14 दिन की देरी पर उठे सवाल: सैलाना छात्रा मृत्यु मामले में घटना के लगभग आधा महीने बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
⚫ सैलाना एसडीएम को दी जिम्मेदारी
⚫ 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
हरमुद्दा
रतलाम, 28 सितंबर। सैलाना स्थित शासकीय छात्रावास में 12वीं की छात्रा वर्षा सोलंकी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में आखिरकार प्रशासन की नींद टूट गई है। घटना के ठीक 14 दिन बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। जांच की जिम्मेदारी सैलाना अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM) सुनील जायसवाल को सौंपी गई है, जिन्हें 15 दिनों के भीतर अपनी स्पष्ट अभिमत सहित रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, 15 सितंबर को हुई इस दुखद घटना के आधा महीने बाद जांच के आदेश जारी होने और रिपोर्ट के लिए फिर 15 दिन का समय दिए जाने को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
देरी पर उठते तीखे सवाल
15 दिन बाद ही क्यों जागी व्यवस्था?
छात्रा की मौत 15 सितंबर को हुई थी। इतने गंभीर संवेदनशील मामले में तत्काल जांच बैठाने के बजाय प्रशासन ने 15 दिनों तक इंतजार क्यों किया? क्या कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका बनने के बाद ही यह कदम उठाया गया?
सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
घटना के 14 दिन बीत जाने के बाद कई अहम साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में देरी से शुरू हो रही यह जांच कितनी निष्पक्ष और सटीक होगी, इसे लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में संशय बना हुआ है।
30 दिन का लंबा इंतजार
घटना के 14 दिन बाद आदेश जारी हुआ और अब 15 दिन बाद रिपोर्ट मांगी गई है। यानी पीड़ित परिवार को न्याय की पहली प्रशासनिक रिपोर्ट पाने के लिए ही पूरा एक महीना (30 दिन) इंतजार करना पड़ेगा।
आदेश में कानून-व्यवस्था का हवाला
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, घटना के कारण क्षेत्र में कानून और व्यवस्था (Law & Order) प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 196 के तहत यह जांच संस्थित की गई है।
लंबा तो इंतजार नहीं करना पड़ेगा पीड़ित परिवार को
अब देखना यह होगा कि जांच अधिकारी एसडीएम जायसवाल तय समय-सीमा में जांच पूरी कर पाते हैं या फिर पीड़ित परिवार को इंसाफ के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
Hemant Bhatt