​पिछले साल से 151.5 मिमी पीछे छूटा मानसून रतलाम जिले में

​पिछले साल से 151.5 मिमी पीछे छूटा मानसून रतलाम जिले में

मालवा में इस बार बारिश की सुस्त चाल

⚫ जलस्रोतों को भारी बारिश का इंतजार

हरमुद्दा
​रतलाम, 26 जुलाई। मानसून के दस्तक दिए करीब दो महीने बीतने को हैं, लेकिन इस बार बादलों की मेहरबानी पिछले साल जैसी देखने को नहीं मिल रही है। 1 जून से लेकर अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में औसत बारिश 288.88 मिमी दर्ज की गई है, जो कि बीते वर्ष 2025 की इसी अवधि (440.38 मिमी) की तुलना में 151.50 मिमी (लगभग 34.4 प्रतिशत) कम है। 


रविवार सुबह 8:00 बजे समाप्त हुए बीते 24 घंटे में जिले में 5.25 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। आलोट में 3 मिमी, जावरा में 3, ताल में 0, पिपलोदा में 4,  बाजना में 7, रतलाम में 4, रावटी में 10 और सैलाना में 11 मिमी बारिश हुई है। 

अधिकांश जगह गिरा बारिश का ग्राफ

​आंकड़ों का विश्लेषण करें तो कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश तहसीलों में बारिश का ग्राफ नीचे गिरा है। सबसे चिंताजनक स्थिति उन क्षेत्रों में है जहाँ पिछले साल 500 से 670 मिमी से अधिक पानी बरस चुका था, लेकिन इस बार वे क्षेत्र 200 से 300 मिमी के आसपास ही सिमट कर रह गए हैं।

कहाँ हुई सबसे भारी गिरावट?

रावटी और सैलाना में इस बार सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। सैलाना में जहाँ बीते वर्ष 672 मिमी बारिश हुई थी, वहीं इस बार आंकड़ा मात्र 290 मिमी तक ही पहुंच पाया है। इसी तरह रावटी में भी बारिश पिछले साल (583 मिमी) के मुकाबले 60% घटकर केवल 226 मिमी पर अटक गई है।

​कहाँ मिली थोड़ी राहत?

आंकड़ों में एकमात्र राहत की खबर ताल' से सामने आई है, जहाँ पिछले साल के 152 मिमी के मुकाबले इस बार 250 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो बीते वर्ष से 98 मिमी अधिक है।

​किसानों और जलस्रोतों पर क्या होगा असर?

​फसलों के लिए स्थिति: शुरुआती बोवनी के बाद बारिश में आए लंबे अंतराल और सुस्त रफ्तार से सोयाबीन व अन्य खरीफ फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। किसानों को अब एक अच्छी और मूसलाधार बारिश का बेसब्री से इंतजार है।

​जलस्तर और तालाब

तालाबों, बांधों और भूजल स्तर को रीचार्ज होने के लिए जिस भारी बारिश (हेवी स्पेल) की जरूरत होती है, वह इस बार अभी तक देखने को नहीं मिली है। यदि आने वाले दिनों में मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं होता है, तो पेयजल और सिंचाई का संकट गहरा सकता है।

अगस्त में झमाझम बारिश की संभावना

​मौसम विशेषज्ञों का कहना है: "अगस्त के पहले व दूसरे सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने की संभावना है, जिससे अंचल में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। यदि अगला स्पेल अच्छा रहता है तो बारिश का यह बैकलाग काफी हद तक पूरा हो सकता है।"