रतलाम में 55 लाख की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी

रतलाम में 55 लाख की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी

साइबर सेल और परिजनों की सतर्कता से 20 लाख और डूबने से बचे

⚫ 15 लाख रुपए कराए फ्रीज

हरमुद्दा
​रतलाम, 19 सितंबर। मध्य प्रदेश के रतलाम में 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए साइबर ठगी की एक बड़ी वारदात सामने आई है। शातिर अपराधियों ने पुलिस और एटीएस (ATS) अधिकारी बनकर कुवैत में व्यवसाय करने वाले एक व्यक्ति को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से साठगांठ का डर दिखाया और उससे 55 लाख रुपये ठग लिए। हालांकि, परिजनों की सूझबूझ और रतलाम साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से 15 लाख रुपये बैंक खातों में फ्रीज करा लिए गए, वहीं 20 लाख रुपये की अतिरिक्त चपत लगने से बचा ली गई।


​विदेश में रहने वाले कारोबारी को बनाया निशाना


​पीड़ित, जो कुवैत में ऑटो पार्ट्स का कारोबार करते हैं, 15 सितंबर को रतलाम आए हुए थे। इसी दौरान उनके पास अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्टर बताया और दावा किया कि पीड़ित के नाम से जारी एक अन्य सिम कार्ड से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों से बातचीत की गई है।

बनाया लगातार दबाव

इसके बाद पीड़ित को डराने के लिए व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल किए गए, जिसमें ठग पुलिस यूनिफॉर्म पहनकर एटीएस (ATS) अधिकारी बने नजर आए। पीड़ित को हथियारों के फोटो भेजकर पहचान करने को कहा गया और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी लेटरहेड पर एफआईआर (FIR) की कॉपी भी दिखाई गई। 'डिजिटल अरेस्ट' कर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद से जुड़े केस में फंसाने की धमकी देकर आरोपी पीड़ित पर लगातार दबाव बनाते रहे।

दो दिन में खातों में ट्रांसफर करवाए 55 लाख रुपए

जांच और 'सत्यापन' (Verification) के नाम पर राशि वापस करने का झांसा देकर साइबर ठगों ने पीड़ित से उनके आधार और पैन कार्ड हासिल किए। दबाव के चलते पीड़ित ने:

⚫​ 17 सितंबर: 35 लाख रुपये RTGS किए।

⚫ ​18 सितंबर: 20 लाख रुपये फिर ट्रांसफर किए।
​ठगों के चंगुल में फंसे पीड़ित को विश्वास था कि सत्यापन के बाद उनकी रकम लौटा दी जाएगी।

​पत्नी के फोन और रिश्तेदारों की मुस्तैदी ने बचाए 20 लाख

​19 सितंबर को पीड़ित घर में अकेले थे और ठगों के निर्देश पर अतिरिक्त 20 लाख रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी में थे। इस बीच जब पीड़ित की पत्नी का फोन पर संपर्क नहीं हो सका, तो उन्होंने रतलाम स्थित अपने रिश्तेदारों को खबर दी। रिश्तेदारों ने मौके पर पहुंचकर जब पीड़ित को हड़बड़ी और घबराहट में देखा, तो तुरंत रतलाम साइबर सेल को सूचना दी।
​साइबर सेल के प्रधान आरक्षक लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी और परिजनों ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित की काउंसलिंग की और उन्हें डिजिटल अरेस्ट के खेल के बारे में समझाकर 20 लाख रुपये ट्रांसफर करने से रोक लिया।

​पुलिस की कार्रवाई: 15 लाख फ्रीज, E-FIR दर्ज

​घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी रतलाम अमित कुमार (IPS) के निर्देश पर एएसपी विवेक कुमार, एएसपी राकेश पंद्रो, माणकचौक थाना प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह चौहान और साइबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक जीवन बारिया की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला।
​NCRP पोर्टल की मदद: तकनीकी टीम ने 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' (NCRP) के माध्यम से त्वरित कार्रवाई की और संबंधित बैंकिंग चैनलों से संपर्क कर ठगे गए 55 लाख में से 15 लाख रुपये फ्रीज करवा दिए।

​आगे की जांच: मामले में E-FIR दर्ज कर ली गई है और आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें जुट गई हैं।

​रतलाम पुलिस की सख्त हिदायत

 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं, सावधान रहें, सुरक्षित रहें!

रतलाम पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि पुलिस, CBI, ED, NCB, TRAI, ATS या सुप्रीम कोर्ट का कोई भी अधिकारी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं कर सकता।

⚫ ​घबराएं नहीं: यदि कोई व्यक्ति गिरफ्तारी, सिम कार्ड ब्लॉक होने, मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस का भय दिखाए, तो समझ जाएं कि यह साइबर ठगी है।

⚫ ​पैसा ट्रांसफर न करें: किसी के कहने पर अज्ञात खातों में पैसे न भेजें।

⚫ ​तत्काल शिकायत करें: ऐसी घटना होते ही तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस/साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क करें।