मामला : तेज डीजे के शोर से पार्षद नासिर कुरैशी की मृत्यु का, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा

मामला : तेज डीजे के शोर से पार्षद नासिर कुरैशी की मृत्यु का, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा

⚫ 'पर्यावरण डाइजेस्ट' के संपादक खुशहाल सिंह पुरोहित ने कलेक्टर अजय कटेसरिया से की मुलाकात

⚫ आमजन हो रहे साइलेंट अटैक का भी शिकार

हरमुद्दा
​रतलाम, 31 अगस्त। शहर में 26 अगस्त को डीजे की अत्यधिक तेज आवाज के कारण पार्षद नासिर कुरैशी की हुई आकस्मिक एवं दुखद मृत्यु के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटना, सार्वजनिक स्वास्थ्य और ध्वनि प्रदूषण नियमों की अनदेखी को लेकर 'पर्यावरण डाइजेस्ट' के संपादक डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित ने कलेक्टर अजय कटेसरिया से व्यक्तिगत मुलाकात की और एक मांग पत्र सौंपा।


​संपादक डॉ. पुरोहित ने हरमुद्दा को पत्र देते हुए बताया कि कलेक्टर का ध्यान इस बात ओर आकर्षित कराया कि रतलाम जिले में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। तेज आवाज वाले डीजे और साउंड सिस्टम न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि अब जानलेवा भी साबित होने लगे हैं। पार्षद नासिर कुरैशी की मृत्यु इसी प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इतना ही नहीं इसका असर साइलेंट अटैक के रूप में भी सामने आ रहा है। 

नियंत्रण के नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी

यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। अत्यधिक ध्वनि केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, विशेषकर हृदय एवं अन्य संवेदनशील रोगों से प्रभावित व्यक्तियों, वृद्धजनों, बच्चों एवं अस्पतालों में उपचाररत मरीजों के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकती है। उक्त घटना को एक गंभीर चेतावनी के रूप में लेते हुए जिले में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।

निष्पक्ष जांच आवश्यक

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु अत्यधिक ध्वनि/डीजे के कारण या उसके कारण उत्पन्न किसी स्वास्थ्यगत आपातस्थिति से हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही यह भी देखना होगा कि संबंधित कार्यक्रम के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त की गई थी अथवा नहीं, अनुमति में निर्धारित शर्तों का पालन हुआ अथवा नहीं तथा कार्यक्रम के दौरान निर्धारित ध्वनि-सीमा एवं समय-सीमा का उल्लंघन हुआ है। इसके लिए आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई तो जरुरी है लेकिन भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं ना हो इसके लिए भी स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए।

उपयोग पर है प्रतिबंध, फिर भी नजरअंदाज

प्रदेश में Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के Rule 5 के अनुसार लाउडस्पीकर अथवा Public Address System के उपयोग के लिए सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति आवश्यक है। सामान्य परिस्थितियों में रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक लाउडस्पीकर, ध्वनि-वर्धक यंत्र अथवा अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों के उपयोग पर प्रतिबंध है। इन नियमों की अनुसूची में विभिन्न क्षेत्रों के लिए अधिकतम अनुमेय ध्वनि-स्तर निर्धारित किए गए हैं।

बढ़ाई जाए निगरानी ध्वनि प्रदूषण की

आवासीय क्षेत्र में सीमा दिन में 55 dB (A) Leq तथा रात्रि में 45 dB (A) Leq निर्धारित है। इसमें नियम 7 के अंतर्गत निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि अथवा रात्रिकालीन प्रतिबंधों के उल्लंघन की शिकायत पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई किया जाना अपेक्षित है। नियम 8 के अंतर्गत सार्वजनिक असुविधा, परेशानी, चोट अथवा उसके जोखिम की स्थिति में ध्वनि को रोकने, नियंत्रित करने अथवा विनियमित करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। विशेष रूप से अस्पताल, विद्यालय, न्यायालय एवं अन्य संवेदनशील/शांत क्षेत्र के आसपास ध्वनि प्रदूषण की निगरानी बढ़ाई जाए। Noise Rules में ऐसे क्षेत्रों को Silence Zone के रूप में निर्धारित करने का प्रावधान है।

जनहित में इन मुद्दों पर हो कार्रवाई

⚫ 26 अगस्त 2026 की उक्त घटना में संबंधित व्यक्ति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय अभिलेख एवं मृत्यु के परिस्थितिजन्य तथ्यों की विस्तृत जांच के बाद यह निर्धारित किया जाए कि अत्यधिक ध्वनि से उत्पन्न तनाव एवं अन्य संबंधित परिस्थितियों की भूमिका के लिए जिम्मेदारों की पहचान कर उन पर शीघ्रता से कार्रवाई हो।

⚫ संबंधित डीजे कार्यक्रम के आयोजक द्वारा लिखित अनुमति प्राप्त की गई थी या नहीं, इसकी जांच की जाए और यदि अनुमति ली गई थी तो उसकी सभी शतों एवं समय-सीमा का परीक्षण किया जाए।

⚫ कार्यक्रम स्थल पर उस समय के ध्वनि-स्तर (dB(A)), डीजे सिस्टम की क्षमता, स्पीकरों की संख्या एवं उनकी दिशा आदि की उपलब्ध जानकारी/रिकॉर्ड की जांच की जाए। उक्त चल समारोह के मोबाइल वीडियो, CCTV फुटेज एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी सुरक्षित किया जाए।

⚫ संबंधित थाना पुलिस, जिला प्रशासन तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से संयुक्त जांच कराई जाए तथा घटना से संबंधित उपलब्ध ध्वनि प्रदूषण संबंधी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं। MPPCB के पास ध्वनि प्रदूषण की निगरानी एवं Noise Rules के क्रियान्वयन के लिए संबंधित व्यवस्था रहती है।

⚫ यदि डीजे संचालक अथवा आयोजक द्वारा निर्धारित ध्वनि-सीमा, समय-सीमा अथवा अनुमति की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है तो Noise Pollution Rules, Environment (Protection) Act तथा अन्य लागू कानूनों के अंतर्गत नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

⚫ भविष्य में रतलाम जिले में शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में डीजे, लाउडस्पीकर एवं ध्वनि-वर्धक यंत्रों के उपयोग के लिए पूर्व अनुमति, निर्धारित ध्वनि-सीमा और समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके लिए जरुरी नियामक व्यवस्था के प्रबंध किये जाए।

⚫ जिले में एक 24×7 शिकायत एवं त्वरित कार्रवाई व्यवस्था स्थापित/सक्रिय की जाए, इसके लिए कोई हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए जिससे अत्यधिक तेज डीजे अथवा लाउडस्पीकर की शिकायत की जा सके और शिकायत मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर ध्वनि-स्तर मापा जा सके और आवश्यकतानुसार ध्वनि बंद कराई जा सके और दोषी पर मौके पर दंडात्मक कार्रवाई हो सके।

अनुरोध है कि इस प्रकरण में तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक पहल शीघ्र की जाए।

कितनी त्वरित और जमीनी होती है कार्रवाई

पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के हित में उठाई गई इस आवाज के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में कितनी त्वरित और जमीनी कार्रवाई करता है।