धर्म संस्कृति : तनावमुक्त जीवन का मार्ग दिखाता दसलक्षण पर्व
⚫ रतलाम में पंडित जिनेंद्र शास्त्री 'सुखी' के मार्मिक प्रवचनों से युवा वर्ग हो रहा प्रेरित
हरमुद्दा
रतलाम, 21 सितंबर। रतलाम के राम मोहल्ला स्थित श्री आदिनाथ सिमंधर जिनालय में इन दिनों जैन धर्म का पवित्र 'दसलक्षण महापर्व' अत्यंत भक्तिभाव, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के इस पावन अवसर पर जयपुर से पधारे सुप्रसिद्ध युवा आध्यात्मिक विद्वान एवं मोटिवेशनल स्पीकर पंडित जिनेंद्र शास्त्री "सुखी" के ओजस्वी एवं मार्मिक प्रवचनों की वर्षा हो रही है।

कार्यक्रम के बारे में हरमुद्दा को विस्तृत जानकारी देते हुए समाज के अध्यक्ष राजकुमार अजमेरा, कीर्ति बड़जात्या एवं जिनेंद्र जैन ने बताया कि दसलक्षण पर्व के अंतर्गत जिनालय में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजन-अभिषेक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय बना हुआ है।
आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़, बढ़ती अपेक्षाओं और तनावपूर्ण माहौल के बीच धर्म को जीवन में उतारने की कला सिखाते हुए पंडित जिनेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने अत्यंत सरल एवं सहज भाषा में प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के गूढ़ रहस्यों को व्यावहारिक उदाहरणों से जोड़कर समझाया।
धर्म की अनूठी व्याख्या
प्रवचन श्रृंखला के दौरान शास्त्री जी ने जीवन में सुख और धर्म के अंतर्संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा—
"दुःखी होना पाप है, दूसरों के सुख में सहयोगी बनना पुण्य है, और स्वयं सुखी रहना ही सच्चा धर्म है। जो जीव को दुःख के गर्त से उठाकर सुख के मार्ग पर स्थापित कर दे, वही वास्तविक धर्म है। ऐसे ही कल्याणकारी धर्म की आराधना का अवसर यह दसलक्षण पर्व हमें प्रदान करता है।"
'टेंशन फ्री लाइफ' पुस्तक का विमोचन
इस गरिमामयी आयोजन के दौरान पंडित जिनेंद्र शास्त्री द्वारा लिखित चर्चित पुस्तक 'टेंशन फ्री लाइफ' का समाजजनों द्वारा भावपूर्वक विमोचन किया गया। पंडित जी पूर्व में भी अनेक ज्ञानवर्धक एवं जीवनोपयोगी पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। उनकी यह कृति वर्तमान समय में मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए एक दिशा-दर्शक की भूमिका निभाती है।
युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति
पंडित जी की आधुनिक सोच, प्रेरक शैली और व्यावहारिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण का ही परिणाम है कि इस धर्मसभा में युवा वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित होकर प्रवचनों का लाभ ले रहा है। समाज के युवाओं में धर्म और संस्कृति के प्रति जागृत होता यह उत्साह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Hemant Bhatt