अनैतिक दबाव और तानाशाही के विरोध में महिला सभापति विनीता व्यास का इस्तीफा

अनैतिक दबाव और तानाशाही के विरोध में महिला सभापति विनीता व्यास का इस्तीफा

बड़ावदा नगर परिषद में बड़ा प्रशासनिक व राजनीतिक भूचाल

हरमुद्दा
​रतलाम / बड़ावदा, 27 जुलाई। नगर परिषद बड़ावदा में जारी आंतरिक खींचतान और मनमानी के खिलाफ प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल (PIC) समिति की सभापति विनीता शैलेंद्र व्यास ने कड़ा कदम उठाया है। अध्यक्ष और उनके पति की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने सभापति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे दिया है।

​अपने सिद्धांतों से समझौता न करने और पार्टी तथा अपनी छवि को बचाने के लिए उठाए गए इस साहसिक कदम से स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। त्यागपत्र पर आवक क्रमांक भी दर्ज हैं।

​इस्तीफे में लगाए गए 7 गंभीर आरोप


​मुख्य नगर पालिका अधिकारी, बड़ावदा को सौंपे गए अपने त्यागपत्र में विनीता व्यास ने परिषद की गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया है।

⚫ ​कर्मचारियों पर अवैध दबाव: अध्यक्ष एवं उनके पति द्वारा अधिकारियों व कर्मचारियों पर नियम-विरुद्ध कार्य करने का निरंतर दबाव बनाया जा रहा है।

⚫ ​तानाशाही रवैया: आम नागरिकों के प्रति पक्षपातपूर्ण और तानाशाही फैसले लिए जा रहे हैं।

⚫ ​PIC बैठकों में हेरफेर: समिति में तय विषयों के अलावा बैठक के बाद अन्य अनुचित मुद्दों को जोड़कर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं।

कर्मचारी हितों की अनदेखी: कर्मचारियों के न्यायसंगत व वैधानिक कार्यों को PIC की कार्यसूची में शामिल तक नहीं किया जा रहा।

⚫ ​अध्यक्ष-पति का अनुचित हस्तक्षेप: परिषद के समस्त विभागों में प्रतिदिन अध्यक्ष-पति द्वारा अनैतिक व नियम-विरुद्ध हस्तक्षेप किया जा रहा है और गलत फैसलों पर सहमति देने का दबाव बनाया जा रहा है।

⚫ ​अवैध नियुक्तियां व निष्कासन: नियमों को दरकिनार कर कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें हटाने का खेल चल रहा है।

⚫ ​संगठन व व्यक्तिगत छवि को नुकसान: इन सभी असंवैधानिक कार्यों से जनहित तो प्रभावित हो ही रहा है, साथ ही विचारधारात्मक संगठन और जनप्रतिनिधि की छवि भी धूमिल हो रही है।

⚫​'सिद्धातों से कोई समझौता नहीं': सभापति विनीता शैलेंद्र व्यास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी असंवैधानिक कार्य का हिस्सा नहीं बन सकतीं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का मूल कर्तव्य जनता की सेवा और नियमों का पालन करना है। जब निकाय में तानाशाही और अनैतिक दबाव का माहौल बन जाए, तो ऐसे में पद पर बने रहना अपने सिद्धांतों से धोखा करने जैसा है।

इंतजार, क्या होगी कार्रवाई ?

इस घटनाक्रम के बाद बड़ावदा नगर परिषद में प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में उच्चाधिकारी और संगठन स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है।