उपलब्धि सरोकार : बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को मालवी गराडू के नाम से मिला जी.आई. टैग
⚫ एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप के विशेष प्रयास हुए सफल
⚫ रियावन की प्रसिद्ध लहसुन को पहले ही मिल चुका है जीआई टैग
⚫ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान होगी मजबूत
हरमुद्दा
रतलाम, 21 जून। जिले को देश-विदेश में ख्याति दिलाने वाली बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को मालवी गराडू के नाम से जी.आई. (भौगोलिक संकेतक) टैग मिल गया है। इसके लिए रतलाम में एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप के विशेष प्रयास सफल हुए हैं। उद्यानिकी विभाग अंतर्गत इससे पहले रतलाम जिले की प्रसिद्ध रियावन लहसुन को भी जी.आई. टैग प्राप्त हो चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश स्तर पर सभी विभागों को जिला स्तर पर प्रमुख वस्तुओं को जी.आई. टैग चिन्हित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
बालम ककड़ी 100 हेक्टेयर एवं गराडू 120 हेक्टेयर में हो रहे उत्पादित
वर्तमान में रतलाम जिले में बालम ककड़ी का लगभग 100.00 हेक्टेयर एवं गराडू लगभग 120.00 हेक्टेयर में उत्पादित किया जा रहा है।

बालम ककड़ी
इन फसलों के उत्पादन से जिले के बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं। सैलाना की केसरिया बालम ककड़ी अपने रसीले स्वाद के साथ-साथ पीला, हरा, केसरिया रंग लिये अपनी खास तासीर लिये देश भर में प्रसिद्ध है।

स्वादिष्ट गराडू
वहीं रतलामी गराडू अपने बेहतरीन स्वाद, अंदर से मुलायम एवं बाहर से कुरकुरा बनने की विशेषता के साथ ही यह विटामिन खनिज और फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत है, गराडू में कुछ ऐसे तत्व भी पाये जाते हैं जो दिमाग की कार्यप्रणाली को सुचारू और विकसित करने में सहायक होते हैं। गराडू में एंटीऑक्सीडेंट्स गुण भी होते हैं, इसके अलावा यह शुगर को भी नियंत्रित करता है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी पहचान मजबूत
जीआई टैग मिलने से इन उद्यानिकी उत्पादों की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होगी। साथ ही स्थानीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होने से फसल का क्षेत्र विस्तार होगा तथा निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा। रतलाम जिले की विशिष्ट जलवायु, मिट्टी एवं पारंपरिक उद्यानिकी पद्धतियों के कारण यहां उत्पादित गराडू, बालम ककड़ी एवं रियावन लहसुन अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं विशिष्ट स्वाद के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहे हैं। जीआई टैग इस विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता प्रदान करता है।
संयुक्त प्रयासों का परिणाम
यह उपलब्धि जिले के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, उद्यानिकी विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इससे न केवल जिले की उद्यानिकी पहचान को नई ऊंचाइयां मिलेंगी, बल्कि स्थानीय उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार में भी नई पहचान प्राप्त होगी।
⚫ मंगलसिंह डोडवे, उपसंचालक, उद्यानिकी, रतलाम
Hemant Bhatt