सरकारी दावों के फेर में फंसी सड़क-इमारतें: रतलाम PWD का 'कागजी विकास', जमीनी हकीकत में अधर में लटके करोड़ों के प्रोजेक्ट
हर प्रोजेक्ट की समयसीमा (Deadline) बार-बार आगे क्यों खिसकाई जाती है? ठेकेदारों पर लचर निगरानी और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते रतलाम की जनता को अपने ही हक के अस्पताल, स्कूल और कॉलेज के भवनों के लिए महीनों-साल इंतजार करना पड़ रहा है।
⚫ 249 करोड़ के 'सांदीपनी स्कूल': साल बीता, पर तीन अब भी अधूरे
⚫ स्वास्थ्य सुविधाओं पर 'तारीख पर तारीख'
⚫ तकनीकी-कौशल विकास और श्रम विभाग की फाइलें अटकीं
⚫ 154 करोड़ के काम अब भी 'प्रगतिरत', जनता पूछ रही सवाल
हरमुद्दा
रतलाम, 5 अगस्त। लोक निर्माण विभाग (भवन) रतलाम ने वर्ष 2025-26 के निर्माण कार्यों की एक चमचमाती प्रगति रिपोर्ट जारी कर करोड़ों रुपये के बजट का हिसाब तो पेश कर दिया है, लेकिन आंकड़ों की इस जादूगरी के पीछे विभाग की चिर-परिचित 'लेट-लतीफी' की तस्वीर साफ झलक रही है। समय पर काम पूरा न करने और सुस्त कार्यप्रणाली के कारण आज भी कई महत्वपूर्ण जनहितैषी योजनाएं फाइलों और म्याद (डेडलाइन) की खींचतान के बीच अटकी हुई हैं।

249 करोड़ के 'सांदीपनी स्कूल': साल बीता, पर तीन अब भी अधूरे
विभाग भले ही 4 सी.एम. राइज (सांदीपनी) विद्यालयों के निर्माण का ढिंढोरा पीट रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि 249 करोड़ 70 लाख रुपए के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत स्वीकृत 7 में से 3 स्कूलों का काम अब भी अधूरा है।
टांग दिया नया आश्वासन
जिस शिक्षा व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए ये भव्य इमारतें बननी थीं, वहां अब नवंबर 2026 तक का नया 'आश्वासन' टांग दिया गया है। विभाग की इस कछुआ चाल का सीधा खमियाजा उन हजारों बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जो समय पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं पाने का हक रखते थे।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर 'तारीख पर तारीख'
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े निर्माण कार्यों का हाल भी अलग नहीं है। पिपलौदा तहसील में 11 करोड़ 35 लाख रुपए की लागत से 30 बिस्तरीय अस्पताल को 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में अपग्रेड करने का काम अगस्त 2026 तक पूरा होने की महज 'संभावना' जताई जा रही है। यानी पुख्ता दावा विभाग के पास यहां भी नहीं है। जब जीवनरक्षक बुनियादी ढांचे के निर्माण में इस तरह का ढुलमुल रवैया अपनाया जाएगा, तो ग्रामीण इलाकों की जनता को त्वरित इलाज के लिए शहर के चक्कर ही काटने पड़ेंगे।
तकनीकी-कौशल विकास और श्रम विभाग की फाइलें अटकीं
रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े प्रोजेक्ट्स भी PWD की सुस्ती से अछूते नहीं हैं।
कौशल विकास: जावरा और पिपलौदा में ITI भवन बनने की बात तो कही जा रही है, लेकिन स्वीकृत अन्य 4 कार्य अब भी प्रगतिरत हैं और 2 तो शुरू तक नहीं हो सके हैं।
उच्च शिक्षा: 13.34 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से एक काम आज भी निविदा (टेंडर) के स्तर पर ही धूल फांक रहा है।
श्रम विभाग: मजदूरों और श्रमिकों से जुड़ा 6.16 करोड़ का इकलौता काम महीनों से 'फिनिशिंग' के नाम पर ही अटका पड़ा है।
154 करोड़ के काम अब भी 'प्रगतिरत', जनता पूछ रही सवाल
PWD के अपने आंकड़े बताते हैं कि 154 करोड़ 66 लाख रुपए की भारी-भरकम लागत वाले 16 निर्माण कार्य अब भी प्रगतिरत श्रेणी में लटके हुए हैं।
मुद्दे की बात तो यही है कि विभाग हर बार प्रेस नोट जारी कर अपनी पीठ तो थपथपा लेता है, लेकिन हर प्रोजेक्ट की समयसीमा (Deadline) बार-बार आगे क्यों खिसकाई जाती है? ठेकेदारों पर लचर निगरानी और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते रतलाम की जनता को अपने ही हक के अस्पताल, स्कूल और कॉलेज के भवनों के लिए महीनों-साल इंतजार करना पड़ रहा है। जरूरत इस बात की है कि विभाग कागजी आंकड़ों से बाहर निकलकर समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण काम सुनिश्चित करे, ताकि सरकारी बजट का लाभ आम जनता को समय पर मिल सके।
Hemant Bhatt