वहां नजर आया श्रद्धा, भक्ति और सेवा के आध्यात्मिक उल्लास का एक अद्भुत दृश्य
⚫ पूज्य स्वामी श्री चिदम्बरानन्दजी महाराज का अवतरण दिवस एवं श्री कालिका माता अन्न क्षेत्र का 36वाँ स्थापना दिवस मनाया हर्षोल्लास से
⚫ कल्याणकारी जीवन के लिए ईश्वर से मंगल प्रार्थना
हरमुद्दा
रतलाम, 19 जुलाई। स्थानीय श्री कालिका माता सत्संग सभागृह में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। अवसर था श्री हरिहर सेवा समिति रतलाम एवं श्री कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में अनंत श्री विभूषित केशवपुर पीठाधीश्वर, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्दजी महाराज के अवतरण दिवस तथा श्री कालिका माता अन्न क्षेत्र के 36वें स्थापना दिवस का।

स्वामी श्री चिदंबरानंद सरस्वती जी
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ श्री कालिका और स्वामी चिदम्बरानंद सरस्वती जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व महाआरती के साथ हुआ। समारोह में उपस्थित समस्त भक्त समुदाय ने पूज्य स्वामीजी के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर लोक कल्याणकारी जीवन के लिए ईश्वर से मंगल प्रार्थना की।
"संतों का सान्निध्य देता है सदाचार की प्रेरणा"

रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री पोरवाल विचार व्यक्त करते हुए
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रतलाम विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मनोहर पोरवाल ने श्री कालिका माता सेवा मंडल के सेवा प्रकल्पों की खुलकर सराहना की। उन्होंने स्वामीजी के रतलाम प्रवास के दिनों को याद करते हुए भावपूर्ण शब्दों में कहा "संतों का सान्निध्य समाज को सदाचार, सेवा और संस्कारों की सही दिशा प्रदान करता है। श्री कालिका माता सेवा मंडल द्वारा किए जा रहे धार्मिक और सेवा कार्य अनुकरणीय हैं।"
स्वामी चिदम्बरानन्दजी का जीवन: तप, त्याग और ईश्वरीय कृपा की अमर कहानी

विचारक श्री व्यास संबोधित करते हुए
विचारक एवं प्रभुप्रेमी संघ के पूर्व अध्यक्ष कैलाश व्यास ने स्वामीजी के दिव्य आध्यात्मिक जीवन के कई प्रेरक प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह प्रकृति समय-समय पर आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानन्द और आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरिजी महाराज जैसी महान आत्माओं को लोकमंगल के लिए भेजती है, और स्वामी चिदम्बरानन्दजी भी इसी दिव्य शृंखला का हिस्सा हैं। श्री व्यास ने स्वामीजी के जीवन से जुड़े दो अत्यंत चमत्कारी व प्रेरक संस्मरण सुनाए, जिससे सभागार में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए
अविश्वसनीय गुरु-भक्ति
मात्र 7 वर्ष की अल्पायु में ही स्वामीजी के पिताश्री ने उन्हें सद्गुरु पूज्य स्वामी हरिहरानन्दजी महाराज के चरणों में समर्पित कर दिया था।
अज्ञात संत का स्पर्श और चमत्कार
हिमालय की अत्यंत कठिन साधना के दौरान जब स्वामीजी के पैर निष्क्रिय हो गए थे और डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे, तब एक अज्ञात संत ने प्रकट होकर स्पर्श मात्र से उन्हें पुनः स्वस्थ कर दिया और भविष्यवाणी की थी कि यह युवा संन्यासी सनातन धर्म के लिए महान कार्य करेगा।
कठिन साधना
स्वामीजी ने विजयपुर में एक माह तक निरंतर खड़े रहकर तपस्या की और भंडूच में आँखें बंद कर गहन साधना के साथ धर्मोपदेश दिए। उनका सरल और संवेदनशील व्यक्तित्व मक्खन (नवनीत) की तरह कोमल है।
समाजसेवियों और अतिथियों का हुआ आत्मीय अभिनंदन
इस पावन अवसर पर समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अतिथियों का हरिहर सेवा समिति एवं कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट की ओर से आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, उपाध्यक्ष गोविन्द काकानी, सदस्यगण राजेंद्र गोयल, राजेंद्र मौर्य, धीरज व्यास, राखी व्यास, किरण महावर एवं एडवोकेट कैलाश व्यास का शाल और श्रीफल भेंट कर आत्मीय स्वागत व अभिनंदन किया गया।
श्रद्धालुओं ने की दीर्घायु की मंगलकामना
कार्यक्रम में प्रभुप्रेमी संघ के अध्यक्ष हरीश सुरोलिया, समन्वय परिवार के शिवराम शर्मा, श्री कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष राजाराम मोतियानी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित थे। संचालन हरीश कुमार बिंदल ने किया।
Hemant Bhatt