सामाजिक सरोकार : जब बुजुर्गों की आँखें नम हुईं… तब युवा पीढ़ी को मिला जीवन का सबसे बड़ा संदेश”

सामाजिक सरोकार : जब बुजुर्गों की आँखें नम हुईं… तब युवा पीढ़ी को मिला जीवन का सबसे बड़ा संदेश”

अग्रसेन वाटिका में आयोजन

⚫ अग्रवाल सेवा समिति ने किया 53 युगल का सम्मान

हरमुद्दा के लिए हेमंत मूणत
रतलाम, 2 मार्च। मंच पर जब एक-एक कर वरिष्ठ दंपत्तियों को बुलाया गया और उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष, प्रेम, त्याग और परिवार के लिए किए गए समर्पण की बातें साझा की, तो सभागार में सन्नाटा छा गया। अनेक युगलों की आँखों से भावनाओं की धारा बह निकली और वही आँसू समाज की युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा संदेश बन गए।

भाव विभोर करने वाला यह दृश्य बना अग्रसेन वाटिका में।
अग्रवाल सेवा समिति द्वारा आयोजित 53 वरिष्ठ युगलों का सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और पीढ़ियों के मिलन का पावन उत्सव बन गया। ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि के बीच जब पुष्प वर्षा करते हुए सभी वरिष्ठ युगलों को सम्मानपूर्वक हाल में प्रवेश कराया गया, तो पूरा वातावरण श्रद्धा से भर उठा। तिलक, माल्यार्पण और शॉल ओढ़ाकर किए गए स्वागत ने हर हृदय को स्पर्श किया। आयोजन केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला एक भावनात्मक आह्वान बन गया।

यह थे अतिथि

मुख्य अतिथि नीता सुरेशचंद्र अग्रवाल, अध्यक्ष, अग्रवाल समाज महासभा महिला मंडल, और महेश अग्रवाल अध्यक्ष, अग्रसेन सोशल ग्रुप।

आज जिन वृक्ष से हमें मिल रही छाया बच्चे थे नन्हे पौधे

अतिथियों ने अत्यंत भावुक शब्दों में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा “आज जो वृक्ष हमें छाया दे रहे हैं, वे कभी नन्हे पौधे थे। हमारे बुजुर्गों ने त्याग, परिश्रम और संस्कारों से इस समाज को सींचा है। अब यह जिम्मेदारी युवा पीढ़ी की है कि वह इन जड़ों को सूखने न दे।” आधुनिकता आवश्यक है, प्रगति आवश्यक है, लेकिन यदि संस्कार खो गए तो पहचान भी खो जाएगी। युवाओं से आग्रह किया गया कि वे अपने दादा-दादी और परिवार के वरिष्ठजनों के साथ समय बिताएँ, उनके अनुभवों को सुनें, उनके चरणों में बैठकर जीवन की सच्ची शिक्षा प्राप्त करें।

पीढ़ियों को जोड़ने का संकल्प

समारोह में सभी 53 वरिष्ठ युगलों को पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद गीता भेंट की गई। यह केवल एक उपहार नहीं, बल्कि संस्कारों की ज्योति को आगे बढ़ाने का संकल्प था। वरिष्ठजनों से विनम्र निवेदन किया गया कि वे गीता का अध्ययन कर अपने पोते-पोतियों को धर्म, कर्तव्य, मर्यादा और जीवन के सच्चे मूल्यों का ज्ञान दें।

वक्ताओं ने भावुक स्वर में कहा 

“आज आवश्यकता धन की नहीं, दिशा की है… और वह दिशा हमारे बुजुर्ग ही दे सकते हैं।”

सेवा समिति का समर्पण

इस गरिमामय आयोजन को सफल बनाने में सेवासमिति के समर्पित सदस्यों ओमप्रकाश अग्रवाल, महेश गोयल, कौशिक अग्रवाल, शलभ अग्रवाल, अंकित अग्रवाल, गौरव एरन, संजय अग्रवाल, रितेश झंडीवाला, भावेश गर्ग, राकेश झंडीवाला, प्रमोद बिंदल, जितेंद्र मंगल, दीपक अग्रवाल, विवेक अग्रवाल एवं मनोज मित्तल ने तन-मन-धन से योगदान दिया। संस्था परिचय संजय अग्रवाल ने दिया।  भावपूर्ण संचालन ज्योति अग्रवाल एवं नितिका एरन ने किया। गौरव एरन ने आभार माना। 


युवा पीढ़ी के नाम एक स्वर में यह संदेश गूंजा 

“युवा पीढ़ी केवल भविष्य नहीं, वर्तमान की जिम्मेदारी भी है।
अपने बुजुर्गों का सम्मान कीजिए, उनके अनुभवों को अपना मार्गदर्शन बनाइए। संस्कारों की ज्योति बुझने न दें…
क्योंकि जिस दिन जड़ें कमजोर हो जाती हैं, उस दिन शाखाएँ भी सूख जाती हैं। हम अपनी पहचान, अपनी परंपरा और अपने संस्कारों को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।