सामाजिक सरोकार : सेवानिवृत्त बैंक कर्मियों शुक्ला एवं अग्रवाल का किया सम्मान

सामाजिक सरोकार : सेवानिवृत्त बैंक कर्मियों शुक्ला एवं अग्रवाल का किया सम्मान

'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पेंशनर मित्र मंडल' ने दी भावभीनी विदाई

समाज और संस्थान के लिए अनुभव रहेगा प्रेरणा स्रोत : राजेश तिवारी

⚫ सेवानिवृत्ति केवल सेवा का समापन नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत : तरनी व्यास

हरमुद्दा
​रतलाम, 1 अगस्त। ​भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों का संगठन 'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पेंशनर मित्र मंडल' केवल अपने सदस्यों के हितों तक सीमित न रहकर सामाजिक सरोकार और परस्पर आत्मीयता की एक सुंदर मिसाल पेश कर रहा है। इसी कड़ी में मंडल द्वारा हाल ही में एक गरिमामय स्वागत एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।


​यह आयोजन सिविक सेंटर शाखा से कमलेश शुक्ला एवं तोपखाना शाखा से अनीता अग्रवाल के सेवानिवृत्त होने के उपलक्ष्य में किया गया।वर्षों तक उत्कृष्ट और निष्ठावान सेवाएं देने के उपरांत सेवानिवृत्त हुए दोनों सहयोगियों का पेंशनर मित्र मंडल द्वारा पुष्पमालाएं पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया और उनके उत्तम स्वास्थ्य व उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।आयोजन में प्रमुख रूप से घनश्याम भावसार, पियूष चौधरी, रवि कटारिया, कीर्ति तोड़वाल, शैलजा मिश्रा, किरण वशिष्ठ, चंदना दवे एवं सतीश भावे उपस्थित थे।

वरिष्ठजनों की गरिमामयी उपस्थिति

​समारोह में पेंशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश तिवारी एवं पूर्व सचिव आर. एन. विजयवर्गीय विशेष रूप से मौजूद रहे। वक्ताओं ने सेवानिवृत्त हुए साथियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कार्यमुक्त होने के बाद भी वरिष्ठ साथियों का अनुभव समाज और संस्थान के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बना रहता है।

​इन गणमान्य सदस्यों ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा

​आयोजन में पेंशनर मित्र मंडल के अनेक सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से दिनेश मालपानी, रविन्द्र ठाकुर, रमेश शर्मा, नरेंद्र सोलंकी, अशोक माहेश्वरी, श्याम ललवानी, राजेश डारिया, नरेश सकलेचा, रमेश व्यास, आनंद वोहरा, अरुण चोपड़ा, प्रशांत शोचे, विजय दवे, अल्फ्रेड, प्रमोद राघव एवं भूपेंद्र जोशी सहित बड़ी संख्या में साथी उपस्थित रहे।

​सामाजिक सरोकार की एक पहल

सेवानिवृत्ति बैंक कर्मी तरनी प्रकाश व्यास का कहना है कि ​इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से 'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पेंशनर मित्र मंडल' यह संदेश देता है कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा का समापन नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। अपने पूर्व सहयोगियों के साथ यह आत्मीय जुड़ाव और परस्पर सम्मान की परंपरा समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और सौहार्द का माहौल निर्मित करती है।