रतलाम में दो दिवसीय महर्षि वाल्मीकि प्रकट उत्सव 25 से
"यह आयोजन सामाजिक समरसता का जीता-जागता उदाहरण है। 'बुराई की दक्षिणा' लेकर अच्छाई बांटना और 'एक पंगत, एक संगत' के जरिए समाज को जोड़ना—ये पहल दिखाती हैं कि धार्मिक उत्सव किस प्रकार सामाजिक बदलाव और संस्कारों की नई नींव रख सकते हैं।"
⚫ रविवार के शाम को घर-घर जलाएंगे दीप
⚫ 'एक पंगत-एक संगत' और 'बुराई की दक्षिणा' से बिखरेगी सामाजिक समरसता की छटा
⚫ प्रतिभाओं का होगा सम्मान
हरमुद्दा
रतलाम, 24 अक्टूबर। शहर में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक उत्थान का संदेश देने वाला दो दिवसीय 'महर्षि वाल्मीकि प्रकट उत्सव' आगामी 25 अक्टूबर से सुभाष नगर स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर परिसर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में आयोजित किया जाएगा। महर्षि वाल्मीकि समाज सनातन धर्म सभा द्वारा आयोजित इस भव्य उत्सव में जहाँ एक ओर धार्मिक अनुष्ठानों की पावन गूंज होगी, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कुरीतियों के खात्मे, प्रतिभाओं के सम्मान और 'एक पंगत, एक संगत' के माध्यम से समाज को एक सूत्र में पिरोने का अनूठा प्रयास देखने को मिलेगा।

प्रेस वार्ता में मौजूद वाल्मीकि समाज सनातन धर्म सभा के पदाधिकारी
महर्षि वाल्मीकि समाज सनातन धर्म सभा विकास समिति के संयोजक कमल भाटी एवं गायत्री परिवार के विवेक चौधरी ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान आयोजन की विस्तृत रूपरेखा साझा की।
पंचकुंडी महायज्ञ और 'दक्षिणा में बुराई का दान'
आयोजन के पहले दिन 25 अक्टूबर को सुभाष नगर स्थित वाल्मीकि मंदिर परिसर में पंचकुंडी गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
⚫ समय: प्रातः 9:00 बजे से यज्ञ प्रारंभ होगा एवं दोपहर 12:00 बजे पूर्णाहुति होगी।
⚫ विशेषता: यज्ञ में जिले भर से आए 25 जोड़े आहुति देंगे। यह अनुष्ठान नगर पुरोहित शिवलाल छपरी एवं महिला यज्ञ आचार्य रजनी छपरी सहित अन्य के सान्निध्य में संपन्न होगा।
⚫ अनूठी पहल (बुराई का दान): गायत्री परिवार के विवेक चौधरी ने बताया कि इस यज्ञ में दक्षिणा के रूप में रुपयों-पैसों के स्थान पर व्यक्ति से उसकी बुराई या अवगुण दान स्वरूप लिए जाएंगे और बदले में अच्छाई का संकल्प कराया जाएगा, ताकि समाज से नकरात्मकता का नाश हो और सद्भाव का समावेश हो।
घर-घर दीप जलाने का आह्वान
संयोजक भाटी ने समाजजनों से अपील की है कि वे रविवार की शाम ठीक 7:00 बजे अपने-अपने निवास पर दीप प्रज्वलित कर प्रकट उत्सव की खुशियां मनाएं।
'एक पंगत, एक संगत' और प्रतिभाओं का सम्मान
उत्सव के दूसरे दिन 26 अक्टूबर को भव्य धर्म सभा, प्रतिभा सम्मान एवं भंडारे का आयोजन होगा।
⚫ मुख्य अतिथि: कार्यक्रम पूज्य गुरुदेव स्वामी श्री देवस्वरूपा नंद जी महाराज के मुख्य आतिथ्य में होगा।
⚫ समरसता की मिसाल (एक पंगत-एक संगत): दोपहर में गुरु महाप्रसादी (भंडारा) का आयोजन होगा, जिसमें 'एक पंगत, एक संगत' के सिद्धांत पर बिना किसी भेदभाव के सभी समाजजन एक साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण करेंगे।
छिपी प्रतिभाओं को मंच
सम्मान समारोह के अंतर्गत क्षेत्र की उन प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा जो खेल, गायन, नृत्य, लेखन तथा सेहराकटिंग जैसे हुनर में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। संस्कारशाला और सात सूत्रीय सामाजिक आंदोलन। यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित न रहकर समाज-सुधार का भी बड़ा केंद्र बन रहा है।
निशुल्क संस्कारशाला: संस्था द्वारा स्कूली शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को व्यावहारिक संस्कार और नैतिक मूल्य देने के लिए निशुल्क संस्कारशाला का संचालन किया जा रहा है।
गायत्री परिवार का 7-सूत्रीय अभियान: उत्सव के तहत जल संरक्षण (वर्षा सुधार), पौधारोपण व पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण, 'मां की पाठशाला', और स्वावलंबन जैसे रचनात्मक अभियानों को गति दी जाएगी।
4000 की आबादी और बढ़ती बस्तियाँ: समाज के विकास का प्रतीक
श्री भाटी ने बताया कि रतलाम में वर्ष 1980 से महर्षि वाल्मीकि प्रकट उत्सव निरंतर मनाया जा रहा है। पिछले 20 वर्षों में समाज का व्यापक विस्तार हुआ है। पहले शहर में मात्र 5 वाल्मीकि बस्तियाँ थीं, जो अब बढ़कर 11 बस्तियाँ हो चुकी हैं और शहर में समाज की आबादी लगभग 4,000 तक पहुँच गई है। यह विस्तार समाज की संगठनात्मक शक्ति और मुख्यधारा में भागीदारी का परिचायक है।
यह थे मौजूद
प्रेस वार्ता के दौरान नगर पुरोहित शिवलाल छपरी, महिला पुरोहित रजनी छपरी, जयश्री, रोहित भाटी, राजीव कल्याणे एवं विजय भाटी सहित समाज के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
सामाजिक बदलाव और संस्कारों की नई नींव
"यह आयोजन सामाजिक समरसता का जीता-जागता उदाहरण है। 'बुराई की दक्षिणा' लेकर अच्छाई बांटना और 'एक पंगत, एक संगत' के जरिए समाज को जोड़ना—ये पहल दिखाती हैं कि धार्मिक उत्सव किस प्रकार सामाजिक बदलाव और संस्कारों की नई नींव रख सकते हैं।"
Hemant Bhatt