फैसला : फर्जी अंकसूची से लेब असिस्टेंट बने सलमान को 7 साल की सजा
⚫ 2017 में खुली फर्जीवाड़े की पोल
⚫ जून 2016 में दी थी अस्थाई नियुक्ति
⚫ सेवा में रहते हुए पिता का हुआ था निधन
हरमुद्दा
रतलाम, 18 मार्च। फर्जी अंकसूची लगाकर जिला अस्पताल में लेब असिस्टेंट की नौकरी पाने वाले सलमान पिता अनवर खान, उम्र 38 वर्ष, निवासी नागझिरी, उज्जैन को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने सजा सुनाई। तीन धाराओं में 7 वर्ष व एक में 2 वर्ष की सजा सुनाई। 2000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर 1-1 महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा भी दी गई है। ये फैसला ने दिया है।

अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि 25 अप्रैल 2017 को डॉ. प्रभाकर ननावरे द्वारा एक आवेदन थाने स्टेशन रोड रतलाम पर प्रस्तुत किया कि अनवर खां एन.एम.ए. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पिपलौदा का शासकीय सेवा में रहते हुए 08 नवंबर 2014 को निधन हो गया था। निधन के बाद इनके पुत्र सलमान ने 13 फरवरी 2015 को अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया। आवेदन पत्र के साथ शैक्षणिक योग्यता कक्षा 10 वीं एवं हायर सेकेण्डरी सर्टिफिकेट परीक्षा (10+2) की अंकसूची साईंस बायलॉजी सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।
2 वर्ष की परिवीक्षा में सलमान को दी अस्थाई नियुक्ति
10 जून 2016 को अभियुक्त सलमान खान को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर अस्थाई नियुक्ति जिला चिकित्सालय रतलाम में लेब असिस्टेंट (तृतीय श्रेणी) के पद पर प्रदान की गई। 13 जून 2016 को अभियुक्त सलमान ने जिला चिकित्सालय रतलाम में लेब असिस्टेंट का पद भी ज्वाइन कर लिया।
2017 में भेजी अंक सूची सत्यापन के लिए भोपाल
जिला चिकित्सालय रतलाम से पत्र के माध्यम से 27 फरवरी 2017 को संचालक मध्यप्रदेश राज्य ओपन स्कूल भोपाल से अभियुक्त सलमान की हायर सेकेण्डरी सर्टिफिकेट परीक्षा (10+2) की अंकसूची साईंस बायलॉजी का सत्यापन करवाने पर भोपाल से जानकारी दी गई कि कार्यालयीन अभिलेखानुसार मिलान करने पर अंकसूची का मिलान नहीं हो पाया है। सिविल सर्जन रतलाम द्वारा 12 अप्रैल 2017 को अवगत कराया गया कि अभियुक्त सलमान की अंकसूची असत्य, फर्जी एवं कूट रचित है।अभियुक्त ने नियुक्ति दिनांक से शासकीय राशि कुल 97,348/- रुपए वेतन के रूप में प्राप्त किए।
सलमान ने किया विभाग को गुमराह
अभियुक्त सलमान ने विभाग को गुमराह कर नियुक्ति प्राप्त की है। थाना स्टेशन रोड पर सहायक उप निरीक्षक केसर सिंह यादव को एफ.आई.आर. दर्ज करने के लिए डॉ. प्रभाकर ननावरे का आवेदन प्राप्त होने पर अभियुक्त सलमान पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 409 में एफआईआर दर्ज की गई। जांच कर आवश्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
कुछ भी नहीं हुआ मिलन अंक सूची से
प्रकरण में पैरवीकर्ता अपर लोक अभियोजक पाटीदार ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस द्वारा थाने से अंकसूची का सत्यापन प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरमौर जिला रीवा से करवाए जाने पर वहां से जानकारी प्राप्त हुई। अभियुक्त सलमान ने हाई सेकेंडरी का फॉर्म भरा ही नहीं। वर्ष 2007 में मध्य प्रदेश राज्य ओपन की परीक्षा आयोजित होने की जानकारी के साथ-साथ विवादित अंकसूची उनके कार्यालय से जारी होना नहीं पाई गई। अंकसूची में लगाई गई सील भी उनके विद्यालय की नहीं है। अंकसूची पर जो अनुक्रमांक लिखे हैं, वह किसी भी विद्यार्थी को जारी नहीं किए गए हैं।
Hemant Bhatt