दीपों के पर्व पर अपनों को याद करने की "प्रेरणा" की अनूठी परंपरा
दीपावली सिर्फ अपने घरों को ही नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के स्मरण से अपने कृतज्ञता के दीप को भी प्रज्वलित करें और संस्कृति की इस सुंदर परंपरा को जीवंत बनाएं।
⚫ नरक चतुर्दशी पर मुक्तिधामों में मचेगा उल्लास,
⚫ पूर्वजों के निमित्त होगा दीपदान
⚫ प्रेरणा की परंपरा दो दशक से निरंतर
हरमुद्दा
रतलाम, 5 नवंबर। रोशनी, उमंग और आतिशबाजी के पाँच दिवसीय दीपोत्सव का हर कोई आनंद उठाता है, घर-आंगन और व्यापारिक प्रतिष्ठान जगमग होते हैं। लेकिन इस चमक-दमक के बीच हम अक्सर अपनी संस्कृति के उस महत्वपूर्ण विधान को भूल जाते हैं, जो हमारे वर्तमान अस्तित्व की नींव है—यानी हमारे पूर्वज। इसी वैचारिक शून्यता को भरने और सनातन संस्कृति की सार्थकता सिद्ध करने के लिए रतलाम में एक प्रेरणादायी परंपरा पिछले दो दशकों से निरंतर आगे बढ़ रही है।

प्रेरणा संस्था के अध्यक्ष गोपाल के सोनी ने हरमुद्दा को बताया कि इस वर्ष 07 नवंबर 2026 (नरक चौदस) के पावन अवसर पर सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'प्रेरणा' के तत्वावधान में मुक्तिधामों को ही दीपोत्सव का केंद्र बनाकर 'पूर्वजों संग दीप पर्व' मनाने का अनूठा आह्वान किया गया है।

क्यों खास है नरक चौदस पर दीपदान?
शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी/यम चौदस) का दिन केवल रूप चौदस या नरक यातना से मुक्ति का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने पितृगणों और पूर्वजों को स्मरण करने का भी विशिष्ट पर्व है।

वेदों और पुराणों का संदर्भ: नारद एवं पद्म पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि पूर्वजों के प्रसन्न होने पर समस्त देवी-देवता और ग्रह-नक्षत्र स्वतः अनुकूल हो जाते हैं। पितृदोषों के शमन और पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए यमराज के निमित्त दीपदान करने का विधान है।
राजा बलि का वरदान: लोकउक्ति के अनुसार, भगवान वामन से राजा बलि ने यह वरदान मांगा था कि जो व्यक्ति इस दिन यमराज के लिए दीपदान करेगा, वह और उसका परिवार समस्त दुखों और अकाल पीड़ाओं से मुक्त रहेगा।
"तमसो मा ज्योतिर्गमय" – अंधकार से प्रकाश की ओर
संस्था के पदाधिकारियों का मानना है कि यदि हमारे पूर्वज किन्हीं कारणों से तृप्ति या प्रकाश से दूर हैं, तो उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके अंतिम विश्राम स्थल (मुक्तिधाम) पर दीप प्रज्वलित कर उन्हें प्रकाश की ओर ले जाने की प्रार्थना करें। आज हम जो कुछ भी हैं, उसमें हमारे पूर्वजों का अतुलनीय आशीर्वाद और योगदान है।
वर्ष 2006 से शुरू हुई अनूठी परंपरा
अध्यक्ष श्री सोनी ने बताया कि सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था 'प्रेरणा' द्वारा वर्ष 2006 से इस अभिनव परंपरा की शुरुआत की गई थी, जो अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। संस्था का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और पितृ ऋण के प्रति जागरूक करना है।
आयोजन की मुख्य बातें
⚫ दिनांक : 07 नवंबर 2026 (नरक चौदस)
⚫ समय : संध्या ठीक 6:00 बजे
⚫ स्थान : त्रिवेणी मुक्तिधाम (तथा शहर के अन्य समस्त मुक्तिधाम)
⚫ आपसे आग्रह : आप सभी शहरवासी अपने-अपने क्षेत्र के मुक्तिधाम में 5 दीपक, बाती, तेल और आतिशबाजी के साथ सपरिवार उपस्थित रहें और अपने पूर्वजों के साथ दीप पर्व मनाएं।
इनका रहा है विशेष आह्वान
इस पुनीत और धर्म-संस्कृति से जुड़े अभियान को सफल बनाने के लिए संस्था 'प्रेरणा' के अध्यक्ष गोपाल के. सोनी (मिंडिया), सदस्य वीणा सोनी, क्षितिज सोनी, राजेन्द्र कड़ेल, राजेश रांका आदि ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से बढ़-चढ़कर शामिल होने का आह्वान किया है।
Hemant Bhatt