उपलब्धि सरोकार : रद्द हुई परीक्षा से नहीं टूटा हौसला, दोबारा मेहनत कर NEET-2026 में 594 अंक लाकर डॉक्टर बनने का सपना किया साकार
⚫ सफलता का श्रेय दिया अभ्यास टीम को
⚫ परिवार का पुष्पमाला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर सम्मान
⚫ लक्ष्य स्पष्ट है तो सफलता मिलेगी जरूर : राजवीर
हरमुद्दा
रतलाम, 8 अगस्त। शहर के होनहार विद्यार्थी राजवीर सिंह सोलंकी ने NEET-2026 में 594 अंक प्राप्त कर पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल की। इस सफलता के साथ वे अपने परिवार के पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं। राजवीर बताते हैं कि उनके पिता पत्रकार एवं समाजसेवी जितेंद्र सिंह सोलंकी एक सामान्य परिवार से हैं और उनका सपना था कि उनका बेटा डॉक्टर बने। राजवीर ने इस सपने को अपना लक्ष्य बनाया और कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत तथा पूरी फैकल्टी टीम को दिया। संस्थान की ओर से राजवीर और उनके परिवार का पुष्पमाला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर सम्मान किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी गईं।
राजवीर की सफलता इसलिए भी प्रेरणादायक है क्योंकि 3 मई को आयोजित पहली NEET परीक्षा में उनके 680 से अधिक अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया। एक पल के लिए लगा कि महीनों की मेहनत व्यर्थ हो गई है। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी, खुद को संभाला, दोबारा पूरी लगन से तैयारी शुरू की और Re-NEET में 594 अंक प्राप्त कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को साकार कर दिखाया।
लक्ष्य स्पष्ट है तो सफलता मिलेगी जरूर

राजवीर का संदेश हर विद्यार्थी के लिए प्रेरणा है— "जीवन में परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो सफलता निश्चित होकर रहती है। असली विजेता वही होता है जो गिरकर भी दोबारा उठ खड़ा होता है।" राजवीर का कहना है कि उन्हें बचपन से ही शिक्षिका रही दादी मानकुंवर सोलंकी द्वारा सीख मिली थी कि हमेशा जीवन में उद्देश्य को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने मेरी जिंदगी को संवारने में काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया। शिक्षा और संस्कार का हर एक सबक उन्हीं के द्वारा मुझे मिला है। मम्मी नीलमकुंवर ने मेरी हर जायज अभिलाष को पूरा किया। इस मौके पर मैं बहन के सहयोग को भी याद करूंगा कि उसने भी मुझे तंग नहीं किया और पढ़ने दिया।
Hemant Bhatt