रतलाम को हरित और शीतल बनाने के संकल्प के साथ हुआ 'त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान' का शुभारंभ

रतलाम को हरित और शीतल बनाने के संकल्प के साथ हुआ 'त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान' का शुभारंभ

वक्ताओं ने किया हर परिवार से कम से कम एक त्रिवेणी रोपने का आह्वान

⚫ महाअभियान के पोस्टर का हुआ विमोचन

⚫ त्रिवेणी रोपने का दिलाया संकल्प; प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर दिया जोर

हरमुद्दा
रतलाम, 5 जुलाई। विश्व के 10 सबसे गर्म शहरों में शामिल हो चुके रतलाम को दीर्घकालिक शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से ‘त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान’ का श्रीगणेश रविवार को हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने त्रिवेणी रोपण की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डालने के साथ इसी की पूरी संकल्पना भी बताई। अतिथियों ने महाअभियान के पोस्टर का विमोचन कर त्रिवेणी रोपने का संकल्प भी दिलाया।

त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान को लेकर महती बैठक रविवार को विधायक सभागृह, बरबड़, रतलाम में आयोजित की गई। अतिथि एवं वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रतलाम-झाबुआ विभाग के संघ चालक तेजराम मांगरोदा एवं रतलाम विभाग के विभाग प्रचारक कृष्णकांत पांडेय रहे। हार्टफुलनेस संस्था के डॉ. नीलेश शुक्ला भी मंचासीन रहे।

भारतीय सभ्यता और संस्कृति प्रकृति से एकात्म स्थापित करने वाली : तेजराम मांगरोदा

बैठक को संबोधित करते हुए विभाग संघ चालक तेजराम मांगरोदा ने कहा कि जिस तरह वात, पित्त और कफ में असंतुलन होता है तो शरीर भोगता है, उसी प्रकार जल, वायु और अग्नि में असंतुलन हो तो प्रकृति में गड़बड़ी होती है। हम इसे ठीक नहीं कर सकते, प्रकृति स्वयं ही इसे ठीक करती है। वह चाहे बाढ़ के रूप में हो, भूकंप के रूप में हो या महामारी के रूप में, प्रकृति दंड अवश्य देती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर्यावरण-अनुकूल तथा प्रकृति से तादात्म्य व एकात्म स्थापित करने वाली रही है। भगवान श्रीकृष्ण से लेकर हमारे सभी देवी-देवता तथा जैन दर्शन के सभी तीर्थंकर वृक्षों और जीवों के बिना अधूरे हैं। इसके विपरीत वनों का विनाश करने वाली विश्व की 10 कंपनियां पश्चिम की हैं। उन्होंने कहा कि ईको सिस्टम का असर हमारे स्वास्थ्य, मन, विचार और व्यवहार पर पड़ता है।

मांगरोदा ने राजस्थान की अमृता देवी जैसी प्रकृति-प्रेमियों के बलिदान की कहानी बच्चों को सुनाने तथा महर्षि कण्व और शकुंतला के प्रकृति प्रेम से प्रेरणा लेने और त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान से जुड़ने की बात कही।

त्रिवेणी के माध्यम से स्मृतियों को चिरस्थायी बनाएं : कृष्णकांत पांडेय

रतलाम विभाग के विभाग प्रचारक कृष्णकांत पांडेय ने आम के वृक्ष में आने वाले बौर के आम बनने के प्रतिशत का उदाहरण देते हुए कहा कि संकल्प तो बहुत से लोग लेते हैं, लेकिन सफल वही होते हैं जो विकल्प रहित हों। त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान में विकल्प नहीं है। पौधे को पेड़ बनाने की यात्रा ही हमारे इस अभियान को सार्थक करेगी। हमारा लक्ष्य रतलाम की आबादी के हिसाब से त्रिवेणी लगाना और उसे वृक्ष बनाना है और इसके लिए अलग-अलग पड़ाव तय करने पड़ेंगे।

विभाग प्रचारक ने लोगों से त्रिवेणी के माध्यम से अपने पूर्वजों, धार्मिक-मांगलिक आयोजनों सहित अन्य विशेष अवसरों की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने त्रिवेणी रोपण के अभियान को सफल बनाने के लिए संकल्प भी दिलाया।

पीपीटी व वार्तालाप के माध्यम से बताया त्रिवेणी रोपण का महत्व

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने ‘त्रिवेणी’ (पीपल, नीम और बरगद के पौधों) तथा भारत माता का पूजन कर की। अतिथियों का परिचय देवाशीष पौराणिक तथा डॉ. हितेश पाठक ने दिया। तत्पश्चात पर्यावरण मित्र अशोक पाटीदार ने पीपीटी के माध्यम से पर्यावरण और जीवों के संरक्षण के लिए वृक्षों की आवश्यकता बताई। उन्होंने त्रिवेणी के धार्मिक, आध्यात्मिक, वास्तुशास्त्रीय तथा वैज्ञानिक आधार पर महत्व बताया। इस मौके पर रतलाम में बढ़ते तापमान और त्रिवेणी रोपण को लेकर तैयार वार्तालाप का प्रसारण भी किया गया।

महाअभियान को सफल बनाने के दिए सुझाव

महाअभियान को सफल बनाने के लिए लोगों ने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान के बारे में स्कूलों में बताने, वार्डवार और मोहल्लावार टीमों का गठन कर इसका प्रचार-प्रसार करने तथा शासकीय सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए त्रिवेणी रोपण जैसे कार्यों की अनिवार्यता सुनिश्चित करने के सुझाव शामिल हैं। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। संचालन पत्रकार अदिति मिश्रा ने किया। आभार प्रदर्शन शिक्षाविद् विम्पी छाबड़ा ने किया। आयोजन में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, संत, प्रकृति-प्रेमी, स्वयंसेवक, धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।