शासकीय भूमि पर ‘नशे की खेती’: रतलाम में मक्का-कपास के बीच उगे 724 किग्रा गांजे के पौधे

​यह घटना केवल नशे के खिलाफ पुलिस की सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पटवारी और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़ा करती है। सरकारी जमीनों की निगरानी का जिम्मा जिन कंधों पर है, उनकी नाक के नीचे 724 किलो गांजा उग जाता है और उन्हें खबर तक नहीं होती? जब तक सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा करने वालों और उनका सहयोग करने वाले तंत्र पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे भू-माफिया सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग करते रहेंगे।

शासकीय भूमि पर ‘नशे की खेती’: रतलाम में मक्का-कपास के बीच उगे 724 किग्रा गांजे के पौधे

⚫ सरकारी तंत्र की जमीन पर अवैध कब्जे का बड़ा खुलासा

⚫ जब्त पौधों की कीमत तकरीबन 70 लाख रुपए

⚫ मुख्य आरोपी कौन? जांच के दायरे में कब्जाधारी

हरमुद्दा
​रतलाम, 30 सितंबर। जिले में एक तरफ जहाँ प्रशासन शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ भू-माफिया और अवैध कारोबारी सरकारी ज़मीन का बेधड़क दुरुपयोग कर नशे का कारोबार फलफला रहे हैं। ताजा मामला थाना सरवन क्षेत्रांतर्गत ग्राम उण्डेर का है, जहाँ पहाड़ी किनारे स्थित शासकीय भूमि पर बेखौफ तरीके से गांजे की खेती की जा रही थी। रतलाम पुलिस ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए कपास और मक्का की फसल के बीच छिपाकर उगाए गए 2,948 हरे गांजे के पौधे (कुल वजन 724 किलोग्राम, अनुमानित कीमत ₹70 लाख) जब्त किए हैं।


​हालाँकि, इस पूरी कार्रवाई ने ‘शासकीय भूमि के दुरुपयोग और उस पर प्रशासनिक निगरानी की कमी’ पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

​सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा और 'नशे की फसल'

​ग्राम उण्डेर में जिस जगह यह कार्रवाई हुई, वह कोई निजी खेत नहीं बल्कि शासकीय भूमि (सरकारी जमीन) है। सवाल यह उठता है कि किसकी शह पर सरकारी जमीन का दुरुपयोग हुआ? बिना किसी डर के इतने बड़े पैमाने पर सरकारी ज़मीन पर कब्जा कर 2,948 पौधे उगा दिए गए और स्थानीय मैदानी अमले को भनक तक नहीं लगी?

​फसलों की आड़ में खेल

कपास और मक्का जैसी ऊँची फसलों के बीच गांजे की खेती करना यह साबित करता है कि यह काम किसी अनाड़ी का नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से सरकारी संसाधनों (ज़मीन) का इस्तेमाल कर नशा तस्करों द्वारा किया जा रहा था।

​मुखबिर की सूचना पर पुलिस की तगड़ी घेराबंदी

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर राकेश पंद्रो, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विवेक कुमार लाल के मार्गदर्शन एवं SDOP सैलाना लेखराज मीणा (IPS) के नेतृत्व में एक संयुक्त रणनीति बनाई गई। ​थाना सरवन, थाना सैलाना और थाना बाजना की टीमों ने पहाड़ी किनारे स्थित खेतों में सर्च ऑपरेशन चलाया। सर्चिंग के दौरान जब कपास-मक्का के बीच देखा गया, तो चारों तरफ गांजे की लहलहाती फसल मिली। पुलिस टीम ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सभी पौधों को उखड़वाया और जब्त कर धारा 8/20 NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

​मुख्य आरोपी कौन? जांच के दायरे में कब्जाधारी

​सरकारी ज़मीन होने के कारण फिलहाल मौके से किसी एक व्यक्ति की सीधी मिल्कियत साबित होना चुनौती है, लेकिन पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इस शासकीय भूमि पर वास्तव में किसका अवैध कब्जा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ​उक्त ज़मीन का उपयोग करने वाले संदिग्धों की पहचान की जा रही है। नशे के इस नेटवर्क में शामिल उत्पादन, परिवहन और बिक्री से जुड़े हर व्यक्ति को आरोपी बनाया जाएगा।

​इन अधिकारियों की रही सराहनीय भूमिका

​इस बड़े पर्दाफाश में थाना प्रभारी सरवन निरीक्षक अर्जुन सेमलिया, थाना प्रभारी सैलाना निरीक्षक पिंकी आकाश, थाना प्रभारी बाजना निरीक्षक रविन्द्र दंडोतिया सैलाना अनुभाग के समस्त स्टाफ एवं साइबर टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

मुद्दे की बात का ​बड़ा सवाल 

​"यह घटना केवल नशे के खिलाफ पुलिस की सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पटवारी और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़ा करती है। सरकारी जमीनों की निगरानी का जिम्मा जिन कंधों पर है, उनकी नाक के नीचे 724 किलो गांजा उग जाता है और उन्हें खबर तक नहीं होती? जब तक सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा करने वालों और उनका सहयोग करने वाले तंत्र पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे भू-माफिया सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग करते रहेंगे।"