्र ने पुलिस को बताया कि उसके ही गाँव के ओजम, मुकेश और अमरसिंह (आरोपीगण) उसके पिता पर तंत्र मंत्र के आरोप लगाते थे और इसी बात को लेकर उन्होंने पहले भी मृतक से झगड़ा किया था और मृतक को गांव छोड़कर जाने को भी कहते थे। उसने आरोपीगण पर उसके पिता की हत्या का संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि उसने उसके पापा के साथ आरोपीगण को देखा था।

तीन को सजा

पुलिस ने मर्ग जांच में साक्षियों के कथनों और कॉल डिटेल एवं अन्य साक्ष्य के आधार पर आरोपीग ओजम उर्फ अमरसिंह भिलाला पिता वेल सिंह, अमर सिंह भिलाला पिता अनसिंह और मुकेश भिलाला पिता लालसिंह उर्फ इंडा भिलाला निवासीगण बरवन सोसायटी थाना फतेहगढ़ के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना उपरांत न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। शव परीक्षण में मृतक के सिर पर गहरा घाव, मुंह और नाक से खून आ रहा था तथा कंधे पर भी चोट थी। मृतक के शव को पेड़ से लटकाकर हत्या को आत्महत्या का स्वरूप देने का असफल प्रयास किया गया था परन्तु चिकित्सीय साक्ष्य एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर मृतक की मृत्यु हत्यात्मक स्वरूप की पायी गई।


घटना का कोई चक्षुदर्शी साक्षी नहीं था और पूरा प्रकरण परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित था।  मृतक को अन्तिम बार आरोपीगण के साथ देखा गया था। न्यायालय ने प्रकरण में आयी समस्त साक्ष्य एवं अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के पश्चात् यह पाया कि अभियोजन ने अपनी साक्ष्य से आरोपीगण के विरुद्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ियों की विद्यमानता को प्रमाणित पाते हुए। आरोपीगण को मृतक की हत्या का दोषी पाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) सहपाठित धारा 3(5) में आजीवन कारावास और 1-1 हजार रुपए के अर्थदंड से दण्डित किया।