शासकीय मेडिकल कॉलेज में नियमों की उड़ रही धज्जियाँ: कचरे के ढेर में मिला बायोमेडिकल वेस्ट

आम जनता और मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला महज 'आश्वासन' से हल होने वाला नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या दोषी एजेंसी पर कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है या यह मामला भी कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगा।

शासकीय मेडिकल कॉलेज में नियमों की उड़ रही धज्जियाँ: कचरे के ढेर में मिला बायोमेडिकल वेस्ट

⚫ ​कागज़ों में नियम, ज़मीन पर बिखरे पड़े हैं प्रयुक्त मास्क और ग्लव्स

प्रशासन ने मढ़ा नगर निगम और ठेकेदार पर दोष

⚫ निष्पादन की जिम्मेदारी दे रखी मेसर्स Agile संस्था को

कागज़ी प्रतिबद्धता या ज़मीनी सुधार?

हरमुद्दा
रतलाम, 20 जुलाई। ​स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाला रतलाम का शासकीय स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) स्वयं गंभीर लापरवाही के दलदल में फंसा नजर आ रहा है। अस्पताल परिसर के डम्पिंग यार्ड में खुलेआम बायोमेडिकल वेस्ट और सामान्य कचरा एक साथ फेंका जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। मामला उजागर होने के बाद अब कॉलेज प्रशासन अपनी जवाबदेही तय करने के बजाय पल्ला झाड़ने और सफाई देने में जुट गया है।


​कागज़ों में नियम, ज़मीन पर बिखरे पड़े हैं प्रयुक्त मास्क और ग्लव्स

​मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता डॉ. अनिता मूथा द्वारा जारी स्पष्टीकरण में यह स्वीकार किया गया है कि डम्पिंग एरिया में प्रयुक्त मास्क और ग्लव्स बाहर बिखरे पड़े थे। हालांकि, प्रशासन ने इस गंभीर जैव-चिकित्सकीय लापरवाही का ठीकरा "प्लास्टिक बैग फटने" जैसी अजीबोगरीब दलील पर फोड़ दिया। सवाल यह उठता है कि यदि वेस्ट का संग्रहण मानकों के अनुरूप किया जा रहा था, तो संक्रमण फैलाने वाली ये वस्तुएं खुले में कैसे पहुंचीं?

निजी एजेंसी और नगर निगम के भरोसे चल रही व्यवस्था

अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट और सामान्य कचरे के पृथक्करण व निष्पादन की जिम्मेदारी मेसर्स Agile संस्था को दी गई है। इसके बावजूद परिसर में कचरे का अंबार लगा रहा।

​आधे-अधूरे इंतज़ाम

नगर निगम के डम्पर वाहनों का कचरा उठाने में देरी करना और एजेंसी की लचर कार्यशैली यह दर्शाती है कि यहाँ नियमित निगरानी का पूरी तरह अभाव है।

नोटिस की रस्म अदायगी

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित कर्मचारियों और प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी करने का दावा किया है। लेकिन यक्ष प्रश्न यही है कि क्या हर बार खबर छपने और विवाद बढ़ने के बाद ही प्रशासनिक तंत्र जागेगा?

गंभीर सवाल जो निष्पक्षता पर खड़े होते हैं

जब बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन अति संवेदनशील श्रेणी में आता है, तो नियमित रूप से इसकी निगरानी क्यों नहीं की गई?
​यदि नगर निगम कचरा उठाने में देर कर रहा था, तो समय रहते उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई?
​क्या केवल 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर देने से अस्पताल में पनप रहे संक्रमण के खतरे को रोका जा सकता है?

मुद्दे की बात

कागज़ी प्रतिबद्धता या ज़मीनी सुधार?

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और बायोमेडिकल नियमों के पालन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं तथा ट्रेंचरी डम्पिंग क्षेत्र का निरीक्षण कर सुधारात्मक निर्देश दिए गए हैं। लेकिन आम जनता और मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला महज 'आश्वासन' से हल होने वाला नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या दोषी एजेंसी पर कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है या यह मामला भी कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगा।