चिकित्सा बनी मानवता की मिसाल: रतलाम मेडिकल कॉलेज ने वर्षों से बिछड़ी बुजुर्ग माँ को कराया परिजनों से पुनर्मिलन

चिकित्सा बनी मानवता की मिसाल: रतलाम मेडिकल कॉलेज ने वर्षों से बिछड़ी बुजुर्ग माँ को कराया परिजनों से पुनर्मिलन

वर्षों बाद अपनी माँ को सुरक्षित देखकर परिजनों की भर आईं आँखें

⚫ ​टीम भावना और निस्वार्थ सेवा से आया मानसिक स्थिति में सुधार

⚫ ​सफल ऑपरेशन और परिजनों की तलाश

⚫ "सहानुभूति और समय पर इलाज से संभव है पुनर्वास"

हरमुद्दा
​रतलाम, 7 अगस्त। डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के मनोरोग और अस्थि रोग विभाग ने संवेदनशीलता और समर्पित सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। लावारिस और मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में मिली एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला का न केवल सफल उपचार व ऑपरेशन किया गया, बल्कि कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें उनके परिवार से भी मिला दिया गया। वर्षों बाद अपनी माँ को सुरक्षित देखकर परिजनों की आँखें छलक आईं।

​जावरा से हुई थी रेफर, हालत थी गंभीर

गत 29 जुलाई को जावरा सिविल अस्पताल से एक अज्ञात बुजुर्ग महिला को गंभीर मानसिक बीमारी और पैर में फ्रैक्चर की हालत में रतलाम मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग लाया गया था। महिला के साथ कोई परिजन नहीं था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन, मनोरोग विभाग और हड्डी रोग विभाग ने संयुक्त रूप से निर्णय लेकर महिला को भर्ती किया और इलाज शुरू किया।

​टीम भावना और निस्वार्थ सेवा से आई मानसिक स्थिति में सुधार

मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. कपिल देव आर्य के मार्गदर्शन में डॉ. गौरव चितौड़ा, डॉ. प्रहलाद पाटीदार, डॉ. अखिलेश प्रजापति, डॉ. आँचल गुप्ता, डॉ. कर्तव्य डामोर एवं डॉ. स्वर्णिमा की टीम ने मरीज का इलाज शुरू किया। इस दौरान नर्सिंग स्टाफ (जितेन्द्र, रिया पाटीदार, माधुरी, दीपांशी, निकिता), सुरक्षा कर्मियों (बालचंद, भरत, बलवंत) और सफाई कर्मियों (संगीता, किरण, मुन्नालाल) ने बेहद आत्मीयता से देखरेख की। निरंतर देखभाल का परिणाम यह रहा कि महिला की मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।

​सफल ऑपरेशन और परिजनों की तलाश

मानसिक स्थिति बेहतर होने के बाद हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नितिन किराड़िया, डॉ. प्रदीप दुबे व डॉ. अजय वरुण की टीम ने निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. शैलेन्द्र डाबर एवं डॉ. राहुल मैड़ा के सहयोग से महिला के पैर का सफल ऑपरेशन किया।
​इसी बीच मनोरोग विभाग ने महिला के घर का पता लगाने के प्रयास तेज कर दिए। साइकियाट्रिक सोशल वर्कर महेश दीक्षित, जिला विधिक सहायता अधिकारी पूनम तिवारी और जन अभियान परिषद् की परामर्शदाता मेघा श्रोत्रिय के सहयोग से विभिन्न माध्यमों से सुराग जुटाए गए। अंततः परिजनों का पता लगाकर उनसे संपर्क साधा गया।

​भावुक कर देने वाला पल, कानूनी प्रक्रिया के बाद सुपुर्दगी

सूचना मिलते ही जब परिजन अस्पताल पहुँचे, तो सालों से लापता माँ को जीवित और स्वस्थ देखकर उनका गला रुध गया और आंखें भर आईं। पुलिस की मौजूदगी में सभी वैधानिक औपचारिकताओं और पहचान सत्यापन के बाद महिला को सकुशल परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का माध्यम है डॉक्टरी पेशा 

​यह उपलब्धि अधिष्ठाता डॉ. अनीता मुथा, अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा, पुलिस प्रशासन और समस्त स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों का सुखद परिणाम है, जिसने साबित कर दिया कि डॉक्टरी केवल एक पेशा नहीं, बल्कि करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का माध्यम है।

"सहानुभूति और समय पर इलाज से संभव है पुनर्वास"

मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. कपिल देव आर्य ने बताया कि यदि मानसिक रोगियों को सही समय पर उपचार, आत्मीयता और सामाजिक सहयोग मिले, तो वे सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। विभाग भविष्य में भी ऐसे निराश्रित मरीजों के इलाज और पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

डॉ. कपिल देव आर्य, विभागाध्यक्ष, मनोरोग