सेहत सरोकार : रतलाम मेडिकल कॉलेज में हुआ 'जीवनधारा शिविर' , 97 मासूमों के खिले चेहरे

सेहत सरोकार :  रतलाम मेडिकल कॉलेज में हुआ 'जीवनधारा शिविर' , 97 मासूमों के खिले चेहरे

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को मिला नया जीवनदीप

⚫ ​मुस्कान जो बनी हिम्मत का प्रतीक

⚫​ इलाज के साथ खुशी और मनोरंजन का माहौल

हरमुद्दा
​रतलाम, 2 अगस्त। समाज, स्वास्थ्य तंत्र और जन-सहयोग जब एक साथ मिलते हैं, तो बदलाव की एक नई और उम्मीद भरी बयार बहती है। ऐसा ही एक अद्भुत उदाहरण डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम में देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के सहयोग से आयोजित विशाल 'जीवनधारा शिविर' ने न केवल थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के इलाज की राह आसान की, बल्कि उनके और उनके परिवारों के जीवन में आशा की नई किरण जगाई। शिविर में रतलाम सहित आसपास के 9 जिलों से आए 97 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों और उनके 250 से अधिक परिजनों ने सहभागिता की।


​पद्मश्री डॉ. लीला जोशी की गरिमामयी उपस्थिति में शुभारंभ

​शिविर का शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. लीला जोशी की प्रेरणादायी उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता डॉ. अनीता मुथा, अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा, सिविल सर्जन डॉ. अखंड प्रताप सिंह, मेदांता अस्पताल (गुरुग्राम) के प्रख्यात हीमैटोलॉजिस्ट डॉ. सत्य प्रकाश यादव, थैलेसीमिया मुक्त मध्य प्रदेश जनजागरण समिति के संरक्षक सत्येंद्र सिंह राठौर, गोविंद काकानी, रेड क्रॉस से प्रीतेश गादिया एवं सेवा भारती के अनुज छाजेड़ सहित अनेक समाजसेवी व चिकित्सक विशेष रूप से उपस्थित रहे।

एक ही छत के नीचे समग्र स्वास्थ्य सेवाएं

​शिविर केवल परामर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास और बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं:

​गहन स्वास्थ्य परीक्षण : पीडियाट्रिक्स टीम द्वारा सभी 97 बच्चों और उनके भाई-बहनों की गहन स्वास्थ्य जांच की गई।
​डिजिटल रिपोर्टिंग : रक्त नमूनों की जांच रिपोर्ट सीधे परिजनों के मोबाइल पर SMS द्वारा भेजने की आधुनिक व्यवस्था की गई।

​मुफ्त दवाइयां व फिजियोथेरेपी

जरूरतमंद बच्चों को आयरन चिलेशन और अन्य जरूरी दवाएं निःशुल्क दी गईं। जोड़ों की सेहत व शारीरिक विकास के लिए फिजियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। मानसिक संबल और पोषण: बच्चों व अभिभावकों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श और विशेष पोषण संबंधी मार्गदर्शन दिया गया।

​भविष्य का बचाव

भविष्य में थैलेसीमिया माइनर बच्चों के जन्म को रोकने के लिए परिजनों को गर्भधारण के दौरान की जाने वाली जांचों की जानकारी दी गई।

​ऑन-द-स्पॉट दिव्यांग प्रमाण-पत्र

जिन बच्चों को दिव्यांगता कार्ड की आवश्यकता थी, उनके प्रमाण-पत्र तुरंत जारी किए गए।

​बोन मैरो ट्रांसप्लांट की दिशा में बड़ा कदम 102 HLA सैंपल कलेक्ट

​थैलेसीमिया के स्थायी इलाज (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मेदांता फाउंडेशन की विशेषज्ञ टीम ने डॉ. सत्य प्रकाश यादव के मार्गदर्शन में 53 बच्चों और उनके परिजनों के कुल 102 HLA सैंपल कलेक्ट किए। अंतर्राष्ट्रीय संस्था 'PATH' ने भी इस पहल में सहयोग दिया।

​मुस्कान जो बनी हिम्मत का प्रतीक

बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराकर पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी नन्हीं मनस्वी राव ने शिविर में आकर अन्य बच्चों से अपना अनुभव साझा किया। उसने मुस्कुराते हुए साथी बच्चों को बिना डरे बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने का हौसला दिया।

​इलाज के साथ खुशी और मनोरंजन का माहौल

अस्पताल के माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए बच्चों के मनोरंजन का विशेष ध्यान रखा गया। मस्ती और खेल: मिकी माउस बाउंसी, मूवी शो और संगीत-गायन की गतिविधियों ने मासूमों के चेहरों पर खिलखिलाहट ला दी। चित्रकल प्रतियोगिता आयोजित हुई।

​सामूहिक प्रयास से साकार हुई सफलता

​कार्यक्रम का कुशल समन्वय डॉ. ध्रुवेंद्र पांडे द्वारा किया गया। संपूर्ण व्यवस्थाओं में डॉ. देवेंद्र नरगावे, डॉ. महेश तलेले, डॉ. सारिका बघेल, डॉ. प्रतिभा बाई, डॉ. आंचल, डॉ. निशा अखाड़े, मानसी मिश्रा, डॉ. आर. सी. डामोर, फिजियोथैरेपिस्ट टीम तथा नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गेनाइजेशन (NMO) के 20 से अधिक एमबीबीएस छात्रों ने सक्रिय योगदान दिया।

इन परिवारों का हुआ मनोबल मजबूत

​मध्य प्रदेश थैलेसीमिया जन जागरण समिति के मार्गदर्शक गोविंद काकानी ने बताया कि प्रदेश के लोकप्रिय मंत्री व क्षेत्रीय विधायक श्री चैतन्य काश्यप द्वारा वर्षों से थैलेसीमिया पीड़ितों को दिव्यांग प्रमाण पत्र, यात्रा सुविधाएं और आर्थिक सहायता निरंतर प्रदान की जा रही है, जिससे इन परिवारों का मनोबल मजबूत हुआ है।

परिवारों का विश्वास ही हमारी सफलता

"हमारा उद्देश्य थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को केवल चिकित्सा सुविधा देना ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को यह विश्वास दिलाना है कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। 9 जिलों से आए परिवारों का विश्वास हमारी पूरी टीम की सफलता है।" 

डॉ. अनीता मूथा, अधिष्ठाता एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, डॉ. लक्ष्मीनारायण मेडिकल कॉलेज रतलाम