रतलाम में सावन की मिठास: घेवर और फीणी की बाजारों में फैल रही खुशबू
⚫ मालवी स्वाद के दीवाने है स्वादुजन
हरमुद्दा
रतलाम, 28 अगस्त। मालवांचल के प्रसिद्ध जायकों की खुशबू बाजारों में महकने लगी है। अपनी नमकीन और मिठाइयों के लिए दुनियाभर में मशहूर रतलाम का सराफा बाजार और माणक चौक इन दिनों घेवर और फीणी की बिक्री से गुलजार है। रक्षाबंधन त्योहार पर घेवर-फीणी की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे मालवा के लोग आज भी बड़े चाव से निभा रहे हैं।

मालवी अंदाज में शुद्धता और स्वाद की परंपरा
चौमुखी पुल पर बरसों पुरानी पेड़ी के वर्धमान मेहता ने बताया कि रतलाम में तैयार होने वाली फीणी अपनी बारीक परतों, कुरकुरेपन और शुद्ध देसी घी के स्वाद के लिए जानी जाती है। वहीं, घेवर को मैदे और घी के अनोखे घोल से एक खास सांचे में तलकर तैयार किया जाता है, जिस पर चाशनी, मावा और मेवों की सजावट की जाती है। जेवर जहां 760 रुपए किलो मिल रहे हैं वहीं 750 रुपए से लेकर 850 रुपए किलो में बिक रही है।

स्थानीय हलवाइयों शुमार रखने वाले सांवरिया पुरोहित का कहना है कि मालवा के पानी और बनाने की पारम्परिक कला के कारण यहाँ के घेवर-फीणी का स्वाद अन्य राज्यों से काफी अलग और खास होता है।

बाजार में विविधता और मांग
इस बार बाजारों में ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कई नई किस्में उपलब्ध हैं।

मावा और रबड़ी घेवर: यह सबसे लोकप्रिय वैरायटी है, जिसमें घेवर के ऊपर गाढ़ी रबड़ी और मावे की परत चढ़ाई जाती है।
केसर-पिस्ता फीणी: शुद्ध देसी घी में बनी फीणी पर केसर की खुशबू और सूखे मेवों की सजावट ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।

शुगर-फ्री और सादा घेवर: स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों और बाहरी शहरों में भेजने के लिए सादे (बिना चाशनी वाले) घेवर की भी खासी मांग है।
त्योहारों पर मिठास भेजने का रुझान
सावन और रक्षाबंधन पर बहन- बेटियों को सावन की 'सिंजारा' (उपहार) के रूप में फीणी और घेवर भेजने का विशेष महत्व है। रतलाम से यह पारंपरिक मिठाई न केवल आसपास के जिलों में, बल्कि देश के अन्य बड़े शहरों और विदेशों में बसे मालवियों तक कोरियर के जरिए भेजी जा रही है। दुकानदारों के अनुसार, इस सीजन में मांग में काफी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे मिठाई बाजार में भारी चहल-पहल है।
Hemant Bhatt