कलेक्टर की क्लास में फेल हुए स्कूली बच्चे : सांदीपनि विद्यालय नामली में लिया 'सरप्राइज टेस्ट'
⚫ प्रश्न पूछते ही पसरा सन्नाटा कक्षा में
⚫ ट्यूबर रोज और जामुन की लकड़ी पर अटके बच्चे
⚫ निरीक्षण में पढ़ाई के स्तर और व्यावहारिक ज्ञान की खुल गई पोल
⚫ शिक्षकों को सख्त हिदायत, 'केवल किताबी कीड़ा न बनाएं, बच्चों को दें व्यावहारिक ज्ञान'
हरमुद्दा
रतलाम, 3 अक्टूबर। किताबी पन्नों में लिखे शब्दों को रट लेना ही पढ़ाई नहीं है—इस बात का अहसास शनिवार को नामली स्थित सांदीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को तब हुआ, जब जिले के प्रशासनिक प्रमुख खुद शिक्षक की भूमिका में नजर आए।रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया ने नामली के सांदीपनि विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के बच्चों के साथ बेंच पर बैठकर एग्रीकल्चर (कृषि) की क्लास ली।

कलेक्टर ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई, वर्तमान पाठ्यक्रम और अब तक पढ़ाए गए पाठों का जायजा लिया। हालांकि, निरीक्षण के दौरान पढ़ाई के स्तर और व्यावहारिक ज्ञान की पोल खुल गई।
ट्यूबर रोज और जामुन की लकड़ी पर अटके बच्चे

क्लास के दौरान जब कलेक्टर ने बच्चों की एग्रीकल्चर की पुस्तक का अवलोकन किया, तो उसमें फूलों के नामों के अंतर्गत 'ट्यूबर रोज' दर्ज था। कलेक्टर ने बच्चों से पूछा कि इसे हिंदी में क्या कहते हैं? इस पर पूरी क्लास में सन्नाटा पसर गया और कोई भी छात्र इसका उत्तर नहीं दे पाया। इसके बाद कलेक्टर ने खुद बच्चों को बताया कि 'ट्यूबर रोज' को हिंदी में रजनीगंधा कहते हैं।
इसी तरह, प्राकृतिक संसाधनों और वृक्षों की जानकारी परखते हुए कलेक्टर ने सागौन, साल और सेमल जैसे वृक्षों की विशेषताओं पर चर्चा की। जब उन्होंने बच्चों से सवाल किया कि "कौन-सी लकड़ी पानी में खराब नहीं होती?" तो विद्यार्थी फिर से निरुत्तर हो गए। कलेक्टर ने उन्हें समझाया कि जामुन की लकड़ी पानी में खराब नहीं होती, भले ही यह अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है।
शिक्षकों को कलेक्टर की नसीहत: व्यावहारिक ज्ञान पर दें जोर
निरीक्षण के बाद कलेक्टर श्री कटेसरिया ने विद्यालय के शिक्षकों की क्लास ली और शिक्षा की गुणवत्ता पर असंतोष जताया। उन्होंने शिक्षकों को सख्त निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रखा जाए।
दैनिक जीवन से जोड़कर करवाएं अध्ययन
बच्चों को कृषि, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) जानकारी दी जाए। पढ़ाई को आसपास के वातावरण, पेड़-पौधों और दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाया जाए ताकि बच्चे विषयों को गहराई से समझ सकें।
Hemant Bhatt