फैसला : पूर्व पति रिंकू को सुनाई 5 साल की सजा

फैसला : पूर्व पति रिंकू को सुनाई 5 साल की सजा

वर्तमान पति अभिषेक को हत्या करने की नीयत से मारा था चाकू 

⚫ मामला जुलाई 2025 का

हरमुद्दा
रतलाम, 11 अप्रैल। पूर्व पति द्वारा वर्तमान पति की हत्या करने के आशय से चाकू से चोट पहुचाने वाले आरोपी रिंकू को
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कु नीना आशापुरे ने पाँच वर्ष के कारावास और अर्थदंड से दण्डित किया।


अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने हरमुद्दा को बताया कि अभियुक्त रिंकू पिता दुलीचंद  फरियादिया का पूर्व पति है। फरियादिया द्वारा रिंकू को छोड़कर अभिषेक अधिकारी के साथ विवाह कर लिया था, जिससे नाराज होकर 22 जुलाई 2025 की रात्रि में अभियुक्त बाणेश्वरी कालोनी रतलाम स्थित फरियादिया के घर पर आया और फरियादिया और उसके पति अभिषेक के साथ गाली गलौच करने लगा , फरियादिया के मना करने पर अभियुक्त रिंकू ने सब्जी काटने के चाकू से अभिषेक को जान से मारने की नीयत से पेट में 4 जगह चाकू से मारा जिससे खून निकलने लगा।

फरियादिया को भी पहुंचाई चोट

फरियादिया जब बचाने आई तो अभियुक्त ने उसको भी कलाई पर चाकू से चोट पहुंचाई थी। अभियुक्त ने यह भी धमकी दी थी कि यदि अभिषेक के साथ रही तो जान से  फरियादिया और उसके वर्तमान पति अभिषेक को जान से खत्म कर देगा।  

आरोपी को पकड़ लिया था मौके पर

फरियादिया और अभिषेक को ऑटो से अस्पताल इलाज के लिए ले गए। आरोपी को मौके पर ही पकड़ कर पुलिस के सुपुर्द किया गया था। अभियुक्त के विरुद्ध बीएनएस की धारा 109, 296, 115 (2),118(1), 351(3) के अंतर्गत प्रकरण औद्येगिक थाने पर पंजीबद्ध किया गया था।  

सुनाई 5 साल की सजा

अभिषेक लगभग 16 दिनों तक शासकीय मेडिकल कालेज में भर्ती रहा था। प्रकरण का विचारण प्रधान जिला एव सत्र न्यायाधीश आशापुरे के न्यायालय में किया गया था । प्रकरण में फरियादिया पक्षविरोधी हो गई थी ,परंतु अन्य साक्ष्यों के कथन और विशेषज्ञ साक्ष्यों के कथन और रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत किए गए थे। अभियोजन के साक्ष्य एवं तर्क से सहमत होकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशापुरे द्वारा अभियुक्त रिंकू पिता दुलीचंद खंगरावत निवासी - ग्राम- सारथल   जिला- बांरा राजस्थान को अभिषेक पर जानलेवा हमला करने का दोषी पाते हुए 5 वर्ष के कारावास एवं 2000/ के अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता संजीव सिंह चौहान द्वारा की गई।