रेल यात्री सरोकार : महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की स्मृति में 'चंद्रशेखर आजाद एक्सप्रेस' चलाने की उठी मांग

रेल यात्री सरोकार : महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की स्मृति में 'चंद्रशेखर आजाद एक्सप्रेस' चलाने की उठी मांग

⚫ ​जन्मभूमि, कर्मभूमि और बलिदान भूमि को एक सूत्र में पिरोने के लिए भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष राजेश देवशरण पाण्डेय ने की रेल मंत्री से मांग

हरमुद्दा
​रतलाम, 27 जुलाई। देश के अमर बलिदानी और महान क्रांतिकारी श्री चंद्रशेखर आजाद जी की पावन स्मृतियों को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को उनके अदम्य साहस से प्रेरित करने के उद्देश्य से 'चंद्रशेखर आजाद एक्सप्रेस' रेलगाड़ी चलाने की पुरजोर मांग उठी है। पूर्व मंडल उपाध्यक्ष राजेश देवशरण पाण्डेय ने प्रधानमंत्री एवं रेलमंत्री से पत्राचार व चर्चा कर इस जन-आकांक्षा को शीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया है।

भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष ​राजेश देवशरण पाण्डेय ने हरमुद्दा को बताया कि यह विशेष ट्रेन आजाद जी के जीवन से जुड़े तीन सबसे मुख्य पड़ावों को आपस में जोड़ेगी। 19 प्रभावित लोगों को पत्र भेजे गए हैं जिनमें प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, इस रूट के 11 सांसद दो मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश, मंडल रेल प्रबंधक रतलाम, महाप्रबंधक मुंबई, मध्य प्रदेश के एमएसएमई कैबिनेट मंत्री तथा भाजपा जिला अध्यक्ष को पत्र प्रेषित किए हैं।

तीन ऐतिहासिक स्थलों का अनूठा संगम

⚫ ​जन्मभूमि (भाबरा/चंद्रशेखर आजाद नगर): अलीराजपुर (म.प्र.) स्थित आजाद जी की जन्मभूमि रतलाम संसदीय क्षेत्र का ही भाग है। इसके निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन मेघनगर और रतलाम (पश्चिम रेलवे मंडल मुख्यालय) हैं।

⚫ ​कर्मभूमि (झांसी व ओरछा): काकोरी कांड के बाद बुंदेलखंड (झांसी व ओरछा) क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र बना। सातार नदी के तट पर साधु वेश में बच्चों को पढ़ाने से लेकर युवाओं को निशानेबाजी व बम बनाने का प्रशिक्षण देने तक, आजाद जी ने यहीं से स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति तैयार की थी।

⚫ ​बलिदान भूमि (प्रयागराज): प्रयागराज का अल्फ्रेड पार्क, जहाँ अंग्रेजों से लोहा लेते हुए अपनी अंतिम गोली से आजाद जी ने भारत माता के चरणों में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

​प्रस्तावित रेल मार्ग (लगभग 1,100 कि.मी.)

​प्रस्तावित 'चंद्रशेखर आजाद एक्सप्रेस' का मार्ग मेघनगर से शुरू होकर रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, शाजापुर, सारंगपुर, ब्यावरा-राजगढ़, गुना, अशोकनगर, बीना, ललितपुर, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, ओरछा, मऊरानीपुर, हरपालपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट धाम कर्वी, मानिकपुर और नैनी होते हुए प्रयागराज जंक्शन तक रहेगा।

​सीधी ट्रेन सेवा की आवश्यकता

​वर्तमान में रतलाम से प्रयागराज के लिए इस मार्ग पर कोई सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं है। यदि यह ट्रेन शुरू होती है, तो न केवल देशवासियों को राष्ट्रनायक की जन्मभूमि, कर्मभूमि व बलिदान भूमि के दर्शन करने में सुगमता होगी, बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के इस पूरे अंचल को एक नई और सीधी रेल कनेक्टिविटी भी मिलेगी।

सामाजिक सरोकार से जुड़ा राष्ट्रभक्ति का संकल्प

​"यह केवल एक ट्रेन की मांग नहीं, बल्कि भारत के अमर बलिदानी को सच्ची श्रद्धांजलि और सामाजिक सरोकार से जुड़ा एक राष्ट्रभक्ति का संकल्प है।"

राजेश देवशरण पाण्डेय, पूर्व मंडल उपाध्यक्ष, भाजपा, रतलाम