शख्सियत
शख्सियत : ग़ालिब, मीर, दाग़ को पढ़े बिना शायरी नामुमकिन
ग़ालिब, मीर, सौदा, मोमिन खां मोमिन, अमीर खुसरो, ज़ौक, फ़ैज़ अहमद फै़ज़, फिराक़ गोरखपुरी,...
शख्सियत : विश्व पुस्तक मेला छोड़ गया अनेक सवाल
ऐसे में जरूरत है कि जिला स्तर पर पुस्तक मेले और प्रदर्शनियां लगाई जानी चाहिए। इसके...
शख्सियत : धारदार कविताएं क्यों नहीं लिखी जाती हैं अब?
आज की कविता सामाजिक सरोकारों के बजाये निजी भावनाओं का हिस्सा हो चुकी है, वह अमूर्त...
शख्सियत : संपूर्ण भूमंडल को ढंक चुकी स्वार्थ की कालिख़
आज संयुक्त परिवारों का दिन-प्रतिदिन विखंडन हो रहा है, समुदाय टूट रहे हैं, समाज कमजोर...
शख्सियत : गीता की तरह एक और दर्शन लेगा जन्म
जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार दुनिया के कई हिस्सों में युध्द और सैन्य तनाव जारी...
शख्सियत : अवधूत जयनारायण बापजी थे धुरंधर वक्ता, अभिभाषक...
जैसा कि लोग बताते हैं जयनारायण जी ने सोचा कि आज उनकी वजह से ईश्वर को तकलीफ पहुंची...
शख्सियत : छोटे और बड़े शहरों के लेखकों के बीच कभी पाटी नहीं...
कस्बाई लेखकों की पांडुलिपियां आर्थिक कारणों से छपने को तरसती रहती हैं और बड़े लेखकों...
शख्सियत : संस्कृत दुनिया की सबसे समृध्द भाषा लेकिन, उपेक्षा...
सम्राट अशोक के शासन काल में यह अस्तित्व में नहीं थी, उस समय ’ब्राम्ही लिपि’ चलती...
शख्सियत : मोबाइल टीवी की दुनिया ने आदमी को आदमी से कर दिया...
आप किसी भी घर में चले जाइए, आपको परिवार के सदस्यों को अपने-अपने मोबाइल पर झुका हुआ...
विचार सरोकार : मर चुकी है मानवता?
कोचिंग संस्थानों, शिक्षण संस्थानों में प्रतिवर्ष हजारों छात्र-छात्राएं आत्महत्या...
शख्सियत : अपना काम कुशलता से संपादित करना नहीं किसी कविता...
कविता लिखने को भले ही आसान मान लिया गया है, जबकि ऐसा है नहीं! कविता में मनुष्य समुदाय...
शख्सियत : एआई लाखों लोगों की रोजी रोटी छीन लेगा
एआई पर अत्यधिक निर्भरता के कारण इंसानों की सोचने समझने की शक्ति कम हो सकती है, जिससे...
शख्सियत : देश की मूलभूत समस्याओं से जनता को जागरूक बनाना...
आज मोबाइल कम्पनियों ने युवाओं को गुलाम बना दिया है। ठीक उसी तरह जैसे ब्रिटिश ईस्टइंडिया...
शख़्सियत : स्थानीय परिवेश में होती हैं श्रेष्ठ कविता की...
जीवन से जुड़ा कवि लोक भाषा चुनता है और लोक भाषा परिवर्तनशील होती है, इसलिए इसमें...
शख़्सियत : ख़तरों का सामना करती रही है अभिव्यक्ति की आज़ादी
आज हर वह रचनाकार, कलाकार जो सच को अपनी अन्तर्वस्तु बनाना चाहता है, उसे अनेक कठिनाइयों...
शख़्सियत : सोशल मीडिया के जरिए लुगदी साहित्य का हो रहा आदान-प्रदान
साहित्य पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है समय-समय पर समाज के कानों तक वह बात पहुंचाने की...