मुफ्तखोरी और मनमानी पर प्रशासन का कड़ा रुख : ₹7 लाख के फ्लैट में 7 साल से मुफ्त रह रहे आवंटियों को नोटिस
⚫ निवासियों ने किया नगर निगम की टीम और पत्रकार पर हमला
⚫ पहले भी दे चुके 6 बार नोटिस
⚫ फ्लैट ब्लाक में बुलेट सहित टू व्हीलर का मजमा
⚫ बेदखली की तैयारी
हरमुद्दा
रतलाम, 31 जुलाई। नगर निगम प्रशासन ने शासकीय संपत्तियों पर अवैध कब्जे और वर्षों से बकाया जमा न करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ अब पूर्णतः सख्त और प्रभावी रुख अपना लिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं पुनर्वास नीति के तहत झुग्गीवासियों को दिए गए बहुमंजिला फ्लैट्स में बिना कोई राशि चुकाए रह रहे परिवारों को नगर निगम ने अंतिम चेतावनी देने गई नगर निगम की टीम और पत्रकारों पर वहां रहने वाले असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। घायलों का उपचार चल रहा है।

जान बचाकर भागते हुए निगम कर्मी
सामाजिक तत्वों ने किया हमला
लगातार दिए गए नोटिसों की अनदेखी के बाद जब शुक्रवार को नगर निगम का अमला अंतिम बेदखली नोटिस चस्पा करने पहुँचा, तो कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रशासनिक टीम और मीडियाकर्मियों पर पत्थर, डंडे और गमले फेंककर शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया। इस घटना में अधिकारी और एक पत्रकार राजेंद्र केलवा घायल भी हुए। सबको वहां से जान बचाकर भागना पड़ा।
मौके पर पहुँचा उच्च प्रशासनिक अमला

पुलिस प्रशासन को जानकारी देते हुए आयुक्त
घटना की सूचना मिलते ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम तरुण जैन, नगर निगम आयुक्त अनिल भाना, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया, औद्योगिक थाना प्रभारी गायत्री सोनी, स्वास्थ्य प्रभारी राजेंद्र सिंह एवं इंजीनियर राजेश पाटीदार सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। शासकीय कार्य में हिंसक बाधा पहुँचाने वालों के विरुद्ध पुलिस द्वारा वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
सर्वसुविधायुक्त जीवनशैली, फिर भी निगम के राजस्व पर चोट

पार्किंग एरिया में खड़ी बुलेट दिखाते हुए आयुक्त
प्रशासकीय निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जो आवंटी स्वयं को ₹1.80 लाख का अंशदान देने में असमर्थ बता रहे हैं, उनके फ्लैट्स के बाहर चार पहिया (फोर व्हीलर) और बुलेट/एक्टिवा जैसी प्रीमियम टू-व्हीलर गाड़ियाँ पार्क में पाई गईं।घरों में महंगे रंगीन टीवी और आधुनिक उपकरण लगे हुए हैं।
बिजली पानी मुफ्त में 7 साल से

फ्लेट के पार्किंग एरिया में गन्दगी का साम्राज्य
इतना ही नहीं, पिछले 7 सालों से ये आवंटी बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी नि:शुल्क उपयोग कर रहे थे। इसके विपरीत, परिसर की साफ-सफाई पर ध्यान न देकर चारों तरफ गंदगी फैला रखी थी, जिससे वहाँ रहने का माहौल दूभर हो चुका था।

प्लेट के तोड़ दिए दरवाजे, गंदगी चारों ओर
4 अगस्त तक रजिस्ट्री का अंतिम अवसर, 5 को होगी बेदखली
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियम और कानून से बढ़कर कोई नहीं है। अंतिम चेतावनी देते हुए नगर निगम द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि 4 अगस्त तक आवंटियों ने अपना बकाया भुगतान कर फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं करवाई, तो 5 अगस्त को नगर निगम पुलिस बल की मदद से सभी 208 डिफाल्टर फ्लैट्स को खाली कराकर अपने कब्जे में ले लेगा।

जिन्हें दिए फ्लैट उनमें से कुछ रहवासी
निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम
प्रशासन की इस प्रभावी कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि शासकीय सुविधाओं का दुरुपयोग और मुफ्तखोरी की मानसिकता अब नहीं चलेगी। जो वास्तव में जरूरतमंद हैं, उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी, लेकिन संपन्न होने के बावजूद नियम तोड़ने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
ईमानदार कर दाताओं की जेब से जा रहा है पैसा
नगर निगम के इस कड़े फैसले से शहर के ईमानदार करदाताओं में खुशी का माहौल है और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।
क्या है पूरा मामला?

नगर निगम आयुक्त अनिल भाना
नगर निगम आयुक्त अनिल भाना ने हरमुद्दा को बताया कि वर्ष 2019 में शासन की जनकल्याणकारी नीति के तहत झुग्गी बस्ती में रहने वाले 396 परिवारों को ₹7 लाख की लागत वाले सर्वसुविधायुक्त फ्लैट्स मात्र ₹2,00,000 के रियायती मूल्य पर आवंटित किए गए थे। उसे दौरान भव्य समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
योजना के तहत आवंटियों को तत्काल केवल ₹20,000 जमा करने थे (जो स्वयं जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों के सहयोग से भरे गए)। शेष ₹1,80,000 की मामूली राशि चुकाने के लिए 7 वर्षों का लंबा समय दिया गया था। इसके बावजूद 208 फ्लैट धारकों ने 7 वर्षों में एक भी भी रुपया जमा नहीं करवाया। झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों का जीवन स्तर सुधारने के लिए प्रधानमंत्री आवास के तहत यह कदम उठाया गया था मगर
Hemant Bhatt